नई दिल्‍ली, अनूप सेठ। अपने टाइम पर कंट्रोल करने के लिए रुपये का इस्तेमाल कीजिए...आप जो चाहते हैं, आप जब चाहते हैं, ये सब करने की क्षमता आपको सबसे अधिक डिविडेंड देती है।

मॉर्गन हाउसेल की पुस्तक 'रुपये के मनोविज्ञान' (The Psychology of Money) में रुपये की ताकत को सबसे अच्छे तरीके से समझाया गया है- यह आपको आपके अपने समय पर नियंत्रण की ताकत देता है। कुल-मिलाकर लाइफ इंश्योरेंस का भी यही काम है। इससे आप पर निर्भर लोगों को सहारा मिलता है और यह आपके मौजूदा संसाधनों में किसी तरह की कमी को रोकता है। इसलिए इस बात को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं है कि पर्याप्त लाइफ कवर महत्वपूर्ण है। इस मामले में भारत काफी पीछे है। ऐसे में इन पहलुओं पर एक बार फिर से विचार किए जाने की जरूरत है कि लोगों को कितने के लाइफ कवर की आवश्यकता होती है।  

अधिकतर भारतीय लाइफ इंश्योरेंस को बचत के एक साधन के रूप में देखते हैं और मानते हैं कि इस तरह के प्रोडक्ट्स से संबंधित इंश्योरेंस से जुड़े बेनेफिट्स पर्याप्त होते हैं। ऐसे में आइए एक चीज को साफ करें- हर व्यक्ति जो कुछ पैसे कमाता है और जिस पर कुछ लोग वित्तीय रूप से निर्भर हैं, उसे टर्म इंश्योरेंस खरीदना ही चाहिए।

इसके लिए अरुण का ही उदाहरण लेते हैं। वह 35 साल के हैं और उनकी एक बच्ची है और उनकी पत्नी को दूसरा बच्चा होने वाला है। ऐसे में अरुण एक टर्म इंश्योरेंस खरीदना चाहते हैं और स्थापित नियम के तौर पर वह अपनी सालाना आय की 10 गुना रकम का लाइफ कवर लेना चाहते हैं। अगर यह देखा जाए कि अरुण हर साल 10 लाख रुपये कमाते हैं तो स्थापित नियम के हिसाब से उन्हें एक करोड़ रुपये का लाइफ कवर लेना चाहिए।

हालांकि, अगर सही तरह से आकलन करें तो अरुण को अपनी आय से 10 गुना से ज्यादा रकम का लाइफ कवर लेना चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें तो इस बात की गुंजाइश बहुत अधिक है कि अरुण के पास पर्याप्त कवरेज नहीं है। ऐसे में हम यह कैसे तय करेंगे कि उसे कम-से-कम कितने लाइफ कवर की जरूरत है?

डीआईएमई का तरीका

यह किसी भी व्यक्ति की वर्तमान वित्तीय स्थिति और उसकी भविष्य की जरूरतों का आकलन करने का सबसे अच्छा तरीका है। यहां अरुण को यह जानना होगा:

डेट (कर्ज): अपने रेकरिंग डेट के लिए प्रोविजनिंग बहुत महत्वपूर्ण होता है। ऐसा मान लेते हैं कि अरुण पर दो लाख रुपये का स्टूडेंट लोन है।

आय: आपको यहां देखना होगा कि आप अपने परिवार को कितने साल के लिए नियमित इनकम प्रदान करना चाहते हैं। अगर अरुण के केस में मान लेते हैं कि वह पांच साल के लिए अपने परिवार को आय की निरंतरता देना चाहता है तो उसे कम-से-कम 50 लाख रुपये चाहिए होंगे।

मॉर्गेज: अगला चरण यह है कि आप अपने होम लोन की गणना करते हैं। यह एक बड़ा कर्ज होता है जो आपके नहीं रहने पर आपके परिवार की वित्तीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में मान लीजिए कि अरुण पर होम लोन के रूप में 50 लाख रुपये का बकाया है।

शिक्षा से जुड़े खर्चः

अरुण एक बच्ची के पिता हैं और उन्हें अपनी बच्ची को 25 साल तक की उम्र तक सपोर्ट करने के लिए फाइनेंशियल कॉर्पस की जरूरत होगी। जिस तरह से शिक्षा से जुड़ी लागत लगातार बढ़ रही है, अरुण को अपनी बच्ची के ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई के लिए एक अनुमान के मुताबिक कम-से-कम 35 लाख रुपये की जरूरत होगी। उनकी पत्नी को दूसरा बच्चा होने वाले है, ऐसे में अपने दूसरे बच्चे के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए उन्हें और 50 लाख रुपये की जरूरत होगी।

इन सभी बातों को ध्यान में रखकर कहा जा सकता है कि अरुण को अपने भविष्य के लिए 1.87 करोड़ रुपये की जरूरत होगी लेकिन इसमें एक चीज शामिल नहीं है। अगर हम मान लेते हैं कि अरुण के पास एफडी ओर म्यूचुअल फंड के रूप में 20 लाख रुपये पड़े हैं तो उनको अंततः 1.67 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। अगर हम मान लेते हैं कि अरुण की मौत 10 साल बाद होती है तो 4% की रेट से उसे लाइफ कवर के रूप में 2.47 करोड़ रुपये (उसकी वर्तमान वार्षिक आय से करीब 25 गुना ज्यादा) की जरूरत होगी।

पर्सनल फाइनेंस एडवाइजर इस चीज में आपकी मदद कर सकते हैं। यहां ध्यान रखने वाली अहम बात यह है कि लाइफ इंश्योरेंस एक बार खरीदे जाने वाली चीज नहीं है। आपको समय-समय पर अपनी प्रोटेक्शन से जुड़ी जरूरतों की समीक्षा करते रहना चाहिए। खासकर, ऐसे समय में जब आप जीवन के चरण में धीरे-धीरे आगे की ओर बढ़ते हैं। अगर आपने परिवार के लिए अच्छा लाइफ कवर तैयार कर लिया है तो आपके परिवार के लोगों को अपने समय पर काफी अच्छा नियंत्रण हासिल हो जाएगा।

(लेखक एडलवाइज टोक्यो लाइफ इंश्योरेंस में चीफ डिस्ट्रीब्यूशन ऑफिसर हैं। छपे विचार उनके निजी हैं।)

Edited By: Ashish Deep