Iran America war: तेल की कीमतों में उछाल के चलते, 'राकेट' बनी चीनी की कीमत; दो हफ्ते के Highest Level पर भाव
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अमेरिका-ईरान वार्ता के ठप होने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, ...और पढ़ें

चीनी की कीमत में तेज उछाल (AI Image)
HighLights
कच्ची चीनी की कीमत 14.15 सेंट प्रति पाउंड पहुंची।
पश्चिम एशिया संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल।
ब्राजील में इथेनॉल उत्पादन से चीनी आपूर्ति प्रभावित।
नई दिल्ली| वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के ठप होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल जारी है। इसका असर अब चीनी की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। कच्ची चीनी (Raw Sugar) की कीमत में 1.4% की बढ़ोतरी हुई है। अब यह 14.12 सेंट प्रति पाउंड पर पहुंच गई है। इस दौरान बढ़ोतरी के चलते कीमत 14.15 सेंट प्रति पाउंड तक भी गई, जो 9 अप्रैल के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले पूरे हफ्ते में इसकी कीमत 4.6% बढ़ चुकी है।
चीनी की रिकॉर्ड कीमतों के पीछे कई ठोस वजहें निकल कर सामने आई हैं। कच्ची चीनी की कीमत 14.15 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंची, ये युद्ध के चलते होने वाले सीधे नुकसान को भी दर्शाती है।
क्यों बढ़ रही है कीमत
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर चीनी की कीमतों में तेज उछाल की वजह क्या है? दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को रोक के रखा, जिसके बाद सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई खासतौर पर डीजल-पेट्रोल की सप्लाई, साथ ही ऊर्जा के खर्च में भी बढ़ोतरी हुई है। बाजार के जानकारों का कहना है कि ऊर्जा और उर्वरक की बढ़ती कीमतों से चीनी की कीमतों को समर्थन मिल रहा है। इस युद्ध ने ग्लोबल लेवल पर कमोडिटी बाजारों को प्रभावित किया है।
इथेनॉल का भी रोल
कच्ची चीनी की कीमत 9 अप्रैल के बाद का सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची। इस तेजी की मुख्य वजह इथेनॉल को भी माना जा रहा है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ब्राजील की गन्ना मिलों को तेल की कीमतों में हुई तेजी ने चीनी की कीमतों को और बढ़ावा दिया है। जब तेल महंगा होता है, तो ब्राजील के चीनी मिलें चीनी बनाने की बजाय ज्यादा गन्ने को एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल करने लगी हैं, चीनी की कीमत बढ़ने का ये भी एक ठोस कारण है।
वहीं ईरान और अमेरिका के बीच हो रही बातचीत का कोई ठोस नतीजा निकल कर सामने नहीं आ रहा है। आखिर कब तक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद रहेगा, और कब तक सप्लाई चेन प्रभावित रहेगी इसके बारे में कुछ भी कह पाना मुश्किल है। लेकिन एक बात साफ है कि इस War का असर अब आम लोगों तक भी सीधा देखने को मिलने लगा है।
