₹5 प्रति किलो तक पहुंचा टमाटर, खुदरा बाजारों में भी दाम आधे! 65% की गिरावट से किसानों की फजीहत, क्या है वजह?
टमाटर की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जिससे किसानों को लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। बंपर आवक, कमजोर ...और पढ़ें
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टमाटर के दाम में भारी गिरावट
HighLights
नासिक में टमाटर के थोक भाव 65% गिरे।
बंपर आवक और कमजोर मांग से कीमतें प्रभावित।
किसानों को लागत निकालना मुश्किल, भारी नुकसान।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| देश के प्रमुख टमाटर उत्पादक इलाकों में से एक महाराष्ट्र के नासिक में टमाटर किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक तरफ सूखे जैसे हालात और खेती की बढ़ती लागत किसानों पर दबाव डाल रही है, तो दूसरी तरफ बाजार में टमाटर की बंपर आवक के कारण कीमतें तेजी से गिर गई हैं। पिंपलगांव APMC में एक सप्ताह के भीतर टमाटर का थोक भाव करीब 65 फीसदी गिरकर 20 किलो के क्रेट के लिए महज ₹111 रह गया है। कमजोर मांग और बाजार में जरूरत से ज्यादा आवक के कारण कीमतों में गिरावट आई है।
देश की प्रमुख टमाटर थोक मंडियों में शामिल पिंपलगांव APMC में 12 अक्टूबर को 20 किलो के क्रेट का औसत थोक भाव ₹321 था। सोमवार को यह घटकर ₹111 रह गया। यानी किसानों को अब टमाटर के लिए औसतन करीब ₹5.55 प्रति किलो मिल रहे हैं, जबकि एक हफ्ते पहले यह भाव लगभग ₹16.05 प्रति किलो था।
रोजाना 3 से 3.75 लाख क्रेट की आवक
मंडी अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि, पिछले एक सप्ताह से पिंपलगांव APMC में रोजाना लगभग 3 लाख से 3.75 लाख क्रेट टमाटर पहुंच रहे हैं। बाजार में अचानक बढ़ी इस आवक के मुकाबले मांग कमजोर बनी हुई है। नतीजतन थोक कीमतों में भारी गिरावट आई है।
सोमवार को मंडी में टमाटर की गुणवत्ता के आधार पर 20 किलो के एक क्रेट का भाव ₹20 से लेकर ₹331 रुपये तक रहा। खराब क्वालिटी वाले टमाटर का भाव एक रुपये प्रति किलो तक गिर गया, जबकि अच्छी गुणवत्ता वाले टमाटर को ₹16.55 प्रति किलो तक मिले। किसानों के लिए चिंता की बात यह है कि खेती की लागत बढ़ने के बावजूद उन्हें उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। यदि मंडी में आवक इसी तरह अधिक बनी रहती है, तो थोक कीमतों में और अधिक गिरावट आने की आशंका है।
खुदरा बाजार में भी आधे हुए दाम
थोक बाजार में कीमतें गिरने का असर अब खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है। नासिक में सोमवार को टमाटर करीब ₹20 प्रति किलो बिक रहा था, जबकि एक सप्ताह पहले इसकी कीमत लगभग ₹40 प्रति किलो थी। इस तरह खुदरा भाव में भी करीब 50 फीसदी की गिरावट आई है। व्यापारियों के मुताबिक, थोक बाजार में कीमतों में बदलाव का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में एक से दो दिन लगते हैं। यदि मंडियों में कीमतों में गिरावट जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को टमाटर और सस्ता मिल सकता है।
गर्मी से जल्दी पक रही फसल
मंडी अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि तापमान बढ़ने के कारण टमाटर सामान्य समय से पहले पक रहे हैं। इससे बड़ी मात्रा में फसल एक साथ मंडियों में पहुंच रही है और कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, किसानों के लिए यह स्थिति दोहरी मार जैसी है। एक ओर मौसम और सूखे जैसी परिस्थितियों से खेती प्रभावित होने की चिंता है, वहीं दूसरी ओर बाजार में अधिक सप्लाई के कारण उपज का भाव गिर रहा है।
नवरात्र के दौरान कमजोर रही मांग
व्यापारियों के अनुसार, नवरात्र के दौरान कई थोक मंडियां बंद रहने से कारोबार प्रभावित हुआ। इसके साथ ही टमाटर के निर्यात की मांग भी कमजोर रही, जिससे घरेलू बाजार में एक्स्ट्रा सप्लाई खपाने में मुश्किल हुई। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख खपत वाले राज्य फिलहाल अपनी जरूरतों के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध टमाटर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे नासिक से आने वाले टमाटर पर उनकी निर्भरता कम हुई है और महाराष्ट्र के किसानों को दूसरे राज्यों के बाजारों से पर्याप्त मांग नहीं मिल पा रही है।
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किसानों के सामने लागत निकालने की चुनौती
नासिक के टमाटर किसानों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती खेती की लागत निकालने की है। जब 20 किलो टमाटर का औसत थोक भाव महज ₹111 रह जाता है, तो किसानों की कमाई पर भारी दबाव पड़ता है। परिवहन, छंटाई, पैकिंग और मंडी तक उपज पहुंचाने का खर्च घटाने के बाद उनकी वास्तविक आमदनी और कम हो सकती है।
