जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राज्यसभा में विनियोग विधेयक 2022 और वित्त विधेयक 2022 पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध का प्रभाव अर्थव्यवस्था पर किसी महामारी जैसा है। इससे सप्लाई लाइन में अवरोध पैदा हो रहा है। वैल्यू चेन टूट रही हैं। नए बाजार उभर रहे हैं, लेकिन पुराने बाजार सामान्य स्थिति में नहीं हैं। राज्यसभा में चर्चा के बाद मंगलवार को संसद से आम बजट 2022-23 पारित हो गया। लोकसभा से बजट शुक्रवार को ही पारित कर दिया गया था।वित्त मंत्री ने कहा कि इस युद्ध से दुनिया के सभी देशों पर असर पड़ा है। अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। हालांकि जनता पर इसका कम से कम असर पड़े, इसके लिए सरकार प्रयासरत है।

वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड महामारी के बावजूद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने किसी तरह का कोई टैक्स नहीं लगाया है। दूसरी ओर दुनिया के 32 देशों ने अपनी वित्तीय व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अपने यहां कई तरह के टैक्स लगाए हैं। सदन में बजट पर उठे सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान राज्यों को केंद्र की तरफ से 8.35 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो संशोधित अनुमान 7.45 लाख करोड़ के मुकाबले अधिक है।

विनियोग विधेयक 2022 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि अंकटाड की रिपोर्ट के मुताबिक भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) प्राप्त करने वाले दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल है। वर्ष 2020-21 में कुल 81.72 अरब डालर की एफडीआइ प्राप्त हुई है। इससे पिछले वित्त वर्ष में 74.9 अरब डालर एफडीआइ मिली थी। वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में कुल 500.5 अरब डालर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) आया, जो संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के 10 वर्षों के कार्यकाल के मुकाबले 65 फीसद अधिक है। वर्तमान सरकार के आर्थिक प्रबंधन से निवेशकों का विश्वास बढ़ा है।

पिछले कुछ हफ्तों से बढ़ रही हैं पेट्रोलियम की कीमतें

वित्त मंत्री ने देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों का भी जवाब दिया। बजट चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध कई दिन से चल रहा है, लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि अब हो रही है। इस पर सीतारमण ने कहा, 'यह सही नहीं है। कीमतें पिछले कुछ हफ्ते से बढ़ रही हैं और हम उससे निपटने के लिए प्रयास कर रहे हैं।'

उन्होंने यूपीए सरकार के दौरान पेट्रोलियम कंपनियों को जारी किए गए बांड का भी जिक्र किया और कहा कि करदाता आयल बांड की कीमत चुका रहे हैं और अभी पांच साल और उन पर इसका बोझ रहेगा, क्योंकि इन बांड के तहत भुगतान 2026 तक होना है। कुल भुगतान दो लाख करोड़ रुपये होगा। विपक्ष ने कहा कि बांड की शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में हुआ था। इस पर सीतारमण ने बताया कि 1999 से 2004 के दौरान 9,000 करोड़ रुपये के बांड जारी किए गए है, जबकि यूपीए सरकार ने दो लाख करोड़ रुपये के बांड जारी किए।

अर्थव्यवस्था में तेज रिकवरी से विकास को मिलेगी गति

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कोविड महामारी से उबरने और बजट के तहत की गई पहल से अर्थव्यवस्था में तेज रिकवरी हुई है। इससे विकास की गति को बनाए रखने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने विकास के रोडमैप पर 2014 से ही कदम बढ़ाना शुरू कर दिया था। पिछले वर्षो में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), इन्साल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) और कारपोरेट टैक्स में कटौती जैसे सुधार के कई कदम उठाए गए हैं। इन सुधारों के दम पर ही 2014-20 के दौरान वास्तविक जीडीपी 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है।

Edited By: Arun Kumar Singh

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