नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। देश में ही नहीं, अब विदेशों में भी युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल सकेगा। बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान किया गया है। विभिन्न देशों में रोजगार अवसरों के अनुसार युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें वहां की भाषा का ज्ञान भी शामिल है। वित्तमंत्री निर्मला सीतामरण ने कहा कि विदेशों में शिक्षकों, नर्सो और पारा-मेडिकल स्टाफ और देखभाल करने वालों की भारी मांग है और इसके लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।

निर्मला सीतारमण के अनुसार, विदेशों में भारी मांग के बावजूद भारतीय युवा इसका लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं क्योंकि वे उन मानकों को पूरा नहीं कर पाते हैं, जिनकी विदेशों में दरकार होती है। जाहिर है यदि देश के युवाओं को प्रशिक्षित कर उन मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए, तो विदेशों में रोजगार के असीमित अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।

बजट में इसके लिए विशेष रूप से कई ब्रिज कोर्स तैयार करने का प्रस्ताव किया गया है। स्वास्थ्य और कौशल विकास मंत्रालय पेशेवर संगठनों की मदद से ऐसे ब्रिज कोर्स को तैयार करेंगे। विभिन्न देशों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इस कोर्स में संबंधित देश की भाषा सिखाने को भी शामिल किया जाएगा। कौशल विकास मंत्रालय लंबे समय से विदेशों में युवाओं को रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने की कोशिश में जुटा है।

इस सिलसिले में कौशल विकास मंत्रालय अमेरिका, जापान, सिंगापुर और यूएई समेत लगभग एक दर्जन देशों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर चुका है। बजट भाषण पढ़ते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2030 तक भारत दुनिया का सबसे बड़े काम करने लायक जनसंख्या का देश बन जाएगा।

जाहिर है इन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती होगी। वहीं अधिकांश विकसित देशों की जनसंख्या में बुजुर्गो का अनुपात बढ़ता जा रहा है और वे उद्योग-धंधों और जरूरी सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए कामगार लोगों की कमी से जूझ रहे हैं। यह भारतीय युवाओं के लिए सुनहरा अवसर हो सकता है। इसी को ध्यान में रखकर बजट में विशेष स्कीम का प्रस्ताव किया गया है।

Posted By: Pawan Jayaswal

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