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Crude Palm Oil की इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की मांग तेज, भारतीय किसानों को होगा बड़ा फायदा?

Published: Mon, 01 Jun 2026 11:10 AM (IST)

तेलंगाना सरकार ने केंद्र से कच्चे पाम तेल पर आयात शुल्क बढ़ाने की मांग की है। इससे घरेलू किसानों को ...और पढ़ें

Crude Palm Oil पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की मांग

Crude Palm Oil पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की मांग

HighLights

  1. तेलंगाना ने पाम तेल आयात शुल्क बढ़ाने की मांग की।

  2. घरेलू किसानों को बेहतर मूल्य और उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य।

  3. शुल्क घटने से स्थानीय पाम तेल की कीमतें प्रभावित हुई हैं।

नई दिल्ली| घरेलू किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए, पाम ऑयल पर लगने वाले आयात शुल्क को एक बार फिर बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। तेलंगाना सरकार ने केंद्र सरकार से कच्चे पाम तेल (crude palm oil) पर इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) बढ़ाने की मांग की है। तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने इस संबंध में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है।

तेलंगाना सरकार का कहना है कि ड्यूटी बढ़ाए जाने से देश में पाम ऑयल का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिलेगा।

तेल की कीमतें पर दबाव

राज्य सरकार ने कहा कि साल 2018 में जब ड्यूटी रेट 44 प्रतिशत था, तब पाम ऑयल के किसानों को अच्छी कीमतें मिली थीं। लेकिन वर्तमान में शुल्क दर पिछले वर्ष के 27.50 प्रतिशत से घटकर 16.50 प्रतिशत हो गई है। आयात शुल्क घटने से विदेशों से आने वाले तेल सस्ती कीमत में मिल रहे हैं, जिसका सीधा असर देश में उत्पादित पाम तेल की कीमतों पर पड़ रहा है।

किसानों को क्या फायदा?

तेलंगाना सरकार का मानना है कि यदि पाम ऑयल में लगने वाली ड्यूटी को पहले की तरह 44 फीसदी कर दिया जाए, तो देश में उत्पादित पाम तेल को ना सिर्फ अच्छा बाजार मिलेगा बल्कि इससे किसानों को भी अपनी उपज का अच्छा मूल्य मिल सकेगा। कृषि मंत्री के अनुसार पाम ऑयल की खेती अन्य तिलहन फसलों की तुलना में किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर कमाई देती है।

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एक बार पौधे लगाने के बाद यह लगभग 30 सालों तक उत्पादन देता रहता है। उन्होंने बताया कि इससे किसानों को प्रति एकड़ ₹2-3 लाख की कमाई होती है। फिलहाल ताजे फलों के गुच्छे (FFB) की कीमत ₹23,500 प्रति टन है।

सबसे अधिक ताड़ के बाग तेलंगाना में

तेलंगाना के कृषि मंत्री ने शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में इस बात को भी शामिल किया कि "देश में ताड़ के तेल के बागानों की खेती में अब हम अग्रणी हैं, देश के कुल क्षेत्रफल में हमारी हिस्सेदारी 36 प्रतिशत है। हमारा लक्ष्य 2026-27 में इसमें 34,000 हेक्टेयर और जोड़ना है।”