नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही के नतीजों पर नोटबंदी का बड़ा असर रहा है। यह बात केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्वीकार की है। हालांकि एग्रीकल्चर सेक्टर की ग्रोथ का हवाला देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि मंगलवार को जारी हुए जीडीपी के आंकड़ों ने उन सभी दावों को खारिज कर दिया है जिसमें ग्रामीण क्षेत्र के संदर्भ में बढ़ा चढ़ाकर बातें की जा रही थीं, जबकि कृषि क्षेत्र की वृद्धि रेकार्ड उच्चस्तर पर पहुंच गई। गौरतलब है कि मंगलवार को जीडीपी के साथ ही, कोर सेक्टर और फिस्कल डेपिसिट के आंकड़े जारी किए गए थे।

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक अरुण जेटली ने कहा, “बाजार में नोट डालने का काम काफी आगे पहुंच चुका है। इसके साथ साथ अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती से आर्थिक वृद्धि में तेजी लौटने के संकेत हैं।” वहीं दूसरी तरफ विपक्ष और विभिन्न एजेंसियों की ओर से किए गए दावों पर जेटली ने कहा, “अंदाजे से बोलना एक बात है और वास्तविकता दूसरी। मैं पहले भी कह रहा था कि एक्साइज, वैट और टैक्स कलेक्शन के जो आंकड़े आ रहे हैं वह बता रहे हैं कि अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का बुरा असर नहीं पड़ा है।'

क्या रहा सीएसओ का अनुमान
केंद्रीय सांख्यिकी विभाग (सीएसओ) की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ रेट के 7.1 फीसद रहने का अनुमान है। वहीं 2018 में जीडीपी ग्रोथ के 7.3 फीसद की दर से बढ़ने की संभावना है। वहीं 2019 के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट 7.7 फीसद रहने का अनुमान है। आज जारी हुए जीडीपी आंकड़ों के मद्देनजर यह कहा जा सकता है कि नोटबंदी का फिलहाल देश की जीडीपी ग्रोथ पर कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है।

Posted By: Praveen Dwivedi

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