यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में फिर बदलाव, किसानों पर क्या असर होगा? DAP और फॉस्फोरिक एसिड की कीमतें अभी भी हाई!
यूरिया के आयात मूल्य में बड़ी गिरावट आई है, जिससे सरकार के उर्वरक सब्सिडी बिल पर दबाव कम होने की ...और पढ़ें

उर्वरकों की कीमत में फिर बदलाव
HighLights
यूरिया का आयात मूल्य घटकर $392 प्रति टन हुआ।
डीएपी और सल्फर की कीमतें अभी भी उच्च स्तर पर।
किसानों को सब्सिडी के कारण उर्वरकों पर असर नहीं।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत दुनिया के बड़े उर्वरक आयातक देशों में शामिल है। इसलिए इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत बहुत मायने रखती है। सितंबर में यूरिया का आयात मूल्य घटकर 392 डॉलर प्रति टन पर आ गया। यह जून 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है और इस साल मई में दर्ज 947 डॉलर प्रति टन के उच्चतम स्तर से करीब 59 प्रतिशत कम है। इससे सरकार के उर्वरक सब्सिडी बिल पर दबाव कम होने की उम्मीद है, जो मिडिल ईस्ट संकट के बीच तेजी से बढ़ने का अनुमान था।
हालांकि, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP), म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP) और सल्फर की हाई कीमतों के कारण फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में उर्वरक सब्सिडी का खर्च बजट में आवंटित ₹2.17 लाख करोड़ से ₹20,000-₹25,000 करोड़ अधिक रहने की आशंका है। फिर भी यह सरकार के उन आंतरिक अनुमानों से काफी कम है, जो अप्रैल-मई में सप्लाई में बड़े व्यवधानों के दौरान लगाए गए थे। उस समय उर्वरक सब्सिडी का बिल करीब ₹3 लाख करोड़ रहने का अनुमान था।
किसानों पर कैसा रहेगा असर?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) का आयात मूल्य जून में दर्ज 933 डॉलर प्रति टन के उच्चतम स्तर से केवल करीब 3% घटकर 906 डॉलर प्रति टन रह गया। वहीं, सल्फर की कीमतें 1,000 डॉलर प्रति टन से ऊपर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। पिछले साल की तुलना में इनमें 200 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, इसका किसानों पर असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि उन्हें ये उर्वरक सब्सिडी वाली दरों पर मिलते रहेंगे।
चीन के निर्यात से हुई आसानी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम होने और भारत की ओर से इंपोर्ट के सोर्स बढ़ाने के कारण यूरिया के इंपोर्ट रेट में तेज गिरावट आई है। इसकी एक प्रमुख वजह चीन का यूरिया निर्यात फिर से शुरू करना है, जिससे विक्रेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। TOI की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक हाल ही में जारी ग्लोबल टेंडर को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।
उद्योग से जुड़े एक व्यक्ति ने मीडिया को बताया कि हमें निकट भविष्य में यूरिया की कीमतें बढ़ने की आशंका नहीं है और आगामी रबी सीजन के लिए भारत के पास उर्वरक का पर्याप्त भंडार है।
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केवल कुछ देशों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्किये और नीदरलैंड सहित कई देशों से यूरिया का आयात बढ़ाने के लिए अपने सोर्सेज बढ़ाए हैं।
अभी भी बनी है उर्वरकों की महंगाई
DAP के मामले में आयात मूल्य मई में 933 डॉलर प्रति टन के उच्चतम स्तर से मामूली गिरावट के साथ सितंबर में 906 डॉलर प्रति टन रह गया। हालांकि, यह एक साल पहले की तुलना में अब भी अधिक है। सल्फर की कमी, फॉस्फोरिक एसिड की बढ़ती लागत और सप्लाई से जुड़ी समस्याओं के कारण फॉस्फेट आधारित उर्वरकों का उत्पादन महंगा बना हुआ है।
सल्फर के इंपोर्ट रेट में तेजी का प्रमुख कारण वेस्ट एशिया का संघर्ष है, जिसने दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक क्षेत्र से होने वाली सप्लाई को बाधित कर दिया है। इसके अलावा, रूस के ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने भी सल्फर की उपलब्धता को और सीमित कर दिया है।
