नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। विश्व बैंक ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जीएसटी के असर से पूरी तरह उबर चुकी है। उसने हाल में बीते वित्त वर्ष 2017-18 में विकास दर 7.3 फीसद रहने की उम्मीद जताई है। इसके बाद अगले दो वर्षो में विकास 7.5 फीसद रहने का अनुमान है।

साल में दो बार जारी होने वाले साउथ एशिया इकॉनोमिक फोकस रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा कि भारत की विकास दर वर्ष 2016-17 की 6.7 फीसद से बढ़कर बीते वर्ष में 7.3 फीसद रहने का अनुमान है। उसका कहना है कि निजी निवेश और उपभोग में सुधार होने के कारण आर्थिक हालात बेहतर हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल ग्रोथ का लाभ उठाने के लिए भारत को निवेश और निर्यात पर फोकस बढ़ाना चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार हर महीने कामगारों की संख्या 13 लाख बढ़ रही है। भारत को हर साल लाख नए रोजगार पैदा करने होंगे। जबकि 2005 से 2015 तक के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि रोजगार में कमी आई है। बैंक कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी से आर्थिक गतिविधियों को धक्का लगा। गरीब लोगों पर इसका ज्यादा असर पड़ा। लेकिन इसके बाद हालात में सुधार हुआ। उसने कहा कि नए निवेश से मौजूदा वित्त वर्ष 2018-19 में विकास दर तेज हो सकती है। गरीबी में कमी आने की उम्मीद है। लेकिन अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के चलते इसके प्रभाव में थोड़ी अनिश्चितता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में उपभोग तेजी से बढ़ रहा है। सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने और बेहतर मानसून से ग्रामीण क्षेत्रों में मांग सुधरी।

Posted By: Surbhi Jain