UPI पर MDR चार्ज के बीच अगर वापस लौटा Cash का दौर, तो क्या हांफ सकता है हमारा सुस्त ATM नेटवर्क?
15 अक्टूबर 2026 से ₹2000 से ऊपर के P2M UPI पेमेंट्स पर 0.4% MDR चार्ज लगने से यह बहस छिड़ गई है कि क्या लोग वापस कैश की ओर लौटेंगे।
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कैश की बढ़ेगी डिमांड?
HighLights
UPI MDR चार्ज से कैश की ओर लौटने की आशंका बढ़ी।
देश का ATM नेटवर्क सुस्त, माइक्रो ATM की संख्या घटी।
बाजार में कैश बढ़ा, लेकिन ATM से निकासी में कमी आई।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: 15 अक्टूबर 2026 से ₹2000 से ऊपर के चुनिंदा P2M UPI पेमेंट्स पर 0.4% MDR चार्ज लगने जा रहा है। हालांकि यह चार्ज मर्चेंट्स पर लगेगा, लेकिन इसके कारण बाजार में एक नई और गंभीर बहस छिड़ गई है। अगर इस अतिरिक्त चार्ज से बचने के लिए मर्चेंट या ग्राहक वापस कैश (Cash) की ओर लौटते हैं, तो क्या देश का मौजूदा ATM इंफ्रास्ट्रक्चर उस मांग को संभालने के लिए तैयार है?
UPI की बंपर ग्रोथ vs सुस्त ATM नेटवर्क
पिछले 7 सालों में भारत के पेमेंट सिस्टम का ढांचा पूरी तरह बदल गया है। दोनों नेटवर्क की ग्रोथ में जमीन-आसमान का अंतर है। मार्च 2018 से 2025 के बीच देश में ATM की संख्या सिर्फ 13% बढ़कर 2.3 लाख से लगभग 2.6 लाख तक पहुंच पाई है। वहीं इसके उलट, इसी अवधि में UPI QR कोड की संख्या 1500% की तूफानी छलांग के साथ 4.1 करोड़ से बढ़कर 65.8 करोड़ के पार जा चुकी है।
₹37 लाख करोड़ के पास कैश
हैरानी की बात यह है कि डिजिटल पेमेंट्स के इतने हावी होने के बावजूद सिस्टम में कैश कम नहीं हुआ है। RBI के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 तक बाजार में कुल करेंसी (Currency in Circulation) ₹37.20 लाख करोड़ के पार जा चुकी है, जो पिछले साल के मुकाबले 6.5% ज्यादा है। लेकिन इसके बावजूद ATM से कैश निकालने के ट्रेंड में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
आंकड़ों की माने तो फरवरी 2024 में ATM से करीब ₹2.57 लाख करोड़ निकाले गए थे, जो फरवरी 2025 में 8.4% घटकर ₹2.36 लाख करोड़ रह गए। इसके अलावा, देश में माइक्रो ATMs (Micro ATMs) की संख्या में भी 16.4% की गिरावट (17.55 लाख से घटकर 14.68 लाख) देखने को मिली है।
आंकड़े साफ गवाही दे रहे हैं कि पिछले एक साल में देश का ATM नेटवर्क लगभग 'जीरो ग्रोथ' पर खड़ा है और माइक्रो ATM की संख्या भी घटी है। ऐसे में MDR के बाद असली चिंता यह नहीं है कि लोग कैश का इस्तेमाल करेंगे या नहीं, बल्कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कैश की डिमांड बढ़ती है, तो वह कैश किस रास्ते से आएगा? और क्या मौजूदा सुस्त ATM नेटवर्क उस भारी डिमांड को बिना किसी दबाव के संभाल पाएगा?
