सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हीरे-सोने से स्मार्ट ज्वैलरी तक, 2030 तक 6.76 लाख करोड़ पहुंच सकता है भारत रत्न-आभूषण निर्यात; किस स्ट्रैटजी का कमाल?

By Jagran BusinessEdited By: Ankit Kumar Katiyar
Published: Fri, 09 Jan 2026 08:32 PM (IST)

इंपोर्ट-एक्सपोर्ट बैंक ऑफ इंडिया और GJEPC के अध्ययन के अनुसार, सही नीतियों और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से भारत का रत्न और ...और पढ़ें

हीरे-सोने से स्मार्ट ज्वैलरी तक, 2030 तक 6.76 लाख करोड़ पहुंच सकता है भारत रत्न-आभूषण निर्यात; किस स्ट्रैटजी का कमाल?

हीरे-सोने से स्मार्ट ज्वैलरी तक, 2030 तक 6.76 लाख करोड़ पहुंच सकता है भारत रत्न-आभूषण निर्यात; किस स्ट्रैटजी का कमाल?

HighLights

  1. 2030 तक 75 अरब डॉलर रत्न-आभूषण निर्यात का लक्ष्य

  2. क्लस्टर-केंद्रित रणनीति, उच्च मूल्य उत्पादों पर जोर

  3. मुंबई सर्वश्रेष्ठ क्लस्टर, 38 अरब डॉलर का अप्रयुक्त अवसर

नई दिल्ली| भारत से 2030 तक रत्न और आभूषणों का निर्यात 75 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 6,76,261 रुपए) तक पहुंच सकता है, अगर सेक्टर में सही नीतियां, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, नई तकनीक और आसान फाइनेंसिंग उपलब्ध कराई जाए। यह बात इंपोर्ट-एक्सपोर्ट बैंक ऑफ इंडिया (Export-Import Bank of India) और जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (Gems and Jewellery Export Promotion Council- GJEPC) की संयुक्त स्टडी में सामने आई है। इस अध्ययन का नाम 'मेकिंग जेम्स एंड जूलरी क्लस्टर्स एक्सपोर्टेबल' रखा गया है।

रत्न-आभूषण क्षेत्र में पहली बार हुआ ऐसा अध्ययन

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर भारत क्लस्टर-केंद्रित रणनीति अपनाता है तो निर्यात में तेज उछाल संभव है। यह रत्न-आभूषण क्षेत्र में पहली बार जिला स्तर पर किया गया ऐसा अध्ययन है, जिसमें 17 हाई-पोटेंशियल क्लस्टरों की पहचान और बेंचमार्किंग की गई है। इनमें मुंबई उपनगरीय क्षेत्र को सबसे बेहतर क्लस्टर बताया गया है, जबकि सूरत, मुंबई, कोलकाता और जयपुर को अग्रणी क्लस्टर माना गया है।

हाई वैल्यू-ऐडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस बढ़ाने की सलाह

अध्ययन यह भी बताता है कि भारत के पास इस सेक्टर में अभी भी करीब 38 बिलियन डॉलर (करीब 3.42 लाख करोड़ रुपए) का अप्रयुक्त निर्यात अवसर मौजूद है। इस मौके को भुनाने के लिए रिपोर्ट में हाई वैल्यू-ऐडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस बढ़ाने की सलाह दी गई है। इनमें हीरों के आभूषण, हल्के वजन के सोने के गहने, लग्जरी स्मार्ट ज्वैलरी, इमिटेशन ज्वैलरी, सिंथेटिक रत्न, ज्योतिष आधारित डिजाइन और पारंपरिक मोती आभूषण शामिल हैं।

यह भी पढ़ें- Gold Price Today: सोने में तेजी, चांदी रॉकेट की स्पीड से भागी; चेक करें अपने शहर का लेटेस्ट दाम

रिपोर्ट में नए बाजारों की तलाश पर जोर

साथ ही, रिपोर्ट में नए बाजारों की तलाश पर जोर दिया गया है। रत्न-आभूषण निर्यात के लिए वियतनाम, सिंगापुर, थाईलैंड, बोत्सवाना, रूस और श्रीलंका जैसे उभरते बाजार अहम हो सकते हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ और सिंगापुर जैसे विकसित बाजारों में भी नए अवसर तलाशने की बात कही गई है।

अध्ययन SGST रिफंड जैसी योजनाओं को मजबूत करने का सुझाव

नीतिगत स्तर पर अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि राज्य सरकारें पूंजीगत सब्सिडी, SGST रिफंड जैसी योजनाओं को मजबूत करें और मंजूरियों की प्रक्रिया को तेज व आसान बनाएं। नवाचार को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन-आधारित इंसेंटिव स्कीम शुरू करने की भी सिफारिश की गई है।

इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर हब-एंड-स्पोक मॉडल, कोच्चि और चेन्नई SEZ को मजबूत करने, सूरत व जयपुर में नए SEZ और आगरा व त्रिचुर जैसे क्लस्टरों के लिए बेहतर इंटरनेशनल एयर कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया है।