सोने की ज्वैलरी का बेताज बादशाह 'त्रिशूर': कहलाता है भारत की 'गोल्ड कैपिटल'; दुबई-सिंगापुर से यूरोप तक फैली चमक
केरल का त्रिशूर शहर भारत की 'गोल्ड कैपिटल' या 'गोल्डन सिटी' के नाम से जाना जाता है, जहाँ सोने के ...और पढ़ें

गोल्ड कैपिटल ऑफ इंडिया कौन-सा? (AI फोटो)
HighLights
त्रिशूर को भारत की 'गोल्ड कैपिटल' या 'गोल्डन सिटी' कहते हैं
यहाँ 3,000 इकाइयाँ और 40,000 कारीगर सोने का काम करते हैं
वार्षिक कारोबार ₹2.5 लाख करोड़, लाखों को रोजगार
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। सोने की चमक सिर्फ ज्वैलरी शोरूम की रोशनी में नहीं दिखती, बल्कि कुछ शहरों की पूरी अर्थव्यवस्था पर इसका असर नजर आता है। केरल का त्रिशूर ऐसा ही शहर है, जिसे लंबे समय से Gold Capital of India या Golden City of India कहा जाता है।
यहां सोने की खरीद-बिक्री के साथ-साथ डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, थोक कारोबार और ज्वैलरी रिटेल का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। रिपोर्ट्स के अनुसार त्रिशूर में राज्य की करीब 70% प्लेन गोल्ड ज्वैलरी का निर्माण होता है।
त्रिशूर है गोल्ड कैपिटल
त्रिशूर की पहचान सिर्फ बड़ी-बड़ी ज्वैलरी दुकानों से नहीं बनी। शहर और इसके आस-पास दशकों से सोने के कारीगरों और छोटे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का मजबूत नेटवर्क रहा है। यहां करीब 3,000 छोटे गोल्ड मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट यूनिट और लगभग 40,000 कारीगरों का क्लस्टर है।
यही नेटवर्क बड़े ज्वैलर्स को डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग सपोर्ट देता है। शहर में बड़े ज्वैलरी ब्रांड्स के मुख्यालय और शोरूम होने से कारोबार का पूरा इकोसिस्टम और मजबूत हुआ।
कितना प्रोडक्शन है यहां?
उत्पादन के आंकड़े स्रोत और परिभाषा के हिसाब से बदलते हैं। आंकड़ों में केरल में सालाना करीब 90 टन सोने के आभूषणों के निर्माण का अनुमान है, जबकि त्रिशूर को इसका सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बताया गया है।
दूसरी ओर, 2025 की एक उद्योग-आधारित रिपोर्ट ने त्रिशूर के गोल्ड ज्वैलरी क्लस्टर का सालाना उत्पादन लगभग 75–80 टन आंका।
कितने ज्वैलर्स और कारोबारी जुड़े हैं?
यहां 'ज्वैलर्स' की एक सिंगल आधिकारिक मौजूदा संख्या बताना मुश्किल है, क्योंकि रिटेल शोरूम, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और छोटे कारीगर प्रतिष्ठान अलग-अलग श्रेणियों में आते हैं। उपलब्ध डेटा के मुताबिक शहर के आस-पास करीब 3,000 सोने के आभूषण बनाने वाली इकाइयाँ हो सकती हैं।
इनमें करीब 40,000 कारीगर और अन्य कर्मचारी काम करते रहे हैं। उद्योग अनुमानों के मुताबिक त्रिशूर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 2 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
कितना है गोल्ड कारोबार?
त्रिशूर के गोल्ड कारोबार की बात करें तो एक अनुमान के अनुसार यहां का सालाना कारोबार ₹2.5 लाख करोड़ का है। हालांकि सोने की कीमत, बिक्री और बाजार का आकार अब बदल सकता है, जिसके आधार पर टोटल बिजनेस का डेटा अलग हो सकता है।
कितना है निर्यात?
त्रिशूर का महत्व केवल घरेलू बिक्री तक सीमित नहीं है। बल्कि यहां से बहुत से देशों को निर्यात भी किया जाता है। इनमें यूएई, यूएसए,सऊदी अरब, बहरीन, कतर, कुवैत, ओमान, यूरोप और सिंगापुर-मलेशिया शामिल हैं। माना जाता है कि इस शहर में मैन्युफैक्चरिंग मजबूत होने के बावजूद सीधे निर्यात को और बढ़ाने की गुंजाइश है।
सोने से आगे भी है त्रिशूर की कहानी
त्रिशूर की अर्थव्यवस्था केवल सोने पर टिकी नहीं है। यह बैंकिंग, फाइनेंस, रिटेल, टेक्सटाइल, आयुर्वेद और दूसरे कारोबारों का भी बड़ा केंद्र है। लेकिन गोल्ड और ज्वैलरी ने शहर को एक अलग पहचान जरूर दी है। यहां कारीगरों से लेकर बड़े ब्रांड्स तक पूरी वैल्यू चेन मौजूद है - यानी डिजाइन, निर्माण, थोक कारोबार और रिटेल एक ही कारोबारी इकोसिस्टम में जुड़े हैं।
यही वजह है कि त्रिशूर को सिर्फ केरल का नहीं, बल्कि भारत के प्रमुख सोने के गहनों के निर्माण और व्यापार केंद्रों में गिना जाता है।
