नई दिल्ली। (बलवंत जैन) वित्त वर्ष के दौरान सेक्शन 80C के अंतर्गत उपलब्ध विकल्पों में 1.5 लाख रुपए तक निवेश करके आप आयकर में छूट पा सकते हैं। अब चूंकि वित्त वर्ष समाप्त होने में 2 महीने से भी कम का समय रह गया है तो जिन करदाताओं ने अब तक निवेश नहीं किया वे सब असमंजस में हैं कि कहां निवेश करना बेहतर होगा।

निवेश कहां ना करें
सिर्फ टैक्स बचाने के लिए बीमा खरीदना सरासर मूर्खता है। आपको आपके ऊपर निर्भर व्यक्तियों की आर्थिक सुरक्षा के लिए ही बीमा खरीदना चाहिए और वो भी ऑनलाइन टर्म प्लान। अत: आप सिर्फ टैक्स बचाने के लिए बीमा पॉलिसी न खरीदें न ही कोई युलिप प्लान खरीदें।

वैसे ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम) एक अच्छा विकल्प है। परंतु यहां मिलने वाला रिटर्न शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। ऐसे में इस विकल्प में आपका एकमुश्त राशि निवेश करना समझदारी नहीं होगी। ईएलएसएस में निवेश पूरे साल में औसत तरीके से किया जाना चाहिए। आप चाहें तो अगले वर्ष के लिए अप्रैल से ही अच्छे ईएलएसएस फंड में नियमित निवेश की शुरूआत कर सकते हैं।

कहां करें निवेश:
अब चूंकि ब्याज की दरें कम हो रही हैं और इसके भविष्य में भी कम होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। आपको निवेश ऐसे विकल्प में करना चाहिए जहां ब्याज दरों के कम होने के बाद भी आपका रिटर्न न घटे। मेरे हिसाब से पांच साल की टैक्स सेविंग फिक्सड डिपॉजिट या नेशनल सेविंग सर्टीफिकेट में निवेश किया जा सकता है। बैंक एफडी में आपको 6.50 फीसद से 7.50 फीसद तक का रिटर्न अगले पांच वर्षों तक मिलेगा। वहीं एनएससी में मौजूदा ब्याज दर 8 फीसद है, जो आने वाले पांच वर्षों के लिए निश्चित है। आरबीआई की ओर से ब्याज दरें घटाने का भी इस रिटर्न पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बैंक एफडी की तुलना में एनएससी ज्यादा आकर्षक है।

एफडी से ज्यादा एनएससी आकर्षक क्यों?
बैंक एफडी के मुकाबले एनएससी ज्यादा आकर्षक विकल्प है क्योंकि जरूरत पड़ने पर आप एनएससी के सामने बैंक से लोन भी ले सकते हैं। इसके अलावा एनएससी पर मिलने वाला ब्याज आपकी आय में जुड़ता है लेकिन शुरू के चार वर्षों में मिले ब्याज पर आप सेक्शन 80सी में कटौती का लाभ भी ले सकते हैं।

फिक्सड डिपॉजिट और एनएससी के अलावा तीसरा वित्तीय उत्पाद जिसमें आप अभी भी निवेश कर सकते हैं वह पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) है। चूंकी आप पीपीएफ खाते से कर्ज भी ले सकते हैं और कुछ समय बाद निकासी भी कर सकते हैं। लेकिन आपके द्वारा जमा करवाया हुआ पूरा पैसा आप सिर्फ 15 साल बाद ही निकाल सकते हैं। हालांकि पीपीएफ पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह करमुक्त है। परंतु भविष्य में होने वाली ब्याज दर में कटौती का असर आपके पीपीएफ खाते के पूरे बैलेंस पर पड़ेगा। अत: आप अपनी भविष्य की जरूरत के हिसाब से निश्चित कर सकते हैं कि आप पीपीएफ में निवेश करेंगे या बैक एफडी और एनएससी जैसे विकल्प आपके लिए बेहतर होंगे।

आशा है आपको इस आर्टिकल से निर्णय लेने में सुविधा होगी।

 

Posted By: Surbhi Jain

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