47 की उम्र छोड़ी ₹30000 की नौकरी, फरीदाबाद में टेंट शेड में शुरू की कंपनी; आज 37 देशों में फैला ₹9500 करोड़ का साम्राज्य
Vijay Agarwal Success Story: विजय अग्रवाल ने 47 साल की उम्र में ₹30,000 की नौकरी छोड़कर ₹15 लाख की बचत ...और पढ़ें
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क्रेन किंग विजय अग्रवाल की कहानी: ₹30 हजार की नौकरी छोड़ बनाया ₹9500 करोड़ का साम्राज्य
HighLights
47 की उम्र में छोड़ी नौकरी, ₹15 लाख से शुरू की कंपनी।
फरीदाबाद में टेंट शेड से शुरू कर, बने 'क्रेन किंग'।
ACE कंपनी का ₹9500 करोड़ का साम्राज्य, 37 देशों में निर्यात।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| Vijay Agarwal Success Story: आमतौर पर जब लोग 47 साल की उम्र में रिटायरमेंट और सुरक्षित भविष्य की योजनाएं बनाते हैं। तब विजय अग्रवाल ने अपनी 30,000 रुपए महीने की आरामदायक नौकरी को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।
जेब में बचत के ₹15 लाख की बचत और खुले आसमान के नीचे टेंट लगाकर एक ऐसा साम्राज्य खड़ा कर दिया, जिसने भारत को क्रेन निर्माण में आत्मनिर्भर बना दिया। आज विजय अग्रवाल भारत के 'क्रेन किंग' नाम (crane king of india) से भी मशहूर हैं।
आइए जानते हैं इनकी फर्श से अर्श तक की दिलचस्प कहानी।
फरीदाबाद के टेंट शेड से शुरू हुआ सफर
हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (ACE) कंपनी के फाउंडर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर विजय अग्रवाल (vijay agarwal ace) आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने भारत को क्रेन निर्माण के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई दी है।
करीब 30 साल पहले जब उन्होंने बिजनेस शुरू किया, तब उनकी उम्र 47 वर्ष थी। उस उम्र में जब लोग स्थिरता चाहते हैं, उन्होंने अपनी नौकरी छोड़कर बंजर जमीन पर टेंट लगाया।
उनके पास न बड़ी सुविधा थी और न पूंजी, बस मशीनों के प्रति गहरा प्रेम और अटूट आत्मविश्वास था। महीनों की कड़ी मेहनत के बाद जब लगभग 600 छोटे-बड़े पार्ट्स को जोड़कर पहली क्रेन तैयार हुई, तब ACE की नींव पड़ी।
विजय अग्रवाल गर्व से कहते हैं- "मैं सड़क के बीचों-बीच भी क्रेन बना सकता हूं।" यह उनके हुनर का पक्का विश्वास है।
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जीवनसंगिनी का साथ और बाजार की चुनौतियां
इस जोखिम भरे सफर में उनकी पत्नी मोना अग्रवाल उनकी सबसे बड़ी ताकत बनीं। जब वित्तीय संकट आया और परिवार की जिम्मेदारी सिर पर थी, तब मोना ने उनका हौसला बढ़ाया और कहा कि वह छह महीने तक पैसे नहीं मांगेंगी, बस वे अपना सपना पूरा करें।
इसके अलावा, जब ACE बाजार में उतरी, तो बड़ी कंपनियों ने कानूनी पचड़ों और दबाव से रोकने की कोशिश की, लेकिन वे डिगे नहीं। आज उनकी पत्नी और बेटे सोराब कंपनी के बोर्ड में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, और टाटा ग्रुप व एलएंडटी जैसी दिग्गज कंपनियां इनकी क्लाइंट हैं।
टावर क्रेन की क्रांति और ग्लोबल पहचान
एक समय था जब भारत को टावर क्रेन आयात करने पर करोड़ों खर्च करने पड़ते थे, लेकिन ACE ने आधे दाम पर देश में ही इनका निर्माण कर कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री की तस्वीर बदल दी।
आज ACE देश की सबसे बड़ी टावर क्रेन कंपनी है, और इसके उत्पाद दुनिया के 37 देशों में एक्सपोर्ट होते हैं। साथ ही, उन्होंने बैंकों को क्रेन ऑपरेटरों को लोन देने के लिए प्रेरित कर इस सेक्टर को और सुलभ बनाया।
₹9500 करोड़ के साम्राज्य के मालिक
शुरुआत महज 15 लाख रुपए से करने वाले विजय अग्रवाल आज लगभग ₹9,300 से ₹9,500 करोड़ (करीब 1 बिलियन डॉलर) की नेट वर्थ के मालिक (self made billionaire india) हैं।
उनकी कंपनी मोबाइल क्रेन, टावर क्रेन, लोडर्स और हार्वेस्टर बनाती है। उनकी यह सफलता साबित करती है कि पक्के इरादे से किसी भी बंजर जमीन पर इतिहास रचा जा सकता है।
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