Silver Import Permit: चांदी बाजार में मचेगी धूम! सरकार ने जारी किया 6500 मीट्रिक टन चांदी आयात का मेगा परमिट
सरकार ने अगले छह महीनों के लिए 6500 मीट्रिक टन चांदी आयात की अनुमति दी है, ताकि त्योहारी सीजन की ...और पढ़ें

सरकार ने 6500 मीट्रिक टन चांदी आयात की अनुमति दी।
HighLights
सरकार ने 6500 मीट्रिक टन चांदी आयात की अनुमति दी।
त्योहारी सीजन की मांग पूरी करने के लिए यह कदम।
घरेलू कीमतों को कम करने में मिलेगी मदद।
एजेंसी, नई दिल्ली। Silver Import Permit: सरकार ने अगले छह महीनों में लगभग 6500 मीट्रिक टन चांदी के आयात के लिए परमिट जारी किए हैं। दुनिया में चांदी के सबसे बड़े उपभोक्ता के तौर पर भारत त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी चांदी की 80 प्रतिशत से अधिक जरूरत को आयात से पूरा करता है।
माना जा रहा है कि भारत द्वारा अधिक आयात करने से वैश्विक कीमतों को सहारा मिलेगा।मई के मध्य में भारत ने चांदी के लगभग सभी रूपों के आयात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया था। जून में, सरकार ने नियमों को और सख्त करते हुए चांदी के दाने (ग्रेन) और पाउडर को भी प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया।
चांदी आयात करने वाली प्रमुख कंपनी आम्रपाली ग्रुप गुजरात के मुख्य कार्यकारी चिराग ठक्कर ने कहा, सरकार ने अगले छह महीनों में देश की संभावित जरूरत से कहीं अधिक चांदी के आयात की अनुमति दी है, जिससे घरेलू कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी।
कितनी है चांदी की कीमत?
डीलरों के अनुसार, गुरुवार को आधिकारिक घरेलू कीमतों पर चांदी का प्रीमियम गिरकर 45 सेंट प्रति औंस रह गया, जबकि पिछले हफ्ते यह 2.50 डॉलर तक पहुंच गया था। भारत हाल के महीनों में कीमती धातुओं के आयात को कम करने की कोशिश कर रहा है, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सके और रुपये को सहारा मिल सके। इसी कोशिश के तहत, सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है।
डीलरों ने बताया कि अगले छह महीनों के लिए आयात की इतनी बड़ी अनुमति मिलने से बाजार हैरान है, क्योंकि कीमतों में गिरावट के बावजूद चांदी के गहनों और निवेश के लिए घरेलू मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है।
बुलियन आयात करने वाले एक बैंक से जुड़े मुंबई के एक डीलर ने कहा, त्योहारी सीजन आ गया है, लेकिन मांग अभी भी नहीं बढ़ी है। हाल ही में कीमतों में आई भारी गिरावट से कई निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा है, इसलिए वे अभी बाजार से दूर रहना ही बेहतर समझ रहे हैं।
