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TCS, Wipro, इन्फोसिस जैसी दिग्गज भारतीय IT कंपनियों को बड़ा झटका! ट्रंप ने US लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम किया सस्पेंड

Published: Thu, 08 Oct 2026 09:11 PM (GMT+05:30)

अमेरिका ने H-1B वीजा और विदेशी कर्मचारियों के नियमों के कथित दुरुपयोग के आरोप में कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, कैपजेमिनी ...और पढ़ें

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HighLights

  1. अमेरिका ने भारतीय IT कंपनियों को PERM प्रोग्राम से निलंबित किया।

  2. H-1B वीजा और विदेशी कर्मचारियों के दुरुपयोग का आरोप।

  3. माइक्रोसॉफ्ट पर अमेरिकी कर्मचारियों को निकालने का आरोप भी।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत की IT कंपनियों को बड़ा झटका देने वाली खबर अमेरिका से आई है। ट्रंप प्रशासन ने US इमिग्रेशन सिस्टम पर अपनी सख्ती बढ़ा दी है। H-1B वीजा और विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के नियमों के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बीच, प्रशासन ने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, कैपजेमिनी और HCL जैसी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' (PERM) प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है।

US के वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर आरोप लगाया कि कंपनी ने हजारों अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जबकि हजारों H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड का फायदा भी उठाया। प्रशासन ने वीजा से जुड़े प्रोग्राम्स के गलत इस्तेमाल के आरोपों को लेकर नौ यूनिवर्सिटीज की भी जांच शुरू की है, जिससे US में विदेशी कर्मचारियों और इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए अनिश्चितता बढ़ गई है।

PERM प्रोग्राम से माइक्रोसॉफ्ट को सस्पेंड करने की घोषणा करते हुए वेंस ने कहा कि कंपनी ने 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जबकि 6,300 H-1B वीजा और लगभग 3,000 ग्रीन कार्ड का फायदा उठाया।

व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेंस ने कहा, "अगर आप हिसाब लगाएं, तो माइक्रोसॉफ्ट ने जिस भी कर्मचारी को नौकरी से निकाला, उसकी जगह डेढ़ विदेशी 'बंधुआ मजदूर' (indentured servants) को रख लिया।"

वेंस ने कंपनियों पर अमेरिकी कर्मचारियों की सैलरी कम करने के लिए विदेशी कर्मचारियों का इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, "यह अमेरिकी कर्मचारी और अमेरिकी जीवनशैली का बहुत बड़ा अपमान है। हम ऐसे वीजा प्रोग्राम्स का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की सैलरी कम करने के लिए नहीं होने दे सकते, जिन्हें इसलिए बनाया गया था ताकि अमेरिकी कंपनियों को सबसे अच्छे और काबिल लोग मिल सकें।"

PERM प्रोग्राम क्या है?

'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' प्रोग्राम, या PERM, लेबर डिपार्टमेंट की एक प्रक्रिया है जो US के एम्प्लॉयर्स (नियोक्ताओं) को विदेशी कर्मचारियों को स्थायी रूप से नौकरी पर रखने के लिए सर्टिफिकेशन पाने की इजाजत देती है।

इस प्रक्रिया के तहत, एम्प्लॉयर्स को आम तौर पर यह साबित करना होता है कि नौकरी के लिए पर्याप्त संख्या में काबिल, इच्छुक, योग्य और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी नहीं हैं, और विदेशी कर्मचारी को नौकरी पर रखने से उसी तरह का काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों की सैलरी और काम की स्थितियों पर बुरा असर नहीं पड़ेगा।

एक बार लेबर डिपार्टमेंट से लेबर सर्टिफिकेशन मंज़ूर हो जाने के बाद, एम्प्लॉयर US सिटिज़नशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़ के पास इमिग्रेंट पिटीशन (आमतौर पर फॉर्म I-140 के ज़रिए) दाखिल कर सकता है। इसलिए, H-1B वर्करों के लिए PERM, नौकरी पर आधारित ग्रीन कार्ड प्रोसेस में एक अहम कदम हो सकता है। किसी कंपनी के लिए इस प्रोग्राम का एक्सेस सस्पेंड होने से, कंपनी का योग्य विदेशी वर्करों को परमानेंट रेजिडेंस के लिए स्पॉन्सर करना मुश्किल हो सकता है।

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