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हर दिन 222600000 लीटर तेल.. इसलिए दुनिया में सबसे अलग 'जामनगर रिफाइनरी'; मुकेश अंबानी का मुकद्दर है यह फैक्ट्री

Published: Thu, 22 Oct 2026 06:16 PM (IST)

जामनगर रिफाइनरी रिलायंस इंडस्ट्रीज का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जो दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है।

एआई जनरेटेड सांकेतिक तस्वीर

एआई जनरेटेड सांकेतिक तस्वीर

नई दिल्ली। जामनगर रिफाइनरी, रिलायंस इंडस्ट्रीज और अंबानी परिवार के लिए कामधेनु या भाग्य लक्ष्मी से कम नहीं है। दरअसल, पेट्रोकेमिकल, रिलायंस इंडस्ट्रीज का अहम और राजस्व में सबसे ज्यादा योगदान देने वाला बिजनेस है और गुजरात स्थित जामनगर रिफाइनरी रिलायंस इंडस्ट्रीज के पेट्रोकेमिकल बिजनेस का मुख्य केंद्र है। भारत के साथ-साथ यह रिफाइनरी ग्लोबल ऑयल मार्केट के लिए भी बहुत मायने रखती है। क्योंकि, यह दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है, जो कंपनी की कुल रिफाइनिंग क्षमता और राजस्व में सबसे बड़ा योगदान देता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रुबियो की भारत यात्रा और जामनगर रिफानरी विजिट से एक बार फिर अंबानी परिवार की यह रिफाइनरी सुर्खियों में है।

आइये आपको बताते हैं जामनगर रिफाइनरी के निर्माण से लेकर ग्लोबल बिजनेस में इसकी हैसियत के बारे में...

क्यों खास है जामनगर रिफाइनरी?

जामनगर रिफाइनरी, दुनिया का सबसे बड़े सिंगल-साइट ऑयल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है, जिसकी कुल कच्चा तेल प्रसंस्करण क्षमता 1.4 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) है, लीटर में यह क्षमता 22.26 करोड़ लीटर है। कंपनी के अनुसार, यह वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 1.5 प्रतिशत है। इस कॉम्प्लेक्स में दो रिफाइनरियां हैं- पहली, 1999 में शुरू हुई रिफाइनरी जिसकी क्षमता 6,60,000 bpd है, और दूसरी, 2008 में शुरू हुई निर्यात-केंद्रित रिफाइनरी जिसकी क्षमता 5,80,000 bpd है; यह दूसरी रिफाइनरी एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में काम करती है।

जामनगर अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ताओं से कच्चा तेल आयात करता है और वैश्विक बाजारों में रिफाइंड उत्पाद निर्यात करता है। यह रिफाइनरी भारी और सल्फर-युक्त कच्चे तेल को प्रोसेस कर सकती है, जिसे कई अन्य संयंत्र कुशलतापूर्वक नहीं संभाल पाते; यह इस तेल को अधिक मूल्य वाले उत्पादों में बदल देती है।

धीरू भाई का सपना, मुकेश ने किया साकार

जामनगर रिफाइनरी बेशक धीरू भाई अंबानी का सपना था, जिसे उनके बेटे मुकेश अंबानी ने साकार किया। 1990 के दशक में मुकेश अंबानी ने इस मेगा-प्रोजेक्ट का जिम्मा अपने हाथों में लिया और इसे महज 36 महीने में बनवाकर तैयार किया। इंजीनियरिंग, निर्माण और तकनीक के स्तर पर इस पूरी रिफाइनरी को दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-लोकेशन रिफाइनरी बनाने के पीछे मुकेश अंबानी का ही दिमाग और मेहनत थी।

दुनिया के लिए क्यों खास यह रिफाइनरी?

रिलायंस, रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के दुनिया के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में से एक होने के नाते, वैश्विक तेल बाजारों को स्थिर रखने में एक अहम भूमिका निभाता है। यह रिफाइनरी यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के कई देशों को पेट्रोल और डीजल का निर्यात करती है। जब भी दुनिया में कोई ऊर्जा संकट आता है तो जामनगर रिफाइनरी एक 'स्विंग प्रोड्यूसर' के रूप में काम करती है, जिससे ग्लोबल मार्केट में ईंधन की कमी को पूरा किया जा सके।

रुबियो क्यों पहुंचे जामनगर?

रिलायंस का सबसे बड़ा निर्यात डीजल है, जिसकी किल्लत को लेकर ट्रम्प विशेष रूप से चिंतित हैं; क्योंकि अगले महीने की शुरुआत में यूएस में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले अमेरिका में डीजल की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। रूबियो का रिफाइनरी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले, महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच ट्रम्प को अपनी अब तक की सबसे खराब अप्रूवल रेटिंग का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि ट्रंप के दूत बनकर मार्क रुबियो ने जामनगर रिफाइनरी का दौरा किया है।

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इसके अलावा, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी अमेरिका में निवेश कर रहे हैं, जो मुख्य रूप से ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं के माध्यम से है।