चांदी के उत्पादन में इस राज्य की है मोनोपोली, देश की पांचों बड़ी खदानें यहीं, सबका मालिक एक
भारत की 5 सबसे बड़ी चांदी की खदानें राजस्थान में स्थित हैं, जिनका स्वामित्व वेदांता रिसोर्सेज के पास है और ...और पढ़ें

ये हैं भारत की 5 सबसे बड़ी चांदी की खदानें

समय कम है?
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नई दिल्ली। चांदी को सदियों से समृद्धि, शुद्धता और निवेश का प्रतीक माना गया है। आभूषणों से लेकर सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स तक, इसकी मांग हर युग में बनी रही। इस चमक के पीछे दुनिया भर में फैली चांदी की खदानें और उन्हें चलाने वाली कंपनियां हैं। दुनिया भर में 750 से ज्यादा चांदी की खदानें एक्टिव हैं, जिनमें से 6 भारत में हैं। यहां हम आपको इनमें से 5 सबसे खदानों की जानकारी देंगे।
सिंदेसर खुर्द खदान
सिंदेसर खुर्द खदान राजस्थान में मौजूद एक अंडरग्राउंड खदान है। इसकी ओनरशिप वेदांता रिसोर्सेज के पास है और इसने 2023 में अनुमानित 15.08 मिलियन औंस (4.27 लाख किलो) चांदी का उत्पादन किया। यह खदान 2029 तक चालू रहेगी।
रामपुरा अगुचा खदान
रामपुरा अगुचा खदान भी राजस्थान में स्थित है। इसकी मालिक भी वेदांता रिसोर्सेज ही है। इस भूमिगत खदान ने 2023 में अनुमानित 6.31 मिलियन औंस (1.78 लाख किलो) चांदी का उत्पादन किया। यह खदान 2033 तक चालू रहेगी।
जावर खदान
जावर खदान भी राजस्थान में है। इसकी ओनरशिप भी वेदांता रिसोर्सेज के पास है। इस खदान ने 2023 में अनुमानित 2.89 मिलियन औंस (81930 किलो) चांदी का उत्पादन किया। यह खदान 2031 तक चालू रहेगी।
राजपुरा दरीबा खदान
वेदांता रिसोर्सेज के स्वामित्व वाली राजपुरा दरीबा खदान भी राजस्थान में मौजूद एक अंडरग्राउंड खदान है। इस खदान ने 2023 में अनुमानित 1.47 मिलियन औंस (41673 किलो) चांदी का उत्पादन किया। यह खदान 2034 तक चालू रहेगी।
कायड़ खदान
वेदांता रिसोर्सेज की ही कायड़ खदान, राजस्थान में ही है। ये भी एक भूमिगत यानी जमीन के नीचे मौजूद खदान है। इसने 2023 में अनुमानित 253.51 हज़ार औंस (7186 किलो) चांदी का उत्पादन किया। यह खदान 2026 तक चालू रहेगी।
भारत में चांदी का इतिहास
भारत में चांदी का इतिहास हड़प्पा काल तक जाता है, लेकिन आधुनिक खनन मुख्य रूप से राजस्थान की अरावली पहाड़ियों से जुड़ा है। यहां सीसा-जस्ता अयस्क के साथ चांदी भी निकलती है। यही वजह है कि भारत की 5 सबसे बड़ी चांदी की खदानें राजस्थान में ही है।
आयात पर निर्भरता
राजस्थान के अलावा देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी छोटे स्तर पर चांदी युक्त अयस्क पाए जाते हैं। भारतीय खदानों में गहराई से खनन, उन्नत बेनिफिशिएशन प्लांट और जीरो-डिस्चार्ज तकनीक अपनाई जा रही है। देश में उत्पादन के बावजूद घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। इसलिए खनन के साथ-साथ रीसाइक्लिंग और रिफाइनिंग भी अहम भूमिका निभाते हैं।
कितना रहा चांदी का आयात?
वित्त वर्ष 26 (अप्रैल 2025–मार्च 2026) में भारत के चांदी के आयात में भारी उछाल देखने को मिला। औद्योगिक मांग और निवेश में बढ़ती दिलचस्पी के चलते आयात की वैल्यू साल-दर-साल लगभग 149% बढ़कर लगभग $12 बिलियन तक पहुँच गया।
वहीं, मजबूत स्थानीय मांग के कारण आयात की मात्रा में भी 42% से अधिक की वृद्धि हुई, जो कुल मिलाकर लगभग 7,334 टन रही।
