नई दिल्ली (बलवंत जैन)। पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के बाद बैंक में पैसा रखने वाले सब लोग चिंतित है कि अगर किसी कारण से उनका बैंक, जिसमें उनका पैसा जमा पड़ा है, डूब गया तो उनके पैसों का क्या होगा। चलिए विस्तृत में चर्चा करते हैं।

डिपॉजिट का बीमा- हर बैंक को अपने यहां पर जमा पैसे के लिए प्रति खाताधारक के लिए एक लाख का बीमा लेना पड़ता है। बैंक को यह बीमा डिपोजिट इंश्योरेंस व क्रेडिट गारंटी कोपोरेशन से लेना पड़ता है। आपकी समस्त डिपोजिट चाहे वो बचत खाते में हो या आपके आरडी खाते में या फिक्स्ड डिपोजिट खाते पर कुल मिलाकर एक लाख तक का बीमा होता है। अगर आपकी कुल जमा राशि एक लाख से ज्यादा है तो आपको सिर्फ एक लाख रुपये ही मिलेंगे और बाकी पैसा डूब भी सकता है, अगर बैंक के पास संपत्ति नहीं है। किसी भी बैंक में विशेष रूप से कोपरेटिव बैंक में पैसा रखने के पहले यह निश्चित कर लें कि बीमा प्रीमियम का भुगतान बैंक ने कर दिया है। जहां तक हो थोड़े ज्यादा ब्याज के लोभ में आप ज्यादा पैसा ऐसे बैंक में नहीं रखे। सरकारी बैंक में इस तरह के जोखिम नहीं रहते हैं।

बैंक विलिनीकरण- कई बार रिजर्व बैंक बीमार बैंक का कोई दूसरे स्वस्थ बैंक में विलीनीकरण का आदेश दे सकता है। एक बैंक का दूसरे बैंक में विलीनीकरण होने की स्थिति में आपको आपके बैंक के पूरी तरह से अधिग्रहण होने तक इंतजार करना पड़ेगा जिसमें कई बार दो से तीन साल तक भी लग सकता है। विलीनीकरण पूर्ण होने के पश्चात आपको आपका पूरा पैसा सामान्यत: मिल जाएगा।

बैंक का परिसमापन- अगर आपके बैंक का अधिग्रहण कोई ओर बैंक नहीं कर रहा है तो रिजर्व बैंक आपके बैंक को पूरी तरह से बंद करने का आदेश दे सकता है। बैंक को पूरी तरह से बंद करने के आदेश के बाद बैंक की संपत्ति को बेचा जाता है एवं बेचने पर मिले पैसे से बैंक अपने देनदारों को अनुपातिक रूप से भुगतान करता है। अगर प्राथमिकता वाले देनदारों जैसे सरकार, सिक्योर्ड देनदार आदि का भुगतान होने के पश्चात अगर कुछ बचता है तो ही आपको अपके डिपॉजिट का कुछ हिस्सा मिल सकता है।

अत: अपना पैसा बैंकों में जमा कराने से पहले आपके पैसे के डुबने के जोखिम के बारे में भी पूरी तरह से समझ लें।

(इस आर्टिकल के लेखक टैक्स और निवेश एक्सपर्ट बलवंत जैन हैं।)

Posted By: Surbhi Jain

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