होर्मुज संकट की 'आग' में सुलगा कोयला! बढ़ गई तपिश, जानें भारत पर कैसे पड़ेगा इस नई मुसीबत का बोझ?
पश्चिम एशिया में जारी संकट और प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों के कारण दुनिया भर में कोयले की खपत बढ़ ...और पढ़ें

पश्चिम एशिया संकट से वैश्विक कोयला खपत में रिकॉर्ड वृद्धि का अनुमान।
HighLights
पश्चिम एशिया संकट से वैश्विक कोयला खपत में रिकॉर्ड वृद्धि का अनुमान।
भारत में बिजली की बढ़ती मांग से कोयले की खपत 4.2% बढ़ेगी।
बढ़ती कोयला निर्भरता जलवायु लक्ष्यों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध की आंच अब सिर्फ तेल और गैस के बाजार तक सीमित नहीं है। भारत समेत दुनिया के कई देशों में इसकी एक और कीमत चुकानी पड़ सकती है। कोयले के बढ़ते इस्तेमाल और उससे होने वाले प्रदूषण के रूप में। होर्मुज स्ट्रेट से एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित होने और प्राकृतिक गैस महंगी होने के कारण कई देशों ने बिजली उत्पादन के लिए कोयले का रुख किया है। इसका असर वैश्विक स्तर पर ऐसा पड़ा है कि इस साल कोयले की खपत एक बार फिर नया रिकार्ड बनाने जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आइईए) के ताजा अनुमान के मुताबिक 2026 में दुनिया की कोयला मांग 1.2 प्रतिशत बढ़कर 8.94 अरब टन हो जाएगी। खास बात यह है कि एजेंसी ने कुछ महीने पहले इस साल कोयले की मांग में मामूली गिरावट का अनुमान लगाया था, लेकिन पश्चिम एशिया संकट और मौसम संबंधी बदलावों ने तस्वीर बदल दी।
भारत में 4.2 प्रतिशत बढ़ सकती है मांग
भारत के लिए भी तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। आइईए का अनुमान है कि देश में कोयले की मांग 4.2% बढ़कर 1.353 अरब टन हो सकती है। बढ़ती बिजली मांग के साथ इस पर अल नीनो का असर भी पड़ रहा है। ज्यादा गर्मी से एसी और कूलिंग की मांग बढ़ेगी, जबकि कमजोर जलविद्युत उत्पादन की भरपाई के लिए ताप बिजलीघरों पर निर्भरता बढ़ सकती है। भारत में बिजली क्षेत्र अकेले देश की कुल कोयला खपत का करीब तीन-चौथाई हिस्सा इस्तेमाल करता है। यही असर चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप में भी देखा जा रहा है। इस साल दक्षिण कोरिया में कोयला इस्तेमाल में छह प्रतिशत का उछाल दर्ज किए जाने का अनुमान है। अमेरिका में कोयला इस्तेमाल पिछले साल की तुलना में सात प्रतिशत तक पहुंच सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि कोयला उद्योग में आ रही गिरावट को वह दूर करना चाहते हैं। उन्होंने तमाम रिटायर हो चुके कोयला संयंत्रों को दोबारा शुरू कराया है।
जलवायु लक्ष्यों के लिए झटका
कोयले की बढ़ती मांग ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। सौर और पवन ऊर्जा तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बढ़ती बिजली मांग, मौसम की अनिश्चितता और ऊर्जा सुरक्षा की चिंता के बीच कई देशों को फिलहाल कोयला अपेक्षाकृत भरोसेमंद विकल्प लग रहा है।
आइईए का कहना है कि 2027 में तस्वीर इस बात पर काफी निर्भर करेगी कि होर्मुज से एलएनजी का आवागमन कितना सामान्य होता है। यदि गैस की आपूर्ति सुधरी और कीमतें नीचे आईं तो वैश्विक कोयला मांग 0.4% घट सकती है। लेकिन संकट लंबा खिंचा तो कोयले का इस्तेमाल और बढ़ सकता है।
