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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: 1 जून से विदेशी कपास पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी हटी, भारतीय किसानों का क्या होगा?

Published: Sat, 30 May 2026 08:36 PM (IST)Updated: Sat, 30 May 2026 08:48 PM (IST)

केंद्र सरकार ने 1 जून 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक कपास के आयात पर लगने वाली 11% इंपोर्ट ड्यूटी ...और पढ़ें

कपास से इंपोर्ट ड्यूटी हटी (AI Image)

कपास से इंपोर्ट ड्यूटी हटी (AI Image)

HighLights

  1. कपास आयात पर 11% ड्यूटी हटाई गई।

  2. यह छूट 1 जून 2026 से लागू होगी।

  3. वस्त्र उद्योग को मिलेगी बड़ी राहत, लागत घटेगी।

नई दिल्ली| केंद्र सरकार ने टेक्सटाइल और गारमेंट इंडस्ट्री के लिए राहत भरी घोषणा की है। सरकार ने विदेशों से मंगाए जाने वाले कपास पर लगने वाली 11 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी को हटा दिया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से भारत के वस्त्र उद्योग से दबाव कम होगा और अच्छी क्वालिटी की कपास भारत पहुंच सकेगी। बता दें कि लंबे समय से गारमेंट और टेक्सटाइल इंडस्ट्री की ओर से कपास पर लगने वाले आयात शुल्क हटाने की मांग की जा रही है।

कब से कब तक के लिए हटी ड्यूटी?

केंद्र की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार, ये छूट 1 जून 2026 से लेकर 31 अक्टूबर, 2026 तक लागू रहेगी। इन 5 महीनों के दौरान सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 की पहली अनुसूची के तहत आने वाला कॉटन ड्यूटी फ्री रहेगा। साथ ही फाइनेंस एक्ट, 2021 की धारा 124 के तहत लगने वाले 'कृषि सेस' (AIDC) से भी पूरी तरह से छूट दे दी गई है।

सरकार ने क्या कहा?

सरकार ने कहा कि भारतीय वस्त्र उद्योग में कपास की उपलब्धता बढ़ाने के लिए, केंद्र सरकार ने 1 जून, 2026 से 30 अक्टूबर, 2026 तक कपास के आयात पर सभी सीमा शुल्क से अस्थायी रूप से छूट दी है। इस अस्थायी शुल्क छूट से टेक्सटाइल और गारमेंट इंडस्ट्री में इनपुट लागत में कमी आने की उम्मीद है, जिससे ना सिर्फ कपड़ा बनाने वाले बल्कि आम ग्राहकों को भी राहत मिलेगी।

भारतीय किसानों का क्या?

केंद्र सरकार की ओर से लिए गए इस फैसले से विदेशों से आने वाले अच्छे क्वालिटी के कपास सस्ते में मिलेंगे। सरकार ने आयात शुल्क हटाने की घोषणा के साथ ये भी बताया कि घरेलू किसानों के हितों का भी ध्यान रखा जाएगा। बताया गया कि कपास से आयात शुल्क में दी जाने वाली 5 महीने की छूट इस तरह से तैयार की गई है कि इससे घरेलू कपास उत्पादकों के हितों को नजरअंदाज किए बिना टेक्सटाइल और गारमेंट इंडस्‍ट्री की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

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सरकार की ओर से आगे कहा गया कि, कुल मिलाकर, इस उपाय से घरेलू वस्त्र उद्योग, विशेष रूप से SMEs के प्रदर्शन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जिससे बाजार में कपास की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी। PIB के आंकड़ों के अनुसार 4.5 करोड़ लोग टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़े हैं।