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US Fed Policy: रात 11:30 बजे ब्याज दरों पर बड़ा एलान संभव, सोना-चांदी और शेयर पर क्या होगा असर? एक्सपर्ट से समझें

Published: Wed, 16 Sep 2026 06:53 PM (IST)

16 सितंबर को देर रात 11:30 बजे यूएस फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी की घोषणा कर सकता है, जिसका ...और पढ़ें

यूएस फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श

यूएस फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श

HighLights

  1. यूएस फेडरल रिजर्व 16 सितंबर देर रात जारी करेगी पॉलिसी।

  2. चेयरमैन केविन वार्श ब्याज दरों में कर सकते हैं बढ़ोतरी।

  3. ब्याज दर से ज्यादा फोकस यूएस फेड के गाइडेंस पर होगा- एक्सपर्ट

नई दिल्ली। भारत समेत दुनिया के तमाम ग्लोबल बाजारों की नजर आज देर रात आने वाली यूएस फेड पॉलिसी पर है, जिसमें यूएस फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श, पॉलिसी अनाउंसमेंट करेंगे। यह पॉलिसी दुनिया के तमाम सेंट्रल बैंक की नीतियों और शेयर बाजारों को प्रभावित करेगी। ऐसी संभावनाएं जताई जा रही है कि US फ़ेडरल रिज़र्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी का एलान कर सकता है, और जुलाई 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी होगी। रॉयटर्स के सर्वे में शामिल ज़्यादातर अर्थशास्त्रियों का यह भी मानना है कि मार्च के आखिर तक कम से कम एक और बढ़ोतरी हो सकती है।

US फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने से डॉलर मज़बूत हो सकता है, भारतीय रुपये पर दबाव पड़ सकता है, बॉन्ड यील्ड बढ़ सकती है और सोना-चांदी की कीमतों व शेयर बाज़ार में कुछ समय के लिए उतार-चढ़ाव आ सकता है। यूएस फेड पॉलिसी को लेकर एक्सपर्ट की अपनी राय है।

'ब्याज दर से ज्यादा गाइडेंस पर फोकस'

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में एनरिच मनी के फाउंडर और CEO पोनमुडी आर ने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी से ज़्यादा फोकस फेड के 'फॉरवर्ड गाइडेंस' पर रहेगा। क्योंकि रेट हाइक का असर बाजार पहले ही दिखा चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय बाज़ार रेट हाइक को तो झेल सकते हैं, लेकिन फेड आगे क्या कदम उठाएगा, इसे लेकर अनिश्चितता को झेलना बाज़ार के लिए मुश्किल हो सकता है।

पोन्नमुडी ने कहा, "25-bps की बढ़ोतरी अपने आप में शायद सबसे बड़ी चिंता की बात न हो, क्योंकि इस कदम का एक बड़ा हिस्सा पहले ही बाजार में शामिल किया जा चुका है। भारतीय बाजारों के लिए असली संकेत फेड के भविष्य के संकेतों (फॉरवर्ड गाइडेंस) और घोषणा के बाद US ट्रेजरी यील्ड की दिशा से मिलेगा।"

महंगाई सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर

उन्होंने कहा, "अगर फेड यह संकेत देता है कि महंगाई का जोखिम बना हुआ है और ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकती है, तो अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने और डॉलर के मजबूत होने से ग्लोबल कैपिटल 'रिस्क-ऑफ' मोड में रह सकता है। भारत के लिए, इसका मतलब FII की बिकवाली का दबाव बने रहना, रुपये का कमजोर होना और वैल्यूएशन में कमी आना हो सकता है, खासकर हाई-बीटा और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सेक्टर में।"

Nifty में टूटा 2300 का लेवल, फिर क्या...?

"मार्केट के नज़रिए से, निफ़्टी के लिए 23,000 का स्तर एक अहम साइकोलॉजिकल और टेक्निकल ज़ोन है। उन्होंने कहा कि अगर यह स्तर बना रहता है, तो निफ़्टी में 23,200-23,400 तक रिकवरी की गुंजाइश बन सकती है, जबकि 23,000 के नीचे लगातार बने रहने से रिस्क-ऑफ़ सेलिंग का एक और दौर शुरू हो सकता है।

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फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के जैक्सन होल भाषण के बाद मज़बूत आर्थिक डेटा सामने आया है। उनके भाषण को 'हॉकिश' (सख्त रुख वाला) माना गया था, जिससे सख्त पॉलिसी की उम्मीदें और बढ़ गई हैं