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कौन थे रवि पंडित? छोटे से कमरे से बनाई ऑटोमोबाइल सेक्टर की 'सॉफ्टवेयर किंग', आज 20000 करोड़ का साम्राज्य

Published: Fri, 08 May 2026 12:22 PM (GMT+05:30)Updated: Fri, 08 May 2026 02:29 PM (GMT+05:30)

केपीआईटी टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक और चेयरमैन डॉ. एस.बी. (रवि) पंडित का पुणे में निधन हो गया। उन्होंने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ...और पढ़ें

KPIT टेक्नोलॉजीज के को-फाउंडर व चेयरमैन डॉ. एस.बी. (रवि) पंडित का 8 मई 2026 की सुबह पुणे में निधन हो गया।

KPIT टेक्नोलॉजीज के को-फाउंडर व चेयरमैन डॉ. एस.बी. (रवि) पंडित का 8 मई 2026 की सुबह पुणे में निधन हो गया।

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नई दिल्ली। भारतीय ऑटोमोटिव और मोबिलिटी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के पुरोधा और KPIT टेक्नोलॉजीज के को-फाउंडर व चेयरमैन डॉ. एस.बी. (रवि) पंडित (1950–2026) का 8 मई 2026 की सुबह पुणे में निधन हो गया। पेशे से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर बनने तक का उनका सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपनी दूरदृष्टि और कड़ी मेहनत से पुणे के एक छोटे से स्टार्टअप को आज एक ऐसी वर्ल्ड-क्लास कंपनी में बदल दिया, जिसका सॉफ्टवेयर दुनिया भर की लाखों कारों (ऑटोनॉमस, इलेक्ट्रिक और क्लीन एनर्जी) को चला रहा है। आइए उनके इस ऐतिहासिक सफर के बारे में जानते हैं।

मराठी मीडियम स्कूल से MIT तक का सफर कैसे तय किया?

पुणे के एक साधारण मराठी परिवार में जन्मे डॉ. रवि पंडित की शुरुआती शिक्षा एक मराठी-मीडियम स्कूल से हुई थी। उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से कॉमर्स में मास्टर डिग्री (M.Com) हासिल की। 1976 में, 26 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता बी.आर. पंडित की चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म, 'किर्तने एंड पंडित' (Kirtane & Pandit) जॉइन की। वे एक गोल्ड मेडलिस्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट बने।

उनकी सोच को ग्लोबल उड़ान तब मिली जब उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित MIT स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट (MIT Sloan School of Management) से मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की और शिकागो में अलेक्जेंडर ग्रांट (अब ग्रांट थॉर्नटन) के साथ काम किया। भारत लौटकर उन्होंने अपने पार्टनर किशोर पाटिल के साथ मिलकर अपनी फैमिली फर्म को आगे बढ़ाया, जहां से उन्हें मैन्युफैक्चरिंग और क्लाइंट रिलेशनशिप की गहरी समझ मिली।

एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को IT कंपनी (KPIT) बनाने का विचार कैसे आया?

1980 के दशक के अंत में, जब भारत अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण कर रहा था, तब डॉ. पंडित ने पारंपरिक अकाउंटिंग से आगे बढ़कर IT सेक्टर में एक बड़ा अवसर देखा। 25 जनवरी 1990 को उन्होंने किशोर पाटिल और टेक एक्सपर्ट शिरीष पटवर्धन के साथ मिलकर पुणे में KPIT इन्फोसिस्टम्स की नींव रखी।

इस कंपनी की शुरुआत सीए फर्म के एक छोटे से कमरे में हुई थी। शुरुआती 50-60 ग्राहक उन्हें अपनी पुरानी सीए फर्म के भरोसेमंद रिश्तों से ही मिले। अन्य सामान्य IT आउटसोर्सिंग कंपनियों से अलग, KPIT ने अपना पूरा फोकस ऑटोमोटिव और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की जटिल इंजीनियरिंग समस्याओं को सुलझाने पर रखा।

इन अहम पड़ावों ने KPIT को बनाया मोबिलिटी की दुनिया का बेताज बादशाह?

शुरुआती दिनों में फंड की कमी और नई तकनीक की चुनौतियों के बावजूद, संस्थापकों के 'बिजनेस विजन' ने कंपनी को डूबने नहीं दिया। KPIT का 1999 का शानदार IPO सफलता इसके कुछ प्रमुख पड़ाव में खास रहा। KPIT का आईपीओ 50 गुना से ज्यादा ओवरसब्सक्राइब हुआ था, जिसने कंपनी की क्षमता को साबित कर दिया।

साल 2002 में कमिंस इन्फोटेक (Cummins Infotech) के साथ रणनीतिक विलय ने कंपनी को 'KPIT कमिंस इन्फोसिस्टम्स' बनाया, जिससे इन्हें ग्लोबल स्केल और ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग में गहरी विशेषज्ञता मिली। कंपनी ने 2018-2019 में बड़े बदलाव की तरफ जाते हुए मोबिलिटी और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स (SDV) पर फोकस करने के लिए कंपनी ने अपने गैर-जरूरी व्यवसायों को अलग कर दिया और "क्लीनर, स्मार्ट और सुरक्षित दुनिया" के विजन के साथ खुद को रीब्रांड किया।

आज KPIT 15 देशों में काम कर रही है और इसके पास 13,000 से अधिक विशेषज्ञ हैं। इसका सॉफ्टवेयर दुनिया भर में 2 करोड़ से अधिक वाहनों को पावर देता है। BMW, Honda, Ford, Mercedes-Benz जैसी ग्लोबल कंपनियां आज इनके क्लाइंट्स में शुमार हैं।

बिजनेस के अलावा समाज और देश के लिए क्या रहा डॉ. पंडित का योगदान?

डॉ. रवि पंडित भारत के 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के एम्पावर्ड ग्रुप में शामिल होने वाले एकमात्र प्राइवेट-सेक्टर सदस्य थे। उन्होंने पुणे इंटरनेशनल सेंटर और 'जनवानी' की सह-स्थापना की और पुणे में 'जीरो गार्बेज प्रोजेक्ट' को बढ़ावा दिया। उन्होंने प्रसिद्ध वैज्ञानिक आर.ए. माशेलकर के साथ मिलकर 'Leapfrogging to Pole-Vaulting' नामक पुरस्कार विजेता किताब भी लिखी।

उनके इन्हीं योगदानों के लिए उन्हें कई विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट की उपाधि और इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA) के फेलो के रूप में चुना गया था। एक छोटे से कमरे से शुरू हुई कंपनी KPIT का आज मार्केट कैप 20,001 करोड़ रुपये है।

इस खबर के बीच कैसा रहा केपीआईटी टेक्नोलॉजीज के शेयर का हाल?

सत्र में बीएसई पर केपीआईटी टेक्नोलॉजीज के शेयर 0.61 प्रतिशत बढ़कर 726 रुपए प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे थे। शेयर का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 1,433 रुपए और 52 सप्ताह का न्यूनतम स्तर 625 रुपए है। इस सप्ताह की शुरुआत में, कंपनी ने मार्च तिमाही के लिए समेकित शुद्ध लाभ में 33 प्रतिशत की वार्षिक गिरावट दर्ज की, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 245 करोड़ रुपए के मुकाबले 163 करोड़ रुपए रहा। लाभ में गिरावट के बावजूद, कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में परिचालन राजस्व में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 1,528 करोड़ रुपए के मुकाबले 1,711 करोड़ रुपए रहा।

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