यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 15, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
वॉलमार्ट से नहीं बदलने वाला भारतीय बाजार
दुनिया के सबसे बड़े मल्टी ब्रांड रिटेलर वॉलमार्ट के भारतीय बाजार में उतरने से पहले ही बवाल मचा हुआ है। ...और पढ़ें

वाशिंगटन। दुनिया के सबसे बड़े मल्टी ब्रांड रिटेलर वॉलमार्ट के भारतीय बाजार में उतरने से पहले ही बवाल मचा हुआ है। कारोबारियों की आशंकाओं के बीच वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि भारत के विशाल खुदरा बाजार में वॉलमार्ट की भूमिका एक कंपनी से ज्यादा कुछ नहीं होगी। वह भारत आए या न आए, देश पर कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला।
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चिदंबरम अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक की बैठक में हिस्सा लेने वाशिंगटन पहुंचे हैं। एक इंटरव्यू में भारती एंटरप्राइजेज और वॉलमार्ट समझौता टूटने पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि भारतीय रिटेल बाजार लाखों छोटी-छोटी दुकानों का समूह है। देश में कई घरेलू रिटेल चेन हैं। इनकी वजह से बाजार मजबूत हुआ है।
इसमें वॉलमार्ट की भूमिका बूंद के बराबर ही होगी। मानकर क्यों चलें कि वॉलमार्ट के आने से खुदरा बाजार में कोई बड़ा बदलाव आएगा या किसी को नुकसान पहुंचेगा। वॉलमार्ट अगर भारती से समझौता तोड़ रही है तो बाजार पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
भारती एवं अमेरिकी रिटेल दिग्गज के बीच 1997 में समझौता हुआ था। इसके चलते कैश एंड कैरी बेस्टप्राइस होलसेल स्टोर अस्तित्व में आया। दोनों ने इस साल 9 अक्टूबर को घोषणा की कि वे भारत में अपना कारोबार अलग कर रही हैं। खुदरा कारोबार में भारती के साथ उत्पादों का बिक्री समझौता आगे जारी नहीं रहेगा।
वॉलमार्ट भारत में मल्टी ब्रांड रिटेल कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) नियमों के तहत स्थानीय माल खरीदारी के नियमों में छूट दिए जाने पर जोर देती रही है। भारत सरकार ने इसमें किसी प्रकार की ढील देने से इन्कार कर दिया है। सरकार ने कहा कि विदेशी कंपनियों को भारतीय बाजार में 30 फीसद खरीदारी स्थानीय स्तर पर करने के नियम में छूट नहीं दी जाएगी।
