Gold Price Outlook: दीवाली से पहले सोना 25% तक टूटा, बैंक ऑफ अमेरिका का दावा- अभी और सस्ता होगा गोल्ड; दिया टारगेट!
Gold Price Outlook 2026: सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से 25% तक गिर गई हैं, जबकि त्योहारी सीजन ...और पढ़ें
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सोना ऑल टाइम हाई से 25% टूटा, बैंक ऑफ अमेरिका ने दिया और गिरावट का टारगेट
HighLights
सोना रिकॉर्ड उच्च स्तर से 25% तक सस्ता हुआ।
बैंक ऑफ अमेरिका ने सोने में और गिरावट की भविष्यवाणी की।
फेस्टिव सीजन में भी सोने की कीमतों में गिरावट जारी।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| Gold Price Prediction: आमतौर पर भारत में फेस्टिव सीजन के दौरान सोने की कीमतों में उछाल देखने को मिलता है। लेकिन इस बार ट्रेंड थोड़ा उलटा दिख रहा है। भारत में फेस्टिव सीजन चल रहा है। 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दीवाली है। फिर भी सोने की कीमतों में गिरावट जारी है।
सोना अपने ऑल टाइम हाई से करीब 25% तक सस्ता (gold price crash) हो चुका है। लेकिन मिडिल ईस्ट में तनाव, अमेरिकी में बढ़ती महंगाई और क्रूड ऑयल की उछलती कीमतों का असर सीधा सोने पर दिखाई दे रहा है। आज, गुरुवार यानीा करवाचौथ (29 अक्टूबर) के दिन भी सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना 782 रुपए सस्ता हो गया और कीमत 1,42,968 रुपए प्रति 10 ग्राम (gold price today) हो गई। अब सवाल है कि क्या इस साल सोना फिर से अपने रिकॉर्ड तोड़ेगा या फिर इसमें अभी भी कोई गिरावट बाकी है? तो चलिए समझते हैं पूरा गणित।
रिकॉर्ड हाई से कितनी नीचे आई कीमतें?
इस साल 29 जनवरी को भारतीय वायदा बाजार (MCX) पर गोल्ड ने अपना ऑल टाइम हाई रिकॉर्ड बनाया था। तब सोने की कीमत 1,93,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर पहुंच गई थी।
हालांकि, मौजूदा समय में सोना इस शिखर से काफी नीचे चल रहा है। एमसीएक्स (MCX) गोल्ड 1,43,405 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार (gold rate today) कर रहा है। यह कीमत इसके ऑल-टाइम हाई से करीब 50,000 रुपए यानी 25% तक कम है।
अगर सोने को दोबारा 1.93 लाख रुपए के अपने पुराने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना है, तो मौजूदा कीमतों से लगभग 25% की जोरदार छलांग लगानी होगी।
फेड रिजर्व के फैसले से बदलेगी चाल?
सोने की चाल मुख्य रूप से चार बड़े कारकों पर निर्भर है- महंगाई, ब्याज दरें, बॉन्ड यील्ड और डॉलर। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श के नेतृत्व में हाल ही में ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला लिया गया है।
हालांकि, फेड के भीतर 10-2 का वोटिंग आंकड़ा यह बताता है कि अधिकारियों में मतभेद है, क्योंकि दो अधिकारियों ने 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का समर्थन किया था। इससे दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना अभी भी मजबूत बनी हुई है।
इसके अलावा, अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 5% से नीचे आ गई है, और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों व बॉन्ड यील्ड में नरमी के कारण सोना 4,000 डॉलर के स्तर पर मजबूत सपोर्ट पा रहा है।
सोने में आ सकती है बड़ी गिरावट?
बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के अनुमान के मुताबिक, सोना मौजूदा गिरावट के बाद करीब 3,700 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकता है। भारतीय करेंसी में यह कीमत 1.12 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास बैठती है। बैंक का मानना है कि पिछले कई सालों की तेज बढ़त के बाद सोने की कीमतों को संभलने के लिए अभी और समय या बड़ी गिरावट की जरूरत हो सकती है।
बैंक के बेस केस के मुताबिक, जब तक सोना 4,697 डॉलर के स्तर को पार नहीं करता, तब तक गिरावट की आशंका बनी रहेगी। यह जनवरी के उच्च स्तर के बाद बने अहम चार्ट स्तरों में से एक है। बैंक ने 4,472 डॉलर के आसपास मौजूद 50-सप्ताह के मूविंग एवरेज को भी महत्वपूर्ण बताया है। बैंक की रणनीति के मुताबिक,
4,000 डॉलर से नीचे सोने में धीरे-धीरे खरीदारी की जा सकती है। करीब 3,700 डॉलर पर खरीद बढ़ाने और 3,500 से 3,250 डॉलर (Gold Price Outlook) के दायरे में बाकी निवेश लगाने पर विचार किया जा सकता है। ये बैंक के विश्लेषण पर आधारित स्तर हैं, निश्चित लक्ष्य नहीं। बैंक के मुताबिक, गोल्ड के लिए 3,250 डॉलर का सबसे अहम लेवल होगा, जो भारतीय करेंसी में 98 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास होगा।"
ज्वैलरी खरीदारों और निवेशकों पर क्या असर?
कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट का बाजार और निवेशकों पर मिला-जुला असर पड़ रहा है।
ज्वैलरी डिमांड: ऊंचे दामों के मुकाबले अब मांग कुछ संभली है, हालांकि ग्राहक बजट को ध्यान में रखते हुए 14 से 18 कैरेट के किफायती विकल्पों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
निवेशकों की स्थिति: जिन निवेशकों ने 1.5 लाख रुपए के पार जाने के बाद इस तेजी के दौर में एंट्री की थी, वे फिलहाल घाटे में हैं और बाजार के संभलने का इंतजार कर रहे हैं।
मार्केट सपोर्ट: केंद्रीय बैंकों और ग्लोबल ईटीएफ निवेशकों की तरफ से लगातार हो रही सुरक्षित निवेश (Safe-haven) की खरीदारी से सोने को बड़ा सपोर्ट मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका में महंगाई और वास्तविक ब्याज दरों में नरमी के स्पष्ट आंकड़े सामने नहीं आते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है। हालांकि, फिजिकल ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए मौजूदा कीमतें काफी अनुकूल साबित हो रही हैं।
