सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कैसे बना था रुपये का '₹' वाला डिजाइन? 3,331 डिजाइन के बीच चुने गए दो लाइन वाले चिन्ह और डिजाइनर का दिलचस्प किस्सा

Published: Sun, 24 May 2026 05:02 PM (IST)

भारतीय रुपये के प्रतीक चिन्ह '₹' के निर्माण की दिलचस्प कहानी जानें। 2009 में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 3,331 डिजाइनों में से डी. उदय कुमार का डिजाइन चुना गया।

₹ का प्रतीक चिन्ह बनाने वाले  डी. उदय कुमार

₹ का प्रतीक चिन्ह बनाने वाले  डी. उदय कुमार

HighLights

  1. रुपये के प्रतीक चिन्ह के लिए राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2009 में हुई।

  2. डी. उदय कुमार ने देवनागरी 'र' और 'R' का मिश्रण बनाया।

  3. 15 जुलाई 2010 को ₹ चिन्ह सार्वजनिक रूप से अपनाया गया।

नई दिल्ली| हम सब जानते हैं कि हर देश की अपनी अलग-अलग करेंसी होती है। भारत की मुद्रा को भी रुपया कहा जाता है। भारतीय रुपये को लिखने या दर्शाने के लिए '₹' का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन ज्यादातर लोगों को रुपये के इस प्रतीक चिन्ह (₹) के बनने की कहानी नहीं मालूम होगी। आइए जानते हैं दिलचस्प प्रतीक चिन्ह का किस्सा।

चिन्ह बनाने के लिए हुई थी प्रतियोगिता

भारतीय मुद्रा का प्रतीक चिन्ह बनाने के लिए भारत सरकार ने एक ओपन राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन किया था। इस प्रतियोगिता की घोषणा 05 मार्च 2009 को हुई थी। इस प्रतियोगिता में केवल भारत के लोग ही हिस्सा ले सकते थे। रुपये के चिन्ह को बनाने के लिए ऐसे डिजाइन की तलाश थी जो ना सिर्फ आसानी से समझ आए बल्कि भारतीय संस्कृति को भी पहचान दे। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि उन दिनों 3,331 डिजाइन जमा किए गए थे।

₹ को कैसे चुना गया?

3,331 से अधिक डिजाइनों में से सिर्फ 5 डिजाइनों को शार्ट लिस्ट किया गया था। उसके बाद जूरी को डिजाइन दिखाए गए, दिलचस्प बात ये रही की जूरी को दिखाए गए डिजाइनों में किसी का नाम नहीं मेंशन था ताकि निष्पक्ष फैसला लिया जा सके।

₹ के प्रतीक चिन्ह का क्या मतलब था?

आप जो ₹ का प्रतीक देखते हैं, ये देवनागरी अक्षर र और अंग्रेजी के का मिश्रण डिजाइन है। ऊपर जो 2 लाइनें दिखती हैं ये भारत के तिरंगे का अनुपात और आर्थिक स्थिरता का संकेत मानी जाती हैं। उस दौरान शार्ट लिस्ट की गई 5 डिजाइनों में इस डिजाइन में भारत की संस्कृति का प्रतीक और आसानी से पढ़ा जाने वाला चिन्ह माना गया था।

डिजाइनर के बारे में दिलचस्प बातें

भारत सरकार की ओर से कराई गई प्रतियोगिता में 3,331 डिजाइनों की एंट्री हुई थी। लेकिन जिस शख्स का डिजाइन चुना गया उनका नाम डी. उदय कुमार है। उस वक्त उन्हें सरकार की ओर से ₹2.5 लाख का पुरस्कार भी मिला था। कई मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्रतियोगिता के समय वे IIT Bombay में थे। वे वहां Industrial Design Centre (IDC) में अपनी PhD पूरी कर रहे थे। ₹ चिन्ह चुने जाने के अगले ही दिन उन्हें IIT Guwahati में नई नौकरी ज्वाइन करनी थी।

ये भी पढ़ें: अमेरिका में बसने का सपना देखने वाले भारतीयों को झटका, ट्रंप सरकार की नई घोषणा; ग्रीन कार्ड चाहिए तो करना होगा ये काम...

कब से चलन में है ₹?

भारतीय रुपये को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भारत सरकार द्वारा 15 जुलाई 2010 को सार्वजनिक किया गया था। अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पाउण्ड, जापानी येन और यूरोपीय संघ के यूरो के बाद रुपया पांचवी ऐसी मुद्रा बन गया है, जिसे उसके प्रतीक-चिह्न से पहचाना गई। भारतीय रुपये के लिये अन्तर्राष्ट्रीय तीन अंकीय कोड (अन्तर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO) मानक ISO 4217 के अनुसार) INR है।

 

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।