नई दिल्ली, डीपी सिंह। रिटायरमेंट की प्लानिंग करना मैराथन जैसा है ना कि तेज दौड़ जैसा। सेवानिवृत्ति निधि के निर्माण में योजना, प्रतिबद्धता और नियमित रूप से बचत की जरूरत होती है। जीवन प्रत्याशा बढ़ने के बीच  गिरती ब्याज दरों, जीवन यापन की बढ़ती लागत, सामाजिक सुरक्षा की कमी और एकल पारिवार के आदर्श बनते जाने के मद्देनज़र लोग सेवानिवृत्ति के दौर में अपने दम पर जीने के लिए बाध्य हैं। सेवानिवृत्ति के दो चरण होते हैं - संचय चरण, जब आप सेवानिवृत्ति और उसे बाद के दौर के के लिए निधि का जमा कर रहे होते हैं, जब आप अपने रोज़मर्रा के खर्च के लिए इसी निधि पर निर्भर होते हैं।

मान लें कि एक औसत कामकाजी व्यक्ति 25 साल की उम्र में काम करना शुरू कर देता है, और 60 साल की उम्र में रिटायर होने की योजना बनाता है। इससे जो उसे कुल 35 साल मिलते हैं सेवानिवृत्ति निधि जमा करने के लिए। मान लीजिए कि आप हर महीने 10 प्रतिशत सालाना का रिटर्न मानकर ₹ 3,000 का निवेश करते हैं, अगले 35 साल में आपका कुल 12.6 लाख रूपये का संचयी निवेश 1.13 करोड़ रूपये हो जाएगा। 

हालांकि, इन 35 वर्षों के दौरान, आपको जीवन में अन्य वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करना होता है। इसलिए यह जरूरी है कि निवेश की जितनी जल्दी संभव हो चाहे छोटी सी राशि से ही सही शुरू करें और समय के साथ निवेश में जोड़ते जाएं।

म्यूचुअल फंड के साथ संचय चरण

म्यूचुअल फंड सेवानिवृत्ति की योजना के लिए उपयुक्त समाधान है। आप नियमित रूप से एसआईपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) या एकमुश्त निवेश के जरिये निवेश कर सकते हैं। आप इस चरण में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अलग-अलग फंड के मिश्रण वाला पोर्टफोलियो तैयार कर सकते हैं, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) का चयन कर इस चरण में कर बचत का लाभ उठा सकते हैं,  या फिर तय निधि हासिल करने के लिए किसी प्रतिबद्ध सेवानिवृत्ति केन्द्रित म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं।

हालांकि, हर गुजरते साल के साथ मुद्रास्फीति आपके मासिक खर्च बढ़ाती है, और बात सेवानिवृत्ति की योजना की हो तो, इससे भविष्य में नकदी प्रवाह की समस्या पैदा हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, आज घर चलाने के लिए एक  लाख रूपये की राशि ठीक लग सकती है। लेकिन, अब से 10 साल बाद, पांच प्रतिशत मुद्रास्फीति के अनुमान के साथ एक लाख रूपये की क्रय शक्ति वास्तव में  61,391 रूपये रह जायेगी। इसलिए एक लाख रूपये की अपनी क्रय शक्ति बनाए रखने के लिए, आपको एक दशक बाद 1.62 लाख रूपये की जरुरत होगी।

निवेश पर जो रिटर्न मिले उसे मुद्रास्फीति को मात देने में सक्षम होना चाहिए; इसका मतलब यह है कि आपके निवेश पर रिटर्न में मुद्रास्फीति समायोजित हो ताकि यह जीवनशैली की बढ़ती लागत से मेल खाए। लंबी अवधि वाले म्यूचुअल फंड निवेश इक्विटी में निवेश से जुड़े ऊंचे जोखिम के साथ कंपाउंडिंग की ताक़त का लाभ उठाते हैं जो संचय के चरण के दौरान अनुकूल लाभ दे सकते हैं।

 

निवेश का दृष्टिकोण

म्युचुअल फंड निवेशक के जीवन में हर स्तर पर उपयुक्त निवेश दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। हालांकि हर निवेशक की ज़रूरत अलग हो सकती और जोखिम प्रोफ़ाइल भी;  इसके लिए बेहतर होगा कि योजना बनाने में मदद करने के लिए वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

सेवानिवृत्ति चेकलिस्ट

रिटायरमेंट चेकलिस्ट शुरू होती है सेवानिवृत्ति में बचे साल की संख्या और उसके बाद जीने की उम्मीद के अनुसार। पहला बहुत सरल है;  दूसरा हिस्सा हो सकता है सेवानिवृत्ति के बाद 20-25 साल की सामान्य जीवन प्रत्याशा के आधार पर। इसमें अनुमान है कि आप 60 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। 

आपको सेवानिवृत्ति के आसपास अपनी बचत क्षमता का भी अनुमान लगाना होगा और ऐसे रिटर्न का भी जो ऐसी बचत अर्जित कर सके जो मुद्रास्फीति को मात देने में सफल हो। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको अपने रिटर्न में सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली सेवानिवृत्ति निधि को भी ध्यान में रखना होगा चाहे यह कितनी भी कम हो। सेवानिवृत्ति की तारीख के करीब आने पर आप इसके बाद होने वाले वास्तविक खर्चों का बेहतर आकलन करने की स्थिति में होंगे। याद रखें,  जितनी राशि की आपको ज़रुरत है, उससे 10-15 प्रतिशत अधिक की ज़रुरत हो सकती है क्योंकि सेवानिवृत्ति के बाद आपकी निधि में कमी आये इसकी बजाय आपके पास थोड़ा अधिक ही हो तो बेहतर है।

आपकी सेवानिवृत्ति की योजना बदल सकती है क्योंकि निवेश रिटर्न, आपका स्वास्थ्य, आपके रोजगार की संभावनाएं और कर नियम आपके निवेश शुरू करने के समय और जब आप सेवानिवृत्त होने वाले हैं, के बीच बदल सकते हैं। इसमें संदेह, चिंता और सवाल होना लाजिमी है, जिसे आप अपने सलाहकार से भी पूछ सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि आपने अभी तक शुरू नहीं किया है तो तुरंत शुरू करें।

(लेखक SBI Mutual Fund के चीफ बिजनेस ऑफिसर हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं।)