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दिल्ली से 2100 KM दूर इस राज्य में सूखा, 47 लाख हेक्टेयर में लगी फसल बर्बाद; ₹46324 करोड़ का नुकसान

Published: Fri, 02 Oct 2026 10:55 AM (IST)

कर्नाटक में सूखे के हालात बिगड़ रहे हैं, जिससे 47 लाख हेक्टेयर से अधिक फसल बर्बाद हो गई है और 46,324 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।

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HighLights

  1. कर्नाटक में 177 तालुके सूखे से बुरी तरह प्रभावित।

  2. 47 लाख हेक्टेयर से अधिक फसल बर्बाद, भारी नुकसान।

  3. केंद्र से 7,142 करोड़ रुपये की तत्काल सहायता की मांग।

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली से करीब 2100 किलोमीटर दूर कर्नाटक में सूखे (Karnataka Drought) के हालात बन रहे हैं। राज्य के डिप्टी सीएम और रेवेन्यू मिनिस्टर जी. परमेश्वर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अलग-अलग पत्र लिखकर केंद्र से तुरंत मदद मांगी है, क्योंकि राज्य में सूखे की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। परमेश्वर ने अपने पत्रों में किसानों और ग्रामीण आजीविका पर सूखे के असर को उजागर किया और प्रभावित किसानों को समय पर और पर्याप्त राहत सुनिश्चित करने के लिए राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा मिलकर कदम उठाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

कर्नाटक सरकार ने पहले केंद्र को खरीफ 2026 के सूखे से जुड़ा ज्ञापन सौंपा था, जिसमें सूखे से प्रभावित 101 तालुकों के लिए 3,705.30 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मांगी गई थी। और वैज्ञानिक जांच के बाद, दूसरे चरण में 76 और तालुकों को सूखा-प्रभावित घोषित किया गया, जिससे राज्य में सूखा-प्रभावित तालुकों की कुल संख्या 177 हो गई।

सूखे की जांच जारी

राज्य सरकार ने बताया कि अभी 40 और तालुकों में ज़मीनी स्तर पर जांच (ग्राउंड-ट्रूथिंग) चल रही है। लगातार हो रहे आकलन के आधार पर, मॉनसून सीज़न के आखिर तक सूखे से प्रभावित तालुकों की संख्या 220 से ज़्यादा हो सकती है। हाल ही में सूखे से प्रभावित घोषित किए गए 76 तालुकों में फसल के नुकसान का आकलन किया गया है। इसमें 26.08 लाख हेक्टेयर में फैली कृषि फसलों और 1.49 लाख हेक्टेयर में फैली बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचा है।

किन फसलों को पहुंचा नुकसान?

  • फसल के नुकसान का दायरा 33 प्रतिशत से 100 प्रतिशत के बीच है, और प्रभावित इलाके के एक बड़े हिस्से में 50 प्रतिशत से ज़्यादा नुकसान दर्ज किया गया है।
  • जिन मुख्य फसलों पर असर पड़ा है, उनमें अरहर, मक्का, कपास, गन्ना, सोयाबीन और मूंग शामिल हैं। बागवानी फसलों, जैसे प्याज, सुपारी और लाल मिर्च को भी नुकसान पहुंचा है।
  • कुल मिलाकर, सूखे से प्रभावित घोषित किए गए 76 नए तालुकों में 27.57 लाख हेक्टेयर में फसल का नुकसान हुआ है। खेती की लागत के आधार पर आर्थिक नुकसान का अनुमान 27,576.2 करोड़ रुपये लगाया गया है।
  • मौजूदा 'स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फ़ंड' (SDRF) नियमों के तहत, इनपुट सब्सिडी के लिए ज़रूरत का अनुमान 2,981.34 करोड़ रुपये लगाया गया है।
  • सूखे से प्रभावित सभी 177 तालुकों में लगभग 47.09 लाख हेक्टेयर में फसल का नुकसान हुआ है, जिससे अनुमानित आर्थिक नुकसान 46,324.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

राज्य सरकार ने कहा कि चल रहे आकलन के आधार पर, खरीफ 2026 के दौरान कुल फसल नुकसान 55 लाख हेक्टेयर से अधिक होने की संभावना है। सूखा घोषित करने के दो चरणों में, कर्नाटक ने नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (NDRF) के नियमों के तहत ₹7,142.64 करोड़ की मांग की है।

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इसमें से ₹4,998.60 करोड़ इनपुट सब्सिडी के लिए मांगे गए हैं, जबकि ₹2,144.04 करोड़ चारे और पीने के पानी की सप्लाई जैसे उपायों के लिए मांगे गए हैं।