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ये कंपनी है भारत की सबसे बड़ी चाय उत्पादक, 157 साल से पी रहे हैं सब पर नाम नहीं जानते!

Published: Mon, 04 May 2026 03:49 PM (IST)Updated: Fri, 08 May 2026 07:38 AM (IST)

McLeod Russel, 1869 में कोलकाता से शुरू हुई भारत की 157 साल पुरानी सबसे बड़ी चाय कंपनी है, जिसने असम ...और पढ़ें

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HighLights

  1. मैकलॉड रसेल 1869 में कोलकाता में स्थापित हुई।

  2. बी.एम. खेतान ने बनाया विश्व का सबसे बड़ा चाय उत्पादक।

  3. कंपनी अब सीधे ग्राहकों तक अपने प्रीमियम ब्रांड्स पहुंचा रही है।

नई दिल्ली। चाय भारत में सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि एक अहसास है। जब भी पुरानी और बड़ी कंपनियों की बात आती है, तो जुबां पर टाटा या गोयनका का नाम आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पश्चिम बंगाल की मिट्टी से उपजी एक ऐसी कंपनी भी है, जिसका इतिहास टाटा ग्रुप की स्थापना वर्ष 1868 के ठीक एक साल बाद यानी 1869 में शुरू हुआ था। हम बात कर रहे हैं McLeod Russel की, जिसने कोलकाता से शुरू होकर असम के बागानों तक अपनी सल्तनत खड़ी की।

क्या है 157 साल पुरानी इस कंपनी का गौरवशाली इतिहास?

इस कहानी की शुरुआत 1869 में हुई, जब दो अंग्रेज कैप्टन जे.एच. विलियमसन और रिचर्ड बॉयकोट मैगर ने कोलकाता में हाथ मिलाया। उन्होंने 'विलियमसन मैगर एंड कंपनी' नाम से एक पार्टनरशिप फर्म बनाई। इनका मुख्य काम असम के चाय बागानों की जरूरतों को पूरा करना था। वक्त बदला और 1894 में कंपनी का दफ्तर कोलकाता के प्रसिद्ध '4 मैंगो लेन' (Hampton Court) में शिफ्ट हो गया, जो आज भी इनकी विरासत का गवाह है।

बी.एम. खेतान: कंपनी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले!

कंपनी के इतिहास में साल 1964 एक मील का पत्थर साबित हुआ। बृज मोहन खेतान (B.M. Khaitan), जो पहले कंपनी को पैकेजिंग और खाद सप्लाई करते थे, 1963 में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हुए। 1964 में उन्होंने मैनेजिंग डायरेक्टर की कमान संभाली और McLeod Russel को दुनिया का सबसे बड़ा चाय उत्पादक बनाने की दिशा में मोड़ दिया। उनके लिए चाय सिर्फ एक कमोडिटी नहीं, बल्कि भावनाओं और मूल्यों से जुड़ी एक विरासत थी। असम के बिश्वनाथ क्षेत्र में स्थित 'मोनाबारी टी एस्टेट' (Monabarie Tea Estate) इनका चाय का बागान है। ये बागान 1373 हेक्टेयर में फैला हुआ है, जो अकेले ही हर साल 30 लाख किलो से ज्यादा चाय का उत्पादन करता है। यह विशाल साम्राज्य इसी 157 साल पुरानी विरासत का हिस्सा है।

कौन है 'बिजली प्रसाद' और कंपनी से क्या है इसका नाता?

कंपनी की विरासत सिर्फ चाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और जीवों के प्रति सम्मान भी दिखाती है। शुरुआती दौर में जंगलों को साफ करने में हाथियों ने बड़ी भूमिका निभाई थी। इसी सम्मान में कंपनी ने 'बिजली प्रसाद' नामक हाथी को अपना मस्कट बनाया। बिजली प्रसाद 'बेहाली टी एस्टेट' में वह एशिया का सबसे उम्रदराज जीवित हाथी माना गया। 21 अगस्त 2023 को लगभग 89 वर्ष की आयु में वृद्धावस्था संबंधी जटिलताओं के कारण इसका निधन हो गया।

आप सालों से इनकी चाय पी रहे हैं, फिर भी नाम से अनजान क्यों?

यह सबसे हैरान करने वाली बात है। McLeod Russel भारत की सबसे बड़ी चाय उत्पादक कंपनी होने के बावजूद दशकों तक पर्दे के पीछे रही। दरअसल, यह कंपनी थोक में चाय का उत्पादन करती थी, जिसे दुनिया भर के बड़े ब्रांड्स अपने नाम से बेचते थे। यानी आपके किचन में मौजूद डिब्बे पर नाम चाहे किसी का भी हो, उसके अंदर की चाय इसी 157 साल पुरानी कंपनी के बागानों से आई हो सकती है।

क्या है कंपनी का नया प्लान?

दशकों तक 'थर्ड पार्टी' के रूप में काम करने के बाद, अब यह कंपनी सीधे ग्राहकों तक पहुंच रही है। कंपनी ने अब बिचौलियों को हटाकर अपने प्रीमियम ब्लेंड्स को सीधे मार्केट में उतारने का फैसला किया है। 'इटखोली' और 'फुलबारी' जैसे सिग्नेचर एस्टेट्स की चाय आ गई है।

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