Tariff पर ट्रंप का फिर से यू-टर्न, रूस से तेल खरीदने पर भारत-चीन पर नहीं लगेगा 100% टैरिफ; आखिर क्यों पलटा US
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने की योजना से राहत ...और पढ़ें

ट्रंप ने रूस तेल खरीदारों पर टैरिफ से राहत दी।
HighLights
ट्रंप ने रूस तेल खरीदारों पर टैरिफ से राहत दी।
भारत और चीन को 100% टैरिफ से बड़ी छूट मिली।
यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रीय हित में लिया गया।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान से सबसे ज्यादा तेल या गैस खरीदने वाले 5 देशों पर 100% टैरिफ (Trump Tariff) लगाने की योजना में फिलहाल राहत देने का फैसला किया है। ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश जारी कर उन कई प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट देने की घोषणा की, जिन्हें लागू करने की समयसीमा नजदीक थी। इस फैसले से भारत और चीन जैसे देशों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदते हैं।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका रूस पर दबाव बढ़ाने और यूक्रेन युद्ध को लेकर अपनी रणनीति पर चर्चा कर रहा है। ट्रंप के इस कदम से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी व्यापारिक कार्रवाई को लेकर नई स्थिति पैदा हो गई है।
क्या था ट्रंप का 100% टैरिफ लगाने का प्लान?
ट्रंप ने सितंबर 2026 के मध्य में लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026 पर हस्ताक्षर किए थे। इस कानून के तहत रूस से तेल या गैस खरीदने वाले देशों पर कड़े आर्थिक कदम उठाने का प्रावधान था।
इस प्रस्ताव के मुताबिक, रूस से कच्चे तेल या गैस के पांच सबसे बड़े आयातक देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इसके अलावा, कानून लागू होने के बाद भी रूस से तेल या गैस खरीदने वाले देशों को निशाना बनाने का प्रावधान था। रूस पर लगे प्रतिबंधों से बचने में उसकी मदद करने वाले देशों पर भी कार्रवाई हो सकती थी।
हालांकि, ट्रंप ने अब इस कानून के तहत कुछ प्रतिबंधों और शुल्कों से छूट देने का फैसला किया है। उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस को भेजे गए प्रमाणपत्र में कहा कि मौजूदा समय में यह छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।
ट्रंप ने क्यों लिया यूटर्न
ट्रंप के फैसले के पीछे सबसे अहम बात अमेरिका के राष्ट्रीय हितों से जुड़ी है। कार्यकारी आदेश में उन्होंने इसी आधार पर छूट देने की बात कही है। हालांकि, आदेश में इस फैसले के पीछे सभी कारणों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।
इस कदम से यह संकेत जरूर मिलता है कि रूस पर दबाव बनाने के लिए प्रस्तावित टैरिफ को लागू करने के मामले में अमेरिकी प्रशासन फिलहाल लचीला रुख अपना रहा है। इससे पहले भारत समेत कई देशों ने रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े इस कानून के संभावित व्यापारिक प्रभावों को लेकर चिंता जताई थी।
भारत को फायदा कैसे?
भारत और चीन रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल हैं। ऐसे में अगर अमेरिका भारतीय सामान पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाता, तो भारतीय निर्यातकों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता था।
प्रस्तावित टैरिफ मौजूदा अमेरिकी शुल्कों के अतिरिक्त लगाया जा सकता था। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करता कि किन देशों पर कितना शुल्क लगाया जाता और किन उत्पादों को इसके दायरे में रखा जाता।
गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में पहले भी रूसी तेल खरीदने का मुद्दा तनाव की वजह बना था। वर्ष 2025 में ट्रंप प्रशासन ने रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारतीय आयात पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया था। इसके अलावा 25% पारस्परिक टैरिफ भी लगाया गया था। फरवरी 2026 में अतिरिक्त शुल्क हटा दिया गया और भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे के तहत पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया गया था।
