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अमेरिका की हरकत से भारत के 1.63 अरब डॉलर के कारोबार पर चोट, ईरान के बाजार तक पहुंच हुई मुश्किल!

Published: Tue, 25 Aug 2026 01:27 PM (GMT+05:30)

अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंधों से भारत-ईरान का 1.63 अरब डॉलर का व्यापार प्रभावित होगा, खासकर चावल, ...और पढ़ें

अमेरिका ने ईरान पर लगाए  "आर्थिक डी-डे" प्रतिबंध (AI Image)

अमेरिका ने ईरान पर लगाए  "आर्थिक डी-डे" प्रतिबंध (AI Image)

HighLights

  1. अमेरिका के प्रतिबंधों से भारत-ईरान व्यापार पर गंभीर असर।

  2. भारतीय चावल, चाय, दवाइयों के निर्यात को बड़ा झटका।

  3. UAE की मध्यस्थता खत्म, तुर्की से माल ढुलाई महंगी।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ लगाए गए "आर्थिक डी-डे" प्रतिबंधों के कारण ईरान एक बार फिर आर्थिक और व्यापारिक संकट की चपेट में बुरी तरह आ सकता है, लेकिन भारत को भी इसका तगड़ा असर देखने को मिलेगा। भारतीय निर्यातकों ने बताया कि ईरान पर अमेरिका द्वारा प्लान के तहत लगाए जाने वाले नए प्रतिबंध और UAE द्वारा तेहरान के साथ व्यापार पर रोक से ईरान को होने वाले चावल, चाय और दवाइयों के भारतीय निर्यात में गंभीर बाधा आ सकती है।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 25 अगस्त, 2026 तक 2025-26 में ईरान के साथ भारत का व्यापार 1.63 अरब डॉलर था। कुल व्यापार में भारतीय निर्यात का हिस्सा 1.26 अरब डॉलर था।

भारत-ईरान व्यापार में UAE का था रोल

भारत अब तक ईरान के साथ पेमेंट से जुड़े कामों के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को मेडिएटर के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। इस व्यवस्था के तहत, UAE ईरान से भुगतान कलेक्ट करता था और उसे भारतीय निर्यातकों को हैंडओवर करता था, साथ ही दूसरी दिशा में लेन-देन को आसान बनाता था। अब अमेरिका ने इस व्यवस्था पर "आर्थिक डी-डे" लगाकर शिपिंग और बैंकिंग पर बुरा असर डाला है।

भारतीय बासमती के व्यापार पर तगड़ी चोट

अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंध के चलते भारतीय बासमती के कारोबार को बड़ा झटका लगने का अनुमान है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने मीडिया को बताया कि 2026 की पहली छमाही में, भारत ने ईरान को 383.11 मिलियन डॉलर मूल्य का चावल निर्यात किया - जो कि प्रीमियम चावल, जिसमें लंबे दाने वाली बासमती भी शामिल है, के लिए दूसरा सबसे बड़ा विदेशी बाजार है।

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रिपोर्ट्स से पता चलता है कि साल 2025-26 में ईरान को 810.08 मिलियन डॉलर मूल्य का चावल निर्यात किया गया था।

माल ढुलाई का बढ़ेगा खर्च

"आर्थिक डी-डे" लगाए जाने के बाद भारत अब ईरान तक माल पहुंचाने के लिए नए मेडिएटर के लिए तुर्की को विकल्प के रूप में देख रहा है। हालांकि इस तरह की व्यवस्था के लिए उसके सहयोग की आवश्यकता होगी और इससे अतिरिक्त लॉजिस्टिक और कंप्लाएंस संबंधी चुनौतियां उत्पन्न होंगी। मीडिया रिपोर्स के मुताबिक तुर्की को बॉर्डर क्रॉसिंग प्वाइंट के रूप में उपयोग करने से यात्रा का समय तीन से चार गुना बढ़ सकता है और माल ढुलाई लागत में भारी-भरकम बढ़ोतरी हो सकती है। माल को ईरान तक सड़क मार्ग से ले जाने से पहले लाल सागर से होते हुए तुर्की जाना पड़ सकता है, जिससे लागत और रिस्क दोनों बढ़ जाते हैं।