दिल्ली से श्रीनगर का सफर सिर्फ ₹1948 में, वंदे भारत के चलते ही 2 दिन में फ्लाइट-बस-टैक्सी वालों के छूटे पसीने
वंदे भारत एक्सप्रेस ने दिल्ली से श्रीनगर तक का सफर मात्र ₹1948 में संभव बनाकर हवाई और सड़क यात्रा को ...और पढ़ें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। दिल्ली से कश्मीर की वादियों का सफर अब न सिर्फ सुहाना हो गया है, बल्कि आपकी जेब के लिए भी बेहद किफायती साबित हो रहा है। जम्मू-श्रीनगर रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) के शुरू होते ही यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। आलम यह है कि महंगे हवाई किराए और थकाऊ सड़क यात्रा को छोड़कर लोग तेजी से ट्रेन का रुख कर रहे हैं, जिससे एयरलाइंस से लेकर स्थानीय टैक्सी और बस ऑपरेटरों की नींद उड़ गई है।
कैसे दिल्ली से श्रीनगर तक का सफर मात्र ₹1948 में?
अगर आप नई दिल्ली से जम्मू जाने का प्लान कर रहे हैं, तो उदारहण के तौर पर 'New Delhi-Jammu Tawi Vande Bharat Exp (22477)' एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। आप इस ट्रेन टिकट की बुकिंग IRCTC वेबसाइट या ऐप से बुक कर सकते हैं। खाने (Catering) के साथ इसका किराया ₹1525 है। यदि आप टिकट बुक करते समय खाने का विकल्प हटा देते हैं, तो आपके ₹307 बचेंगे और नई दिल्ली से जम्मू तक का सफर मात्र ₹1,218 में पूरा हो जाएगा।
इसके बाद, जम्मू से श्रीनगर के लिए नई वंदे भारत ट्रेन का किराया लगभग ₹730 है। इस तरह, दिल्ली से श्रीनगर तक का आपका कुल खर्च सिर्फ ₹1,948 आएगा। हालांकि इसमें फ्लाइट के मुकाबले थोड़ा अधिक समय जरूर लगेगा, लेकिन ₹4000 से ₹6000 के हवाई किराए की तुलना में यह सौदा बेहद सस्ता और आरामदायक है।
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फ्लाइट और सड़क मार्ग को क्यों पछाड़ रही है वंदे भारत?
यात्रियों के ट्रेन की तरफ मुड़ने की सबसे बड़ी वजह किफायती किराया और कम समय में सुरक्षित सफर है। श्रीनगर रेलवे स्टेशन पर एक यात्री मोहम्मद अफजल मलिक ने बताया, "यह उड़ानों से सस्ता है और लंबे, खतरनाक पहाड़ी रास्तों के जोखिम से कहीं अधिक सुरक्षित और आरामदायक है।"
रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, 2 मई को ट्रेन के उद्घाटन के दिन ही करीब 3,925 यात्रियों ने सफर किया। वहीं, दूसरे दिन (3 मई) यह आंकड़ा 5,000 के पार पहुंच गया। महज 5 घंटे से कम समय में जम्मू से श्रीनगर पहुंचने की सुविधा इसे लोगों की पहली पसंद बना रही है।
टैक्सी और बस ऑपरेटरों की क्यों बढ़ गई हैं धड़कनें?
यात्रियों के इस बड़े बदलाव का सीधा असर स्थानीय ट्रांसपोर्टरों पर पड़ रहा है। 'ऑल जम्मू एंड कश्मीर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन' के महासचिव शेख मोहम्मद यूसुफ का कहना है कि केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 70,000 कैब चलती हैं। अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो कैब और बस चालकों की रोजी-रोटी पर भारी असर पड़ेगा।
यूसुफ ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा, "हम रेल परिवहन के खिलाफ नहीं हैं और प्रीमियम वंदे भारत एक्सप्रेस का स्वागत करते हैं, लेकिन सरकार को उन हजारों कैब और अन्य चालकों के हितों की रक्षा के लिए एक नीति बनानी चाहिए जो पूरी तरह से जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्भर हैं।"
क्या आगे भी बरकरार रहेगा ट्रेन यात्रा का यह क्रेज?
लंबे समय से पीक सीजन के दौरान इस रूट पर एयरलाइंस का ही दबदबा रहा है, लेकिन एक तेज और सस्ती रेल सेवा ने इस समीकरण को बदल दिया है। हालांकि, उद्योग के जानकारों का मानना है कि वर्तमान में यह भारी भीड़ शुरुआती उत्साह और महंगे हवाई किराए का नतीजा भी हो सकती है।
एक ट्रांसपोर्टर के मुताबिक, "भविष्य में यह ट्रेंड इस बात पर निर्भर करेगा कि मांग बढ़ने पर ट्रेन अपनी समयबद्धता, टिकट की उपलब्धता और सेवा की गुणवत्ता को कितना बनाए रख पाती है।" फिर भी, शुरुआती रुझानों ने यह साफ कर दिया है कि वंदे भारत सिर्फ फ्लाइट का विकल्प नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण रूट पर परिवहन के अर्थशास्त्र को पूरी तरह से बदल रही है।
