India-US Trade Deal इस साल के अंत से होगी लागू? USIBC के प्रेसिडेंट ने बताई 20 सालों की सबसे बड़ी उपलब्धि
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर USIBC के अध्यक्ष अतुल केशप ने 2026 के अंत तक इसे ...और पढ़ें

भारत अमेरिका ट्रेड डील इस साल केअंत तक हो सकती है लागू
HighLights
USIBC ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौता 2026 तक पूरा करने का आग्रह किया।
अतुल केशप ने इसे 20 सालों की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।
समझौते में देरी से उद्योग में निवेश की अनिश्चितता बढ़ रही है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अंतिम पायदान पर पहुंचकर भी अटका हुआ है। इसी वजह से उद्योग जगत में इंतजार की बेचैनी बढ़ गई है। US-इंडिया बिजनेस काउंसिल (USIBC) के अध्यक्ष अतुल केशप ने दोनों सरकारों से साफ कहा है कि कोशिश और तेज की जाए जिससे 2026 खत्म होने से पहले पारस्परिक व्यापार समझौता पूरा कर लिया जाए।
20 सालों का सबसे बड़ा फैसला
केशप का तर्क है कि दोनों देशों ने पिछले 20 सालों में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। लेकिन अगर यह सौदा साल के अंत तक हो गया, तो वह अब तक की सबसे बड़ी सफलता माना जाएगा। उनके मुताबिक समझौते का मकसद व्यापार की रुकावटें घटाना, शुल्क कम रखना और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को साफ नियम देना होना चाहिए। जब तक टैरिफ और बाजार पहुंच तय नहीं होते, कंपनियां निवेश, निर्यात ऑर्डर, सप्लाई चेन और फैक्ट्री विस्तार को पूरा भरोसा नहीं दे पातीं।
देरी की वजह से रोडमैप क्लियर नहीं
अतुल ने आगे कहा कि आपसी व्यापार खुलने से 2026 में आए बड़े निवेश और मजबूत होंगे। इससे मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगा, नए खरीदार बाजार खुलेंगे और भारत व अमेरिका AI में आगे बढ़ सकेंगे। इसका फायदा कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, कामकाजी परिवारों तक भी पहुंचेगा।
USIBC उन अमेरिकी और भारतीय कंपनियों का संगठन है जो दोनों देशों में भारी निवेश करती हैं। केशप ने कहा कि ये सदस्य इस रिश्ते के पक्ष में हैं और सरकारों के साथ मिलकर सहयोग तेज करना चाहते हैं। उद्योग जगत की बेचैनी इसलिए भी बढ़ी है कि इस देरी की वजह से दोनों तरफ की कंपनियां आगे की रणनीति को अंतिम रूप नहीं दे पा रही।
ई-कामर्स, इलेक्ट्रोनिक्स, फार्मा सेक्टर की कंपनियों के बीच आगे की रणनीति पर फैसला हो चुका है लेकिन जब तक दोनों तरफ से सरकारों की तरफ से अंतिम घोषणा ना हो, वो योजना को लागू नहीं करना चाहती।
देरी होने से नए इन्वेस्टमेंट पर संशय
बता दें कि फरवरी 2026 में अंतरिम समझौते की रूपरेखा आ चुकी थी। उसके बाद शुल्क दर, बाजार में बढ़त और पहुंच जैसे अंतिम बिंदुओं पर सहमति नहीं बनने की खबर है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल में यही संकेत दिया कि ड्राफ्ट लगभग तैयार है, लेकिन भारत उसे तभी लागू करना चाहेगा जब अमेरिकी बाजार में वियतनाम, थाईलैंड और अन्य प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बराबरी का फायदा मिले।
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उद्योग का आकलन है कि समय जितना खिंचेगा, बड़े प्रोजेक्ट्स और नए इन्वेस्टमेंट पर संशय उतना ही बना रहेगा। खासकर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, उपभोक्ता सामान और नई तकनीक में कंपनियां स्पष्ट पॉलिसी चाहती हैं। USIBC का संदेश यही है कि समय पर समझौता हुआ तो वह कागजी करार नहीं, आर्थिक भरोसे का बड़ा संकेत बनेगा। अगर बात और लंबी खिंच गई, तो इस साल बने निवेश के माहौल का पूरा लाभ हाथ से निकल सकता है।
