नई दिल्ली, बिजेंद्र बंसल। चीन से तनाव और उसके उत्पादों के बहिष्कार के कारण भारतीय उद्यमियों को नए अनुबंध मिलने शुरू हो गए हैं। घरेलू व अन्य जरूरतों के सामान की अनलॉक-दो में मांग बढ़ रही है। ऐसे में चीन से सामान लाने वाले ट्रेडर्स अब भारतीय उद्योगों की ओर रुख करने लगे हैं और जरूरी होने पर नकद माल खरीद रहे हैं। कुछ ट्रेडर्स तो अपने संबंधों के आधार पर चीनी सामान को भारतीय उद्योगों में बनाने में भी मददगार साबित हो रहे हैं।

उत्तर भारत में क्रेन बनाने वाली एक कंपनी के प्रबंधक ने बताया कि पहले वे अपनी क्रेन के लिए कुछ पार्ट चीन से आयात करते थे। अब जबकि चीन से आने की संभावना नजर नहीं आ रही है तो उन्होंने स्वयं उसका उत्पादन शुरू कर दिया है। इससे काम बढ़ा है और कर्मचारियों की छंटनी की नौबत नहीं आ रही है। दवा उद्योग से जुड़े उद्यमी नवदीप चावला का कहना है कि चीन ने कुछ दवाओं के भाव इस दौरान कई गुणा बढ़ा दिए हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने भारतीय दवा कंपनियों को अलग से सहूलियतें देनी शुरू कर दी हैं।

जीएसटी के बाद अब बढ़ा है उत्पादन 

उद्यमी सजन जैन बताते हैं कि पहले अलग-अलग राज्यों में अलग टैक्स की दर होने से उन्हें वाटर पंप बनाकर बेचने में समस्या आती थी। जीएसटी लागू होने के बाद उनका व्यापार सभी राज्यों में फैलने लगा। अब जब चीन से पानी खींचने वाले पंप नहीं आ रहे हैं तो उनका उत्पादन दो गुणा हो गया है। वह बताते हैं कि फिलहाल चीन निíमत कोई भी वस्तु ग्राहक खरीदने को तैयार नहीं है। 

बढ़ने लगी भारतीय खिलौनों की चमक 

चीन से खिलौने लाकर भारतीय बाजार में बेचने वाले मुनेश कुमार का कहना है कि पहले ही चीन निर्मित खिलौनों पर ज्यादा कस्टम ड्यूटी लगाकर केंद्र सरकार ने हमारी राह आसान कर दी थी। अब चीन से बिगड़ते संबंधों के चलते ये संभावनाएं और प्रबल हो गई हैं। खिलौना विक्रेता फरीदाबाद और नोएडा में अपने नए कारखाने लगाने में भी जुट गए हैं। कुछ खिलौना उत्पादकों को नए अनुबंध भी मिलने लगे हैं जबकि पहले ये अनुबंध चीन के कारण नहीं मिलते थे। 

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