हाल के कुछ वर्षो में एसएमएस के जरिये ट्रेडिंग टिप्स की बयार आई हुई है। लोगों के पास ढेरों ऐसे एसएमएस आते हैं, जिनमें किसी खास स्टॉक में खरीदी की सलाह दी जाती है। एसएमएस कुछ ऐसे सेंडर कोड से आते हैं कि पहली नजर में मैसेज पाने वाला यही समझता है कि इंवेस्टमेंट सेक्टर से जुड़ी किसी बड़ी फर्म ने टिप्स भेजे हैं, जबकि सच यह है कि अक्सर ऐसे मैसेज पूरी तरह झूठ होते हैं। धोखे में पड़कर इन टिप्स पर भरोसा करने वाले को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। असल परेशानी यह भी है टेलीकॉम सेक्टर में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि कोई व्यक्ति एसएमएस कोड के जरिये मैसेज भेजने वाले के बारे में कोई जानकारी जुटा सके।

पिछले कुछ महीने से बाजार नियामक सेबी इनसाइडर ट्रेडिंग के कुछ गंभीर मामलों की पड़ताल कर रहा है। इनमें वाट्सएप पर कुछ अग्रणी कंपनियों की संवेदनशील जानकारियां लीक होने का मामला भी शामिल है। खबरों में कुछ ऐसा बताया जाता है कि सेबी ने जो छापे मारे हैं और जो ढेरों प्रमाण जुटाए हैं, वे सब वाट्सएप के एनक्रिप्शन और सहयोग न करने के फेसबुक के रवैये के कारण किसी दीवार पर सिर पटकने जैसा है। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि सोशल एप जो डाटा जुटाते हैं, उनकी मदद से कंपनियां केवल विज्ञापन को टारगेट कर सकती हैं, किसी चोर को नहीं पकड़ सकती हैं। जो भी हो, यह तो निश्चित तौर पर दिखाई देता है कि वाट्सएप पर कंपनियों के वित्तीय नतीजों से जुड़ी जानकारियां प्रसारित की गई थीं। यह इसलिए भी स्पष्ट है क्योंकि नियामक ने टाटा मोटर्स, एचडीएफसी बैंक और बाटा समेत कुछ कंपनियों को मामले की जांच करने और अंदरूनी व्यवस्था को सख्त करने का निर्देश दिया है।

लगातार खबरों से जुड़े और निवेश की दुनिया की जानकारी रखने व्यक्ति के लिए इनकी गंभीरता को समझना मुश्किल नहीं है। किसी भी कंपनी के वित्तीय नतीजों से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां समय से पहले लीक हो जाने से बाजार पर बड़ा असर पड़ता है।

हम यहां ऐसी ही एक और बड़ी और गंभीर समस्या की ओर ध्यान ले जाना चाहते हैं। यह मामला भी अंदरूनी जानकारियों के लीक होने की घटना से किसी स्तर पर कम नहीं कहा जा सकता। यह मामला है ट्रेडिंग के टिप्स बताने के नाम पर प्रसारित होने वाले ढेरों एसएमएस का। पिछले कुछ वर्षो में ऐसे एसएमएस आने की दर कई गुना बढ़ गई है। इसकी गणना करने का ऐसा कोई तरीका नहीं है, लेकिन मेरे परिचितों सभी लोग, जिन्हें पहले एक या दो ऐसे मैसेज आते थे, आज उनके पास ऐसे ढेरों मैसेज आते हैं। हालांकि इनकी बढ़ती तादाद परेशानी का केवल एक पहलू है। मामला दूसरा है।

इन एसएमएस को गंभीरता से देखा जाए, तो एक पैटर्न साफ दिखता है कि अब अलग-अलग स्रोत से आने वाले ये मैसेज किसी एक स्टॉक पर केंद्रित होने लगे हैं। उदाहरण के तौर पर, जनवरी के आसपास सभी के पास एक माइक्रोकैप कंपनी को लेकर मैसेज आने शुरू हुए थे। उस कंपनी की गतिविधियां कुछ खास नहीं लग रही थीं, लेकिन उसके नाम में ‘फाइनेंस’ शब्द जुड़ा हुआ था। उसके शेयरों की गतिविधि भी कुछ ज्यादा नहीं थी, लेकिन उन संदेशों की शुरुआत से पहले के कुछ हफ्तों के दौरान उसमें उल्लेखनीय तेजी आई थी। इक्विटी बाजार को थोड़ा सा जानने वाला व्यक्ति भी समझ सकता है कि क्या हो रहा है। यह केवल एक मामला है। ऐसे कई उदाहरण हैं। यह सबसे नजदीक का मामला है, जो मुझे ध्यान है।

