Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतें औंधे मुंह गिरीं, क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? गिरावट के पीछे 2 बड़े कारण
घरेलू फ्यूचर्स मार्केट (MCX) में कच्चे तेल की कीमतों में 4.5% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण अमेरिका-ईरान तनाव में कमी और OPEC+ का उत्पादन बढ़ाना है।

कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट: जानें कारण और भविष्य की चाल
HighLights
MCX पर कच्चे तेल की कीमतों में 4.5% की गिरावट।
अमेरिका-ईरान तनाव में कमी और OPEC+ उत्पादन वृद्धि मुख्य कारण।
₹7,000 मजबूत सपोर्ट, ₹7,000-₹8,000 दायरे में कारोबार।
नई दिल्ली। ग्लोबल मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव के बीच, बुधवार, 4 अगस्त 2026 को घरेलू फ्यूचर्स मार्केट (MCX) में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शाम करीब 8:00 बजे तक, MCX पर कच्चा तेल लगभग 4.5% की गिरावट के साथ ट्रेड कर रहा था। मार्केट एक्सपर्ट्स और अमित सुरेश जैन के मुताबिक, इस गिरावट के लिए कई अहम जियोपॉलिटिकल और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं।
गिरावट के पीछे के मुख्य कारण
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस भारी गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का कम होना माना जा रहा है। खबरों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से शिपिंग को लेकर ईरान और ओमान के बीच हुई बातचीत से बाजार में 'भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम' (geopolitical risk premium) कम हुआ है।
इसके अलावा, OPEC+ देशों के अगस्त महीने के लिए उत्पादन बढ़ाने के फ़ैसले का भी कीमतों पर दबाव पड़ा है। ग्लोबल सप्लाई का मौजूदा आउटलुक मंदी का संकेत दे रहा है, जिससे निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
क्या कीमतें और गिरेंगी?
एक्सपर्ट अमित सुरेश जैन के एनालिसिस के अनुसार, भले ही मार्केट में गिरावट दिख रही है, लेकिन निचले स्तरों पर गिरावट सीमित रहने की संभावना है। टेक्निकल चार्ट पर, ₹7,000 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट ज़ोन माना जा रहा है। मौजूदा स्तरों से 3-4% की और गिरावट संभव है, जिससे कीमत ₹7,000 के करीब आ सकती है।
दूसरी ओर, अगर जियोपॉलिटिकल तनाव फिर से बढ़ता है और कच्चा तेल MCX पर ₹8,000 के ऊपर बना रहता है, तो यह बाज़ार में तेज़ी के दौर की वापसी का संकेत होगा। इंटरनेशनल मार्केट के लिए ₹8,420 का लेवल बहुत अहम है; इस लेवल को पार करने पर ही नई ऊंचाई देखने को मिल सकती है।
निवेशकों के लिए सलाह
फिलहाल, कच्चे तेल का बाज़ार एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। जब तक कीमतें ₹8,000 के स्तर को पार नहीं कर लेतीं, तब तक इस ट्रेंड को पूरी तरह से 'तेज़ी वाला' (bullish) कहना जल्दबाज़ी होगी। ट्रेडर्स को ₹7,000–₹8,000 के दायरे पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि अगला बड़ा ट्रेंड किसी भी दिशा में ब्रेकआउट होने पर ही तय होगा।
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