भारत के चीनी एक्सपोर्ट रोकने से कई देशों में फजीहत, चीनी की कमी और कीमत बढ़ने की चिंता
भारत ने अलनीनो और कमजोर मानसून के कारण चीनी निर्यात पर रोक लगा दी है, जिससे वैश्विक बाजार में चीनी ...और पढ़ें

अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में चीनी की कीमत और आपूर्ति को लेकर अनुमान
HighLights
अलनीनो के कारण भारत ने चीनी निर्यात रोका।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमतें बढ़ेंगी।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर पड़ेगा।
नई दिल्ली| अलनीनो का असर भारत पर बुरी तरह से दिखने लगा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में खरीफ फसलों की बुवाई में भारी गिरावट भी आई है। इन आंकड़ों से सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में इसका असर देखने को मिल रहा है। अलनीनो और कमजोर मानसून के पूर्वानुमान के कारण भारत ने चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी, जिसके बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में चीनी की आपूर्ति और कीमत को लेकर अलग-अलग अनुमान लगाए जाने लगे हैं।
80 लाख टन प्रोडक्शन घटने का अनुमान
अज़रन्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, मानसून में कम बारिश होने से भारत के सालाना चीनी प्रोडक्शन में 30 लाख से 80 लाख टन की कमी आ सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यदि भारत चीनी निर्यात (Sugar Export) पर प्रतिबंध जारी रखता है या उन्हें और सख्त करता है तो अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में चीनी कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा प्रमुख चीनी एक्सपोर्टर देश ब्राजील की प्रोसेसिंग से जुड़ी समस्याओं के चलते तेजी से आपूर्ति करना एक बड़ी चुनौती है।
कितनी बढ़ेगी चीनी की कीमत?
रिपोर्ट में मार्केट एक्सपर्ट्स का हवाला देते हुए बताया गया कि भारत ने चीनी निर्यात पर प्रतिबंध को बढ़ा दिया है। अगर देश चीनी निर्यात को पूरी तरह से रोक देता है, तो अंतरराष्ट्रीय कीमतें 750 से 800 डॉलर प्रति टन तक बढ़ सकती हैं। आपूर्ति में कमी की चिंताओं के कारण जून की शुरुआत से ही लंदन के बाजार में सफेद चीनी के वायदा भाव 660 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंच गए हैं।
चीनी निर्यात में भारत की धाक
चावल के बाद गन्ना भारत की दूसरी सबसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कृषि फसल है। भारत दुनिया के अग्रणी चीनी उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय निर्यात में लंबे समय तक रुकावट से अफ्रीका और दक्षिण एशिया के चीनी इंपोर्ट करने वाले देश प्रभावित होंगे, जिससे खुदरा चीनी की कीमतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने ये भी अनुमान लगाया कि प्रभावित बाजारों में कुल खाद्य लागत में 10-15% की वृद्धि हो सकती है। इससे पहले भी अलग-अलग विशेषज्ञों ने अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में चीनी की आपूर्ति और बढ़ती कीमत का अनुमान लगाया था।
