Copper Price Outlook: तांबे की सप्लाई पर संकट, कीमतों में आ सकता है उछाल? Goldman Sachs ने बताया 16 साल वाला कनेक्शन
Copper Price Outlook 2026: गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, तांबे की आपूर्ति बढ़ाना लगातार मुश्किल हो रहा है, जिससे ...और पढ़ें
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तांबे की कीमतों में बड़ा उछाल संभव, गोल्डमैन सैक्स ने बताया आपूर्ति संकट का कारण
HighLights
तांबे की आपूर्ति बढ़ाना लगातार मुश्किल हो रहा है।
नई खदानों के उत्पादन में औसतन 16 साल लगते हैं।
गोल्डमैन सैक्स ने कीमतों में तेजी की आशंका जताई।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| Copper Price Outlook 2027: तांबे की कीमतों में आने वाले वर्षों में तेजी का दबाव बढ़ सकता है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs Copper Report) रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में तांबे की सप्लाई बढ़ाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। नई खदानों को खोजने से लेकर उत्पादन शुरू करने तक औसतन 16 साल से ज्यादा का समय लग रहा है। ऐसे में मांग के मुकाबले सप्लाई कम पड़ने पर तांबे की कीमतों को सहारा मिल सकता है।
अभी क्या हैं कॉपर के ताजा रेट्स?
ग्लोबल बाजार यानी कॉमेक्स पर कॉपर अभी 6.57 डॉलर प्रति पाउंड (copper rate today) के हिसाब से कारोबार कर रहा है। वहीं घरेलू वायदा बाजार यानी MCX पर सोना 1400 रुपए प्रति किलोग्राम (copper price today) के आसपास ट्रेड कर रहा है।
तांबे की सप्लाई बढ़ाना क्यों हो रहा मुश्किल?
Goldman Sachs के मुताबिक, तांबे की नई बड़ी खोजों में 1990 के दशक से गिरावट आई है। इसके अलावा, कई खदानों में अयस्क की गुणवत्ता यानी उसमें मौजूद तांबे की मात्रा भी घट रही है। खासकर दक्षिण अमेरिका में यह समस्या देखी जा रही है।
नई खदानें अब कई बार दूर-दराज के इलाकों में मिलती हैं। वहां निर्माण, संचालन और जरूरी ढांचा तैयार करने का खर्च ज्यादा होता है। यही वजह है कि नई सप्लाई बाजार तक पहुंचाना महंगा और समय लेने वाला काम बन गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा खदानों का उत्पादन 2030 से घटने की आशंका है। ऐसे में सिर्फ तांबे की कीमत बढ़ने से तुरंत सप्लाई बढ़ाना आसान नहीं होगा।
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बढ़ सकता है खदान बनाने का 50% खर्च
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि किसी प्रोजेक्ट के शुरुआती मूल्यांकन से उत्पादन शुरू होने तक प्रति टन उत्पादन क्षमता पर पूंजीगत खर्च करीब 50% बढ़ जाता है। यह खर्च 10,600 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 15,900 डॉलर प्रति टन तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट में शामिल परियोजनाओं के लिए बैंक का अनुमानित पूंजीगत खर्च कंपनियों के अपने अनुमानों से 25% से 90% तक ज्यादा है। इसका मतलब है कि नई खदानों को शुरू करने में कंपनियों को उम्मीद से ज्यादा पैसा लगाना पड़ सकता है।
2035 तक बढ़ सकती है सप्लाई, लेकिन जोखिम भी
गोल्डमैन सैक्स ने कुछ ऐसी तांबा परियोजनाओं का आकलन किया है, जिनसे 2035 के अंत तक सालाना करीब 10 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जुड़ सकती है। इन परियोजनाओं से कुल नेट एसेट वैल्यू में करीब 20 अरब डॉलर की बढ़ोतरी का अनुमान है।
हालांकि, उत्पादन बढ़ने का समय और मात्रा इस बात पर निर्भर करेगी कि परियोजनाएं कितनी तेजी से पूरी होती हैं, लागत कितनी बढ़ती है और निवेश से जुड़े फैसले कैसे होते हैं।
तांबे की कीमतों पर क्या होगा असर?
गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि तांबे की सप्लाई की समस्या अस्थायी नहीं, बल्कि लंबे समय से जुड़ी संरचनात्मक चुनौती है। इसलिए बाजार में मौजूदा उत्पादकों और भरोसेमंद विस्तार परियोजनाओं की अहमियत बढ़ सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आज लिए गए निवेश फैसलों का असर 2040 के दशक में मिलने वाली सप्लाई पर भी पड़ सकता है। हालांकि, रिपोर्ट ने तांबे का कोई निश्चित भाव लक्ष्य नहीं दिया है।
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