नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। 1 फरवरी 2018 को पेश किए जाने वाले आम बजट से बेशक रेलवे को किसी बड़े आवंटन की उम्मीद न हो, लेकिन फिर भी उसे कुछ प्रमुख क्षेत्रों के लिए आवंटन दिया जा सकता है। इन प्रमुख क्षेत्रों में सुरक्षा, सुविधाएं और इन्फ्रा विस्तार शामिल है। गौरतलब है कि जीएसटी लागू किए जाने के बाद यह एनडीए सरकार का पहला आम बजट होगा।

रेलवे में इस बार क्या नहीं होगा?

ऐसा माना जा रहा है कि इस बार रेल किराए में इजाफे की कोई बड़ी घोषणा नहीं होगी और न ही इस रेल बजट में किसी नई ट्रेन की घोषणा की जाएगी। बीते तीन वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में किए गए प्रयासों की झलक आम बजट 2018-19 में देखने को मिल सकती है। अगले वित्त वर्ष के लिए परिचालन अनुपात (ओआर) का 95 फीसद होना तय माना जा रहा है, यह चालू वित्त वर्ष के लिए 96 फीसद रहने का अनुमान है। रेलवे की वित्तीय स्थिति की झलक इसी परिचालन अनुपात से मिलती है। 90 फीसद परिचालन अनुपात का मतलब होता है कि 100 पैसा कमाने के लिए 90 पैसे खर्च किए जाते हैं।

इस बजट में वाराणसी के डीजल लोकोमोटिव वर्क्स (डीएलडब्ल्यू) में इलेक्ट्रिक इंजनों के निर्माण के लिए और पटियाला में डीजल कंपोनेंट वर्क्स के लिए प्रावधान किए जा सकते हैं ताकि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक लोको पायलट की मांग को पूरा किया जा सके। जैसा कि रेलवे ने पूर्ण विद्युतीकरण करने और क्रमिक तरीके से डीजल लोकोपायलट हटाने का फैसला किया है। रेलवे ने बीते वर्ष के मुकाबले साल 2017 के दौरान पैसेंजर बुकिंग के मामले में 1.4 फीसद की ग्रोथ और गुड्स लोडिंग के मोर्चे पर 6.9 फीसद की ग्रोथ दर्ज कराई है।

रेलवे को क्या?

रेल बजट में योजना आवंटने के बढ़ने की संभावना है। यह 1.31 लाख करोड़ से बढ़कर 1.46 लाख करोड़ हो सकता है। जबकि सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) भी बढ़कर लगभग लगभग 65,000 करोड़ रुपए हो सकती है। यह बीते वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 55,000 करोड़ रुपए रही थी। इस वित्त वर्ष के बजट में 11,000 ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के लिए 3,000 करोड़ के बजटीय आवंटन का प्रावधान हो सकता है। वहीं यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य, देश के सभी प्रमुख शहरी और उपनगरीय स्टेशनों पर करीब 3,000 एस्केलेटर और 1,000 लिफ्ट स्थापित करने के लिए भी प्रावधान किए जा सकते हैं।

Posted By: Praveen Dwivedi