West Asia War के चलते भारत की खाद सब्सिडी बढ़कर पहुंचेगी 2.41 लाख करोड़? मौजूदा स्टॉक भी जान लें
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण भारत की उर्वरक सब्सिडी वित्त वर्ष 2026-27 तक 70,000 करोड़ रुपये बढ़कर 2.41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
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खाद सब्सिडी में तेज उछाल का अनुमान (AI Image)
HighLights
उर्वरक सब्सिडी 2.41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान।
पश्चिम एशिया तनाव से आयात लागत में वृद्धि की आशंका।
देश में उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक, वैकल्पिक मार्ग से आयात।
नई दिल्ली| इन दिनों वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव का असर भारत पर आर्थिक रूप से पड़ रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी कि पश्चिम एशिया संकट के कारण आयात लागत बढ़ने से वित्त वर्ष 2026-27 में देश का उर्वरक सब्सिडी खर्च करीब 70,000 करोड़ रुपये बढ़कर 2.41 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचने का अनुमान है।
कितनी बढ़ेगी खाद सब्सिडी?
उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन के बाद रिपोर्टर्स से बातचीत करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण सब्सिडी का खर्च बढ़ेगा लेकिन यह तय नहीं है कि वृद्धि कितने प्रतिशत होगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या उर्वरक सब्सिडी में बढ़ोतरी 70,000 करोड़ रुपये तक हो सकती है, तो उन्होंने इसकी संभावना से इनकार नहीं किया।
उन्होंने आगे कहा कि अगर ऐसा होता है तो वित्त वर्ष 2026-27 में कुल उर्वरक सब्सिडी 2.41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। जबकि इस साल के बजट में उर्वरक सब्सिडी के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। लागत संबंधी दबावों के बावजूद शर्मा ने कहा कि मौजूदा खरीफ सत्र के लिए उर्वरकों की उपलब्धता 'संतोषजनक' स्तर पर बनी हुई है।
भारत में कितना है उर्वरक का स्टॉक?
अपर्णा शर्मा ने बताया कि कुल 390 लाख टन उर्वरक की जरूरत के मुकाबले 51 प्रतिशत से अधिक स्टॉक उपलब्ध है, जबकि बाकी जरूरत आयात के जरिये पूरी की जा रही है। उन्होंने बताया कि देश में उर्वरकों का मौजूदा भंडार 200.9 लाख टन है। घरेलू उत्पादन लगभग 80,000 टन प्रतिदिन की दर से चल रहा है। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से अब तक उत्पादन 86.2 लाख टन रहा है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 93 लाख टन से थोड़ा कम है। उन्होंने कहा, “उर्वरक उत्पादन में कुछ कमी है, जिसे आने वाले महीनों में पूरा कर लिए जाने की हमें उम्मीद है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की जगह दूसरे रास्ते से आयात
यूरिया संयंत्रों के लिए गैस की आपूर्ति पर्याप्त है।’’ उर्वरक की आयात निर्भरता घटाने के मकसद से भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य की जगह वैकल्पिक मार्गों से आपूर्ति बढ़ाई है। अब तक 22 लाख टन से अधिक उर्वरक देश में आ चुके हैं। उर्वरक की खरीद के लिए गठजोड़ (consortium) बनाने की व्यवस्था के तहत देश ने लगभग 13.5 लाख टन डीएपी, सात लाख टन एनपीके कॉम्प्लेक्स तथा अमोनियम सल्फेट, फॉस्फेट और अन्य कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित की है।
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उर्वरक विभाग अन्य कच्चे माल की उपलब्धता की भी समीक्षा कर रहा है और सब्सिडी भुगतान एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली के जरिये साप्ताहिक आधार पर जारी किए जा रहे हैं। शर्मा ने कहा, “कुल मिलाकर उर्वरक के मामले में स्थिति मजबूत, स्थिर और संतोषजनक है।”
