अनिल अग्रवाल की वेदांता का बड़ा कमाल, पंजाब में पराली से पैदा कर डाली बिजली; इतने किसानों को सीधा फायदा!
Vedanta Power Biomass: वेदांता पावर के तलवंडी साबो प्लांट ने वित्त वर्ष 2026 में 3.29 लाख मीट्रिक टन से अधिक ...और पढ़ें
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अनिल अग्रवाल की वेदांता का बड़ा कमाल, पंजाब में पराली से पैदा कर डाली बिजली; इतने किसानों को सीधा फायदा!
HighLights
वेदांता ने 3.29 लाख टन पराली से बिजली पैदा की
पराली जलाने से होने वाला वायु प्रदूषण कम हुआ
3,800 किसानों को पराली बेचकर अतिरिक्त आय मिली
नई दिल्ली| उद्योगपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता पावर (Anil Agarwal Vedanta) ने पंजाब में प्रदूषण से निपटने और कचरे से कंचन बनाने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। कंपनी ने गुरुवार को जानकारी दी कि पंजाब के मानसा स्थित उसके तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (Vedanta TSPL Biomass 3.29 Lakh Ton) प्लांट ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में 3.29 लाख मीट्रिक टन से अधिक बायोमास (पराली) का इस्तेमाल कर बिजली पैदा की है।
प्रदूषण पर लगाम और रिकॉर्ड प्रदर्शन
वेदांता का यह कदम देश में हर साल पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण (Punjab Stubble Burning Solution) को रोकने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कंपनी के मुताबिक, TSPL प्लांट ने वित्त वर्ष 2026 में औसतन 5.16 प्रतिशत बायोमास को-फायरिंग (कोयले के साथ पराली मिलाना) की दर हासिल की है। यह आंकड़ा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा तय की गई अनिवार्य सीमा से भी कहीं अधिक है।
नियमों के अनुसार, दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में आने वाले थर्मल पावर प्लांट्स के लिए कोयले के साथ बायोमास जलाना अनिवार्य है ताकि उत्सर्जन ( Carbon Emission Reduction Vedanta) को कम किया जा सके।
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पर्यावरण और किसानों को डबल फायदा
वेदांता लिमिटेड (पावर) के सीईओ राजिंदर सिंह आहूजा ने इस मॉडल पर गर्व जताते हुए कहा,
सस्टेनेबिलिटी हमारे काम करने के तरीके में शामिल है। तलवंडी साबो प्लांट में हम बायोमास को एकीकृत करके स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रहे हैं और बड़े पैमाने पर भरोसेमंद बिजली की आपूर्ति भी सुनिश्चित कर रहे हैं।"
वेदांता के प्रोजेक्ट हैं कितने फायदा?
- कार्बन उत्सर्जन में कमी: 3.29 लाख टन बायोमास जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 0.40 मिलियन टन की कमी आई है।
- किसानों की आय: वेदांता ने मानसा क्षेत्र के करीब 3,800 किसानों को इस मुहिम (Vedanta Farmer Income Parali) से जोड़ा है। कंपनी ने अब तक 8 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा धान का भूसा (पराली) इकट्ठा किया है।
- नई सप्लाई चेन: खेत में पराली जलाने के बजाय, अब किसान इसे बेच रहे हैं, जिसे टॉरिफाइड बायोमास पेलेट्स में बदलकर ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
अनिल अग्रवाल की कंपनी का यह 'वेस्ट-टू-एनर्जी' मॉडल न केवल पंजाब को धुएं से मुक्ति दिलाने में मदद कर रहा है, बल्कि बिजली उत्पादन के लिए एक हरा-भरा और टिकाऊ रास्ता भी दिखा रहा है।
