दालों तक पहुंच गई महंगाई! अरहर, चना और सोया की कीमतों में तेज बढ़ोतरी; NAFED कितने में बेच रहा दाल?
देश में दालों और तिलहनों की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम ...और पढ़ें

दालों की कीमत में तेज उछाल
HighLights
दालों और तिलहनों की कीमतों में पिछले साल से तेज बढ़ोतरी।
कमजोर मानसून से खरीफ फसलों पर दबाव, रबी को लेकर चिंता।
अरहर, चना, सोयाबीन और मूंगफली के दाम में भारी वृद्धि।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| इस समय चीनी और प्याज की महंगाई आम लोगों के रसोई का बजट बिगाड़ रही है। इसी बीच देश में दालों और तिलहनों की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कमजोर मानसून और कई राज्यों में बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों पर दबाव बढ़ गया है, वहीं आगामी रबी सीजन के उत्पादन को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। देश में दालों और तिलहनों की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कमजोर मानसून और कई राज्यों में बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों पर दबाव बढ़ गया है, वहीं आगामी रबी सीजन के उत्पादन को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।
कितनी बढ़ी दालों की कीमत?
उद्योग संगठनों इंडियन पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) के आंकड़ों के अनुसार, थोक बाजार में अरहर (तूर) दाल की कीमतें पिछले साल की तुलना में 30% से अधिक बढ़ गई हैं। चना करीब 11% महंगा हुआ है। वहीं सोयाबीन के दाम 40% से ज्यादा और मूंगफली के दाम लगभग 50% तक बढ़ चुके हैं।
ऑल इंडिया दाल मिलर्स एसोसिएशन के कार्यकारी सदस्य रूपेश राठी ने मीडिया को बताया कि कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में तूर की फसल नमी की कमी से प्रभावित हो रही है। इससे बाजार में उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है और कीमतों को समर्थन मिल रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि मौजूदा कीमतें अभी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के मुकाबले बहुत ज्यादा नहीं हैं।
प्रमुख दाल उत्पादक राज्यों का क्या हाल?
कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश देश के प्रमुख तूर और चना उत्पादक राज्य हैं। वहीं सोयाबीन के उत्पादन में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सबसे आगे हैं। कर्नाटक पहले ही करीब 100 तालुकों में सूखे की घोषणा कर चुका है। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के कई जिलों में अब तक सामान्य से 36% कम बारिश दर्ज की गई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लातूर के दाल कारोबारी नितिन कलंत्री का कहना है कि बारिश की कमी के साथ बढ़ती गर्मी फसलों की पैदावार को प्रभावित कर सकती है। यदि आने वाले दिनों में बारिश का अंतर और बढ़ता है तो उत्पादन को लेकर चिंता और गहरी हो सकती है।
चना दाल की कीमतों पर दिख रहा असर
देश की सबसे अधिक खपत वाली दाल चना की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है। मौसम पूर्वानुमानों में अल नीनो प्रभाव मजबूत होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे रबी फसलों के लिए जरूरी मिट्टी की नमी प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से बाजार में चना को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
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सरकारी एजेंसी NAFED करीब ढाई महीने पहले अपने भंडार से चना ₹60 प्रति किलो की दर से बेच रही थी, जिसे हाल ही में ₹66 प्रति किलो के भाव पर बेचा गया। दूसरी ओर, भारत के लिए प्रमुख आयात स्रोत ऑस्ट्रेलिया में चना उत्पादन पिछले साल की तुलना में 40-50% कम रहने का अनुमान है।
घरेलू सप्लाई का क्या हाल?
उत्पादन को लेकर बढ़ती चिंताओं के बावजूद उद्योग जगत का मानना है कि फिलहाल घरेलू सप्लाई को लेकर चिंता नहीं है। तूर के मामले में सरकार और निजी व्यापारियों के पास पिछले सीजन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा अफ्रीकी देशों से 7-8 लाख टन तूर आयात होने की उम्मीद है, जिससे घरेलू उपलब्धता बनी रहेगी।
