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Gold खरीदने का है प्लान? पुरानी ज्वेलरी बेचने से पहले जान लें टैक्स, GST और मेकिंग चार्ज का पूरा गणित

Published: Mon, 21 Sep 2026 12:37 PM (IST)

Gold Tax rules: पुरानी ज्वेलरी बेचकर नई खरीदने की सोच रहे हैं तो कैपिटल गेन टैक्स, जीएसटी और मेकिंग चार्ज का गणित समझना जरूरी है।

सोना बेचने पर कितना लगेगा टैक्स? (ai photo)

सोना बेचने पर कितना लगेगा टैक्स? (ai photo)

HighLights

  1. पुरानी ज्वेलरी बेचने पर मुनाफे पर लगता है कैपिटल गेन टैक्स।

  2. धारण अवधि से तय होता है कैपिटल गेन का प्रकार।

  3. नई ज्वेलरी खरीदने पर GST और मेकिंग चार्ज भी लगता है।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: सोने (Gold) की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। लेकिन यह अनुमान जरूर लगाया जा रहा है कि कीमतों में तेजी आ सकती है। कहीं आप इस तेजी के बीच पुरानी ज्वेलरी बेचकर नई गहने खरीदने का तो नहीं सोच रहे हैं। अभी आपको यह फायदेमंद लग रहा होगा लेकिन जब इसके पीछे की छिपी बातें जानेंगे तो आपके पैरो तले जमीन खिसक जीएगी।

क्या है छिपा कारण?

ज्यादातर लोगों को लगता है कि सालों पहले खरीदा हुए सोने की कीमत (Gold Price) आज काफी ज्यादा हो गई होगी। लेकिन आप एक चीज से जरूर अनजान हैं। जब आप पुराना गोल्ड बेचते हैं तो उस पर होने वाले प्रॉफिट पर कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gain Tax) लगता है। इसके साथ ही जब आप पुराने सोने को बेचकर नई ज्वेलरी खरीदते हैं तो उस पर GST और मेकिंग चार्ज भी देना होगा। ऐसे में आपका नुकसान होना तय है। आइए आपको बताते हैं कि पुरानी ज्वेलरी पर कितना और कब टैक्स लगता है। साथ ही, आपको कब अपनी पुरानी ज्वेलरी बेचकर नए गहने लेने चाहिए।

पुराने गहने पर कब लगेगा टैक्स?

एक्सपर्ट के मुताबिक सोने की ज्वेलरी को बेचने पर टैक्स उसकी धारण अवधि (Holding tenure) के आधार पर तय होता है। सबसे खास बात यह है कि अगर आपने Gold Jewellery को 2 साल से ज्यादा समय तक संभाल कर रखा है, तो इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट माना जाता है। इससे होने वाला मुनाफा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) कहलाता है। मौजूदा नियमों के अनुसार इस पर 12.5% टैक्स लगता है। इसमें इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता है। और वहीं, अगर ज्वेलरी को 2 साल या उससे कम समय में बेच दिया जाता है, तो मुनाफे को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन यानी STCG माना जाता है। इस पर आपकी लागू इनकम टैक्स स्लैब दर के हिसाब से टैक्स लगेगा।

अगर ₹10 लाख में बेचे गहने, तो कितना लगेगा टैक्स?

अब एक उदाहरण लेकर समझते हैं। अगर आपने पुराने गहने ₹10 लाख में बेचे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे ₹10 लाख पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। टैक्स सिर्फ उस मुनाफे पर लगता है, जो खरीदी हुई कीमत और बिक्री की कीमत के बीच हुआ है। इसका साफ मतलब है कि जब आपने गहने खरीदे थे तो ज्वेलरी कितने में खरीदी गई थी, कब खरीदी गई थी और बिक्री से जुड़ी लागत क्या थी, इन चीजों का टैक्स कैलकुलेट किया जाता है।

मान लीजिए आपने कई साल पहले कोई ज्वेलरी ₹4 लाख में खरीदी थी और आज उसे ₹10 लाख में बेच रहे हैं। ऐसे में आपका मुनाफा ₹6 लाख हुआ। आपको टैक्स पूरे ₹10 लाख पर नहीं, बल्कि केवल इस ₹6 लाख के मुनाफे पर देना होगा। इसलिए टैक्स कैलकुलेशन में खरीद कीमत और होल्डिंग पीरियड का पता होना बहुत जरूरी है।

नई गहने खरीदते वक्त GST का प्रभाव?

पुरानी ज्वेलरी बेचने के बाद जब अब उस पैसे से नई ज्वेलरी खरीदते हैं, तो आपके 3% GST अलग से देना होता है। मान लीजिए आपने आपने ₹10 लाख का पुराना सोना बेचा, जिसमें से 60% हिस्सा आपका कैपिटल गेन है। टैक्स कटने के बाद आपके हाथ में करीब ₹9.22 लाख बचेंगे। अब जब आप इस रकम से नई ज्वेलरी खरीदेंगे, तो 3% GST का प्रभाव जुड़ने के बाद नई ज्वेलरी के लिए आपके पास असल में करीब ₹8.95 लाख की वैल्यू ही बचेगी। इसी तरह ₹1 करोड़ की बिक्री करने पर टैक्स का कुल प्रभाव करीब ₹10.49 लाख तक पहुंच सकता है और नई गोल्ड वैल्यू लगभग ₹89.51 लाख रह जाएगी।

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