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सिल्वर प्रोडक्शन गिरा, ऑयल एंड गैस सेक्टर फिसड्डी; अनिल अग्रवाल की वेदांता पर ₹49 हजार करोड़ का भारी कर्ज, 5 खुलासे!

Published: Wed, 23 Sep 2026 11:04 PM (IST)

Vedanta FY26 report: अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता की 61वीं सालाना रिपोर्ट (FY 2025-26) में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, ...और पढ़ें

अनिल अग्रवाल की वेदांता रिपोर्ट: चांदी उत्पादन में गिरावट, तेल-गैस सेक्टर फिसड्डी और ₹49 हजार करोड़ का कर्ज

अनिल अग्रवाल की वेदांता रिपोर्ट: चांदी उत्पादन में गिरावट, तेल-गैस सेक्टर फिसड्डी और ₹49 हजार करोड़ का कर्ज

HighLights

  1. चांदी उत्पादन में 9% की भारी गिरावट दर्ज की गई।

  2. ऑयल एंड गैस सेक्टर का प्रदर्शन 16% तक लुढ़का।

  3. कंपनी पर ₹49 हजार करोड़ का भारी शुद्ध कर्ज।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| देश और दुनिया भर के कमोडिटी बाजारों में इस साल चांदी की कीमतों में करीब 75 प्रतिशत तक की जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। निवेशकों और बाजार के जानकारों को उम्मीद थी कि इस शानदार बूम का फायदा उठाकर देश की दिग्गज माइनिंग कंपनी वेदांता (Anil Agarwal Vedanta) अपने उत्पादन में भारी इजाफा करेगी। लेकिन कंपनी की ओर से हाल ही में जारी की गई 61वीं सालाना रिपोर्ट (FY 2025-26) में एक बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच रहे भावों के बावजूद वेदांता की सब्सिडियरी हिंदुस्तान जिंक (HZL) का सालाना सेलएबल सिल्वर प्रोडक्शन 9 प्रतिशत गिरकर 627 टन पर सिमट गया है।

वेदांता डिमर्जर की प्रक्रिया पूरी

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब उद्योगपति अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) के नेतृत्व वाली वेदांता ने अपने कारोबार को पांच अलग-अलग 'प्योर प्ले' कंपनियों में डिमर्जर करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है और इसे वेदांता 2.0 का नाम दिया गया है। कंपनी भले ही अपने कुल फाइनेंशियल प्रदर्शन जैसे कि 15% की बढ़त के साथ 1,74,075 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड राजस्व (Revenue) और 29% की छलांग के साथ 55,976 करोड़ रुपए के भारी-भरकम एबिटडा (EBITDA) का ढिंढोरा पीट रही हो, लेकिन अंदरखाने कई बड़े निगेटिव पॉइंट्स भी उभर कर सामने आए हैं।

रिपोर्ट में क्या-क्या आया सामने?

1. सिल्वर प्रोडक्शन में भारी गिरावट: जहां एक तरफ बाजार में चांदी के दाम आसमान छू रहे थे, वहीं वेदांता का चांदी उत्पादन 9% घटकर 627 टन रह गया। हालांकि कंपनी का यह भी दावा है कि ऊंचे दामों के कारण इसी चांदी ने हिंदुस्तान जिंक के मुनाफे में 40% से ज्यादा का योगदान दिया है, लेकिन उत्पादन का घटना एक बड़ा झटका है।

2. ऑयल एंड गैस सेक्टर में फिसड्डी प्रदर्शन: कंपनी के केयर्न ऑयल एंड गैस (Cairn Oil & Gas) डिवीजन का औसत दैनिक उत्पादन प्राकृतिक क्षेत्र में गिरावट (Natural Field Decline) के कारण 16% लुढ़क कर 87.2 हजार बैरल प्रति दिन पर आ गया है।

3. गंभीर सुरक्षा और हादसे के दाग: कंपनी जीरो हार्म (Zero Harm) के लाख दावे करे, लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कार्यस्थल पर सुरक्षा में गंभीर चूक के चलते कुल 4 कर्मचारियों की जान चली गई। जबकि 350 से ज्यादा लोग घायल हैं। इसके अलावा कुल रिकॉर्ड करने योग्य चोट आवृत्ति दर (TRIFR) 1.30 दर्ज की गई है।

4. लीगल एंड रेगुलेटरी रिस्क: रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि केयर्न इंडिया के राजस्थान ब्लॉक की प्रॉडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (PSC) एक्सटेंशन की शर्तें कम अनुकूल हैं और मामला अभी भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में है। इसके अलावा, देश-विदेश में बढ़ते कड़े पर्यावरण, कार्बन टैक्स और कानूनी विवादों का भारी दबाव कंपनी की बैलेंस शीट पर बना हुआ है।

5. ऋण और वित्तीय दबाव: कंपनी भले ही नेट डेट/एबिटडा को 0.95x पर लाने का दावा कर रही हो, लेकिन समूह की होल्डिंग कंपनी वेदांता रिसोर्सेज (VRL) पर अभी भी 5.1 अरब डॉलर ( भारतीय करेंसी में करीब 48.93 हजार करोड़ रुपए) का भारी-भरकम शुद्ध कर्ज लटक रहा है।

वेदांता ने कितना रखा है टारगेट?

अनिल अग्रवाल के सपनों के प्रोजेक्ट वेदांता 2.0 के तहत कंपनी ने चालू वित्त वर्ष में 17,000 से 19,000 करोड़ रुपए तक के भारी ग्रोथ कैपेक्स (Growth Capex) का लक्ष्य रखा है।

लेकिन निवेशकों के जेहन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की इतनी बहार है, तब उत्पादन के मोर्चे पर वेदांता की यह सुस्ती कंपनी के भविष्य के लिए कितनी खतरनाक साबित होगी? आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी इन चुनौतियों से कैसे निपटती है।

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