दुनिया का सबसे बड़ा 'जिद्दी अरबपति', 5127 बार फेल हुए तब भी नहीं मानी हार; अब 1.44 लाख करोड़ साम्राज्य के मालिक
सर जेम्स डायसन ने 5,127 बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी (worlds biggest stubborn billionaire) और अपनी ...और पढ़ें

जेम्स डायसन की जिद: 5127 नाकामियों के बाद बने अरबपति, जानें सफलता का राज
HighLights
सर जेम्स डायसन 5,127 बार हुए असफल।
रोजमर्रा की झुंझलाहट से मिली आविष्कार की प्रेरणा।
आज 1.44 लाख करोड़ रुपये के साम्राज्य के मालिक।
नई दिल्ली। क्या आप किसी काम में एक या दो बार फेल होने पर हार मान लेते हैं? अगर हां तो जरा उस इंसान के बारे में सोचिए जो एक-दो बार नहीं, बल्कि पूरे 5,127 बार फेल हुआ! हम अक्सर सफलता की कहानियों को रातों-रात मिली कामयाबी मान लेते हैं, लेकिन दुनिया के मशहूर ब्रिटिश आविष्कारक सर जेम्स डायसन की कहानी इस मिथक को पूरी तरह तोड़ देती है। यह कहानी किसी अचानक मिले चमत्कारी आइडिया की नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की एक आम झुंझलाहट और उस परेशानी को जड़ से खत्म करने की जिद की है।
सर जेम्स डायसन का मशहूर क्लीनर असल में घर की एक आम परेशानी का हल था, एक ऐसा वैक्यूम जिसका सक्शन (खींचने की ताकत) कम हो जाता था। इसे बनाने का सफर कई सालों तक चली कोशिशों, गलतियों और बार-बार डिजाइन बदलने का था।
इंजीनियरिंग की दुनिया में 5,127 का यह आंकड़ा अब जिद्द की एक मिसाल बन गया है। लेकिन इसके पीछे की असली कहानी गिनती के बारे में नहीं, बल्कि इस बारे में है कि डायसन ने हर नाकामी के बाद क्या किया इस बात की है।
डायसन की शुरुआत किसी नई चीज का आविष्कार करने की महत्वाकांक्षा से नहीं हुई थी। यह पुरानी चीज से हुई झुंझलाहट का नतीजा था। आम वैक्यूम क्लीनर की ताकत तब कम हो जाती थी जब उनके बैग धूल से भर जाते थे। इसे ज़िंदगी की एक आम बात मानकर नज़रअंदाज करने के बजाय, उन्होंने यह पता लगाना शुरू किया कि ऐसा क्यों होता है।
यह सवाल उनकी वर्कशॉप का जुनून बन गया। एक के बाद एक मॉडल तैयार हुए और एक के बाद एक मॉडल उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, कभी थोड़ी कमी रह गई, तो कभी बहुत ज़्यादा। हर नाकाम मॉडल को यह मानने के बजाय कि वे गलत रास्ते पर हैं, डायसन ने हर एक को एक सुराग की तरह देखा। कहीं कमजोर सील, तो कहीं खराब आकार का साइक्लोन हर नाकामी ने यह साफ कर दिया कि आखिर में बनने वाले सही मॉडल का रूप कैसा होना चाहिए।
जब 5,127वां वर्किंग प्रोटोटाइप बनकर तैयार हुआ, तो मशीन बिना डिस्पोजेबल बैग के भी सक्शन बनाए रख सकती थी। यही वह खासियत थी जिसने आगे चलकर पूरी प्रोडक्ट लाइन की पहचान बनाई।
आज सर जेम्स डायसन की नेटवर्थ फोर्ब्स के मुताबिक 14.9 बिलियन डॉलर (करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये) है। भारत में, डायसन एक प्रीमियम लग्जरी ब्रांड के तौर पर काम करता है और मुख्य रूप से हाई-एंड हेयरकेयर प्रोडक्ट्स, एयर प्यूरीफायर और कॉर्डलेस वैक्यूम क्लीनर पर ध्यान देता है।
जेम्स डायसन का असली फॉर्मूला: परेशान हों, फिर उसे ठीक करें
डायसन का मोटिवेशन रोजमर्रा की छोटी-मोटी झुंझलाहट बनी। उन्होंने बार-बार आम ज़िंदगी की उन छोटी-मोटी परेशानियों की ओर इशारा किया है जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। जैसे कोई गैजेट जो ठीक से काम नहीं करता, या कोई काम जो जरूरत से ज्यादा मुश्किल या पेचीदा है। यही आविष्कार की असली शुरुआत होती है।
ज्यादातर लोग ऐसे पलों को नजरअंदाज कर देते हैं। डायसन का तर्क है कि उन पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि झुंझलाहट अक्सर इस बात का पहला संकेत होती है कि किसी चीज का डिजाइन खराब है और खराब डिजाइन वाली चीजों को आमतौर पर बेहतर बनाया जा सकता है।
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