साल 2000 में खरीदा था ₹1 लाख का सोना, आज कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश! जानिए 25 साल में कैसे मिला 30 गुना रिटर्न?
Gold Investment: सोने ने पिछले 25 सालों में निवेशकों को 30 गुना से अधिक का शानदार रिटर्न दिया है, जिससे ...और पढ़ें
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25 साल में सोने ने मारी कितनी छलांग? (AI Generated Photo)
HighLights
25 साल में सोने ने दिया 30 गुना से अधिक रिटर्न।
2000 में ₹1 लाख का सोना आज ₹32.5 लाख का।
महंगाई और वैश्विक संकट में सुरक्षित निवेश विकल्प।
नई दिल्ली: भारत में सोना (Gold) सिर्फ एक आभूषण या दिखावे की चीज नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों से बचत और बुरे वक्त के सबसे भरोसेमंद साथी के रूप में देखा जाता रहा है। बीते 25 सालों में आंकड़ों पर नजर डालें, तो सोने ने इस पारंपरिक भरोसे को निवेश के एक बेहद शानदार विकल्प के रूप में सौ प्रतिशत सच साबित कर दिखाया है।
साल 2000 में जो सोना आम आदमी की पहुंच में आसानी से आ जाता था, आज वह आसमान छू रहा है। अगर हम निवेश के जरिए से देखें, तो सोने ने बिना किसी भारी रिस्क या शेयर बाजार जैसी उठापटक के निवेशकों कों 30 गुना से ज्यादा का छप्परफाड़ रिटर्न देकर इतिहास रच दिया है।
₹1 लाख का निवेश कैसे बना ₹32 लाख?
जरा सोचिए, अगर आपने या आपके परिवार ने साल 2000 में एक लाख रुपये का सोना खरीद कर अपनी तिजोरी में रख दिया होता, तो आज इसकी कीमत क्या होती? उस समय भारतीय बाजार में सोने का औसत भाव करीब 4,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास हुआ करता था। इस हिसाब से एक लाख रुपये के निवेश में आपको लगभग 227 ग्राम सोना मिल जाता।
आज के समय में कितना होता फायदा?
आज के समय में जब सोने की कीमत करीब 1,43,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ज स्तर पर पहुंच चुकी है, तो उस 227 ग्राम सोने की कुल वैल्यू आज लगभग 32.5 लाख रुपये बैठती है। यानी बिना किसी टेंशन, बिना रोज-रोज बाजार का भाव चेक किए और बिना किसी खास वित्तीय योजना के, सिर्फ सोना खरीदकर रखने भर से एक लाख रुपये का निवेश 32 लाख रुपये से ज्यादा में तब्दील हो गया।
क्या है आज की तस्वीर?
वक्त के साथ रुपये की क्रय शक्ति यानी खरीदने की ताकत घटी है और सोने की कीमत में बेतहाशा इजाफा हुआ है। इसे आज की हकीकत से बड़ी आसानी से समझा जा सकता है। जहां साल 2000 में मात्र एक लाख रुपये में 227 ग्राम सोना आ जाता था, वहीं आज अगर आप एक लाख रुपये लेकर बाजार जाएं, तो आपको मुश्किल से 7 ग्राम सोना ही मिल पाएगा। यह बड़ी गिरावट साफ तौर पर दर्शाती है कि बीते ढाई दशकों में महंगाई और सोने के दामों ने कितनी लंबी छलांग लगाई है और आम आदमी के लिए भारी मात्रा में सोना खरीदना कितना मुश्किल हो गया है।
आखिर क्यों आई इतनी तेजी?
सोने की कीमतों में आई इस ऐतिहासिक और लगातार तेजी के पीछे कई बड़े आर्थिक और वैश्विक कारण छिपे हुए हैं। दुनिया भर में जैसे-जैसे महंगाई बढ़ी, वैसे-वैसे पैसे की वैल्यू कम होती गई और निवेशकों ने सोने की तरफ रुख किया। इसके अलावा, जब भी दुनिया में कोई युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव या कोविड-19 जैसी महामारी आई, तब-तब शेयर बाजार औंधे मुंह गिरे। ऐसे संकट के समय में निवेशकों ने शेयर बाजार से भारी मात्रा में पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकाने (Safe Haven) के रूप में सोने में निवेश किया।
इसके साथ ही, भारत अपना ज्यादातर सोना विदेशों से आयात करता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत गिरने से भी घरेलू बाजार में सोना लगातार महंगा होता चला गया। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने खजाने के लिए सोने की लगातार खरीदारी ने भी इसकी डिमांड को हमेशा ऊपर बनाए रखा है।
25 साल का सफर
यह पूरे 25 साल का सफर एक बात बिल्कुल साफ कर देता है कि सोना भले ही आपको रातों-रात अमीर न बनाए, लेकिन लंबी अवधि में यह आपकी संपत्ति को सुरक्षित रखने और उसे कई गुना बढ़ाने का सबसे बेहतरीन और अचूक टूल है। जहां शेयर बाजार में हमेशा भारी उतार-चढ़ाव का डर निवेशकों की नींद उड़ाए रहता है, वहीं सोना खामोशी से कछुए की चाल चलकर भी निवेश की रेस जीत लेता है।
