Gold Price Crash: 30% टूट चुका सोना, खरीदने का सही समय है या और गिरेंगे भाव? एक्सपर्ट्स ने इन 5 बातों की दी सलाह
Gold Price Prediction: सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई से 30% तक गिर चुकी हैं, जिससे निवेशकों में खरीदारी के अवसर ...और पढ़ें

Gold Price Prediction: 30% टूट चुका सोना, खरीदने का सही समय या और गिरेंगे भाव? एक्सपर्ट बोले- 5 बातों पर रखें नजर!

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| गोल्ड में गिरावट का दौर जारी है। गोल्ड की कीमतें रिकॉर्ड हाई से करीब 30 फीसदी तक टूट चुकी हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका है या फिर सोने में अभी और कमजोरी आ सकती है? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने पर दबाव जरूर है, लेकिन लंबी अवधि की तस्वीर अभी भी पूरी तरह खराब नहीं हुई है।
पिछले 160 दिनों में सोने में भारी गिरावट आ चुकी है। 29 जनवरी को सोना 5,600 डॉलर प्रति औंस के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। इसके अगले ही दिन से इसमें गिरावट जारी है। पिछले दिनों यह फिसलकर 4000 डॉलर प्रति औंस से नीचे पहुंच गया था। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी भी देखने को मिली।
वैश्विक बाजार में कहां ट्रेड कर रहा सोना?
मंगलवार, 7 जुलाई को खबर लिखे जाने तक कोमेक्स पर सोना 4144 डॉलर प्रति औंस (gold price today) (भारतीय करेंसी में 1.26 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) के लेवल पर ट्रेड कर रहा था। इस दौरान इसमें 0.55 फीसदी यानी करीब 22 डॉलर की गिरावट (gold price crash) दर्ज हुई। वहीं, चांदी 61 डॉलर प्रति औंस (silver price today) के ऊपर कारोबार करती दिखी।
आर मनी के डायरेक्टर तरुण सत्संगी ने बताया कि आज अमेरिकी फेड रिजर्व के मिनट्स जारी होने हैं, जिसके चलते आज दिनभर सोने-चांदी में गिरावट का दौर देखने को मिल सकता है।
सोना आखिर गिर क्यों रहा है?
आमतौर पर युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के समय निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग है। तरुण सत्संगी के मुताबिक, बाजार का फोकस अब खासतौर पर 5 बातों पर ज्यादा है-
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड
- डॉलर की मजबूती
- वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां
- महंगाई का रुख
ईरान से जुड़े तनाव के बाद ऊर्जा कीमतों में उछाल आया, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका बनी। इसके बाद ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कमजोर हुई और सोने पर दबाव बढ़ गया। इसके अलावा जून के आखिर में टेक्नोलॉजी और एआई शेयरों (AI Stocks) में आई तेज गिरावट के दौरान कई निवेशकों ने नकदी जुटाने के लिए गोल्ड और सिल्वर में भी बिकवाली की। इससे सोने की गिरावट और तेज हो गई।
यह भी पढ़ें- Gold पर India-China की बदली चाल! भारत में मांग घटी, चीन में बढ़ी खरीदारी; फिर आएगी बड़ी गिरावट?
क्या यह सिर्फ करेक्शन है?
ऑगमोंट की रिसर्च हेड रेनिशा चेनानी का कहना है कि यह कमजोरी लंबी अवधि की गिरावट नहीं, बल्कि मैक्रो इकोनॉमिक कारणों से आया एक चक्रीय करेक्शन है। उनके मुताबिक, सोने के पक्ष में लंबे समय के कई मजबूत फैक्टर अब भी बने हुए हैं। इनमें शामिल हैं-
- दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी
- बढ़ता सरकारी कर्ज
- भू-राजनीतिक तनाव
- इक्विटी बाजार में उतार-चढ़ाव
- डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के सर्वे के मुताबिक, 84 फीसदी केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में उनके विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ेगी। वहीं, करीब 90 फीसदी केंद्रीय बैंक अगले एक साल में अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
क्या अभी खरीदारी करनी चाहिए?
रेनिशा चेनानी का मानना है कि,
अगर 3,950 से 4,000 डॉलर प्रति औंस का सपोर्ट बना रहता है, तो यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा खरीदारी का मौका हो सकता है। उनका अनुमान है कि आने वाले कुछ हफ्तों में सोना फिर 4,400 डॉलर तक पहुंच सकता है। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो 2026 के आखिर तक यह 4,900 से 5,000 डॉलर के दायरे में जा सकता है। 2027 में नया रिकॉर्ड हाई बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा।
अभी किन बातों पर रहेगी नजर?
कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला ने बताया कि फिलहाल बाजार की नजर 5 अहम संकेतों पर रहेगी। जिसमें शामिल हैं-
- फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक का ब्योरा (Minutes)
- ADP इंप्लॉई मेंट रिपोर्ट
- अमेरिका के शुरुआती बेरोजगारी दावे
- अगले सप्ताह आने वाले CPI महंगाई के आंकड़े
- डॉलर और क्रूड ऑयल की चाल
कायनात चैनवाला ने बताया कि जून में अमेरिका में केवल 57,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जबकि बाजार को करीब 1.10 लाख नौकरियों की उम्मीद थी। इससे फेड के सितंबर में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना घटकर करीब 58% रह गई, जो पिछले सप्ताह लगभग 68% थी। साथ ही, मई में चीन और पोलैंड की अगुआई में केंद्रीय बैंकों ने लगातार दूसरे महीने अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाए, जिससे सोने को मजबूत आधार मिला है।
