48 घंटे में कोहराम मचा सकता है क्रूड ऑयल! US-Iran War भड़का तो आसमान छुएगी कीमत; एक्सपर्ट ने दिए टारगेट
Crude Oil Price Hike: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अमेरिका-ईरान तनाव और भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण अत्यधिक अस्थिर ...और पढ़ें

क्रूड ऑयल बाजार में अगले 48 घंटे अहम US-ईरान तनाव से कीमतें आसमान छूने का डर

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| Crude Oil Price Hike: ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल का बाजार इस समय बड़े अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन और अमेरिका-ईरान के बीच बदलते समीकरणों के चलते क्रूड ऑयल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल (crude oil price today) के पार पहुंच गई।
हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों के चलते इसमें भारी गिरावट भी दर्ज की गई। इस वक्त क्रूड ऑयल (अमेरिकी बेंचमार्क WTI) 2.14% की तेजी के साथ 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है। ब्रेंट ऑयल में 1.23% की तेजी दर्ज हुई और कीमत 115 डॉलर के ऊपर पहुंच गई।
क्रूड ऑयल में क्यों आ रही तेजी?
यह तेजी मुख्य रूप से यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब की प्रमुख रास तनुरा (Ras Tanura) ऑयल रिफाइनरी पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले का दावा किए जाने के बाद आई।
हालांकि सऊदी सरकार ने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, फिर भी ड्रोनों और मिसाइलों को रोके जाने की घटनाओं ने दुनिया के दूसरे सबसे बड़े क्रूड उत्पादक देश में सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं को हवा दे दी है।
ING के कमोडिटी रणनीतिकारों के अनुसार, बाजार इस बात पर लगातार नजर बनाए हुए है कि पश्चिम एशिया का यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।
US-Iran के बीच सैन्य तनाव
वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक,
वॉशिंगटन ने खाड़ी के कई अरब देशों को अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (US Midterm Election) के तुरंत बाद एक "छोटे, तीव्र सैन्य अभियान" के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है। अमेरिकी और इजरायली सेनाएं ईरान पर अपने हमलों को और तेज कर सकती हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का यह बयान कि "हम एक और छोटा एपिक फ्यूरी अभियान चला सकते हैं," ने बाजार की धड़कनें बढ़ा दी हैं।"
फेड रिजर्व की बैठक पर नजर
सैक्सो बैंक (Saxo Bank) के कमोडिटी स्ट्रेटजी हेड ओले एस हैनसेन ने कहा कि,
"इजरायली चुनावों और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नजदीक आने से भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम बहुत ज्यादा बढ़ गया है। जब तक वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम करने के पुख्ता संकेत नहीं मिलते, तब तक क्रूड ऑयल की कीमतें काफी संवेदनशील बनी रहेंगी। इसके अलावा, निवेशकों की नजरें एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की साप्ताहिक रिपोर्ट और फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक पर भी टिकी हैं।"
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शांति समझौते की खबरें भी
एक तरफ जहां युद्ध और हमलों की आशंकाओं से कीमतें आसमान छू रही थीं, वहीं दूसरी तरफ Axios की एक रिपोर्ट ने बाजार की तस्वीर पूरी तरह पलट दी। इस रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) पर सहमति बनने के संकेत मिले हैं।
अगले 48 घंटे बेहद अहम
1 नवंबर को होने वाली OPEC+ की बैठक और रूस के बाल्टिक व ब्लैक सी पोर्ट्स से क्रूड एक्सपोर्ट घटने की संभावनाओं के बीच बाजार में अभी भी कशमकश जारी है। कोटक नियो (Kotak Neo) की एवीपी कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला के मुताबिक, अगले 48 घंटे कच्चे तेल के बाजार के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। यदि समझौता सफल रहा तो कीमतों में और बड़ी गिरावट आ सकती है, लेकिन वार्ता टूटने पर बाजार में भूचाल फिर लौट सकता है।
150 डॉलर तक जा सकता है क्रूड
एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी वाइस प्रेसिडेंट एवं रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने जागरण बिजनेस से खास बातचीत में बताया कि,
अगर भू-राजनीतिक हालात और ज्यादा बिगड़ते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतें खतरनाक स्तर पर जा सकती हैं। अगर अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन के बाद अमेरिका बड़े पैमाने पर ईरान पर हमले शुरू कर देता है और ईरान जवाबी कार्रवाई में शिपमेंट को पूरी तरह ठप कर देता है, तो कच्चे तेल के दाम उछलकर 150 डॉलर प्रति बैरल (Crude Oil Price Target) तक भी पहुंच सकते हैं।"