इसमें सबसे बड़ी परेशानी है कि एसएमएस भेजने वाले खुद को बड़े ब्रोकर के तौर पर दर्शाते हैं। और मैसेज पाने वाले के पास इस बारे में पता करने का कोई रास्ता नहीं होता। उदाहरण के तौर पर, उपरोक्त मामले में मेरे एक सहयोगी को 30 जनवरी को एडी-आइसीआइएसईसी के एसएमएस कोड से संदेश आया था। संदेश में अपनी रिसर्च का हवाला देते हुए एक कंपनी के शेयर खरीदने की सलाह दी गई थी। संदेश के अंत में एक वेबसाइट का पता भी लिखा था, ‘डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट आइसीआइसीएसईसी डॉट कॉम’।

मैसेज देखकर आसानी से समझा जा सकता है कि मैसेज भेजने वाला खुद को आइसीआइसीआइ सिक्योरिटीज से जुड़ा हुआ दर्शाना चाहता है। जबकि सच्चाई यह है कि मैसेज में बताई गई वेबसाइट का आइसीआइसीआइ सिक्योरिटीज से कोई लेनादेना नहीं है। जानकारी जुटाने पर पता चला कि वेबसाइट डोमेन का मालिक चीन के किसी पते पर रहता है।

यह मामला भारतीय दूरसंचार और वित्तीय सेवा नियामकों की विफलता की ओर इशारा करता है। दूरसंचार नियामक ट्राई अब तक ऐसा कोई आसान रास्ता नहीं बना सका है, जिससे मैसेज पाने वाला इस तरह के एसएमएस कोड के जरिये मैसेज भेजने वाले के बारे में जान सके। इस तरह के एसएमएस कोड बहुत सारे दस्तावेज जमा करने और जांच के बाद दिए जाते हैं। मैं इसलिए यह जानता हूं, क्योंकि मेरी कंपनी के पास भी एक एसएमएस कोड है। हालांकि मैसेज पाने वाले के पास कोई रास्ता नहीं है कि वह भेजने वाले के बारे में कुछ पता कर सके।

इससे इतर एचटीटीपीएस से ऑथेंटिकेट हुई वेबसाइट की जानकारी आसानी से ली जा सकती है। एचटीटीपीएस वेब पेज पर कोई भी व्यक्ति आसानी से कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां ले सकता है। सवाल यह है कि जब पूरी दुनिया में इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट पर ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है, तो फिर भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में ऐसी कोई व्यवस्था क्यों संभव नहीं है? खासकर तब जब कि भेजने वाले की सारी जानकारी पहले ही विभाग के पास होती है। ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि मैसेज पाने वाला एसएमएस कोड पर क्लिक करे और उसे मैसेज भेजने वाली कंपनी का पता लग जाए?

आइसीआइएसईसी की तरह ही एचपी-केओटीएसईसी, एचपी-ईडीईएलबीके, एचपी-केएआरवीवाईबी और एडी-एचडीएफएसएसी जैसे कई अन्य एसएमएस कोड से भी मुङो मैसेज मिल चुके हैं। कोई भी इन्हें आसानी इंवेस्टमेंट इंडस्ट्री की कुछ बड़ी फर्मो जैसे कोटक, एडलवाइस, एचडीएफसी आदि से जुड़े कोड मान सकता है। लेकिन क्या यह सच है? क्या इन बड़ी कंपनियों को अपने ब्रांड की चिंता नहीं है? या क्या इस तरह से बाजार को प्रभावित करने वाले एसएमएस इन्हीं बड़ी कंपनियों की ओर से भेजे जाते हैं। हमारे पास इन सब बातों को जानने का कोई प्रमाणिक तरीका नहीं है।

सबसे बड़ा खतरा यह है कि निवेश की दुनिया में नए-नए कदम रखने वाले लोग इस तरह के एसएमएस को बड़ी और भरोसेमंद कंपनी की सलाह मानकर इन पर यकीन कर सकते हैं। ऐसा करने से उन्हें बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे कहीं से भी टिप्स देखकर निवेश करना खतरनाक है। वित्तीय सेवा और टेलीकॉम उद्योग के नियामकों को इस परेशानी के बारे में समय रहते सोचना चाहिए और इसका हल निकालना चाहिए।

(इस लेख के लेखक धीरेन्द्र कुमार है जो कि वैल्यू रिसर्च के सीईओ हैं।)

 

By Praveen Dwivedi