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TATA Trust लिस्टिंग टालने का मर्जर से निकाल रही तोड़! TESS और TCE का टाटा संस में विलय का प्रस्ताव

Published: Mon, 28 Sep 2026 08:22 PM (IST)

टाटा ट्रस्ट ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का टाटा संस में विलय का प्रस्ताव ...और पढ़ें

टाटा ट्रस्ट का मास्टरस्ट्रोक: मर्जर से टालेगी टाटा संस की लिस्टिंग

टाटा ट्रस्ट का मास्टरस्ट्रोक: मर्जर से टालेगी टाटा संस की लिस्टिंग

HighLights

  1. टाटा ट्रस्ट ने TESS और TCE के विलय का प्रस्ताव दिया।

  2. लक्ष्य: टाटा संस को NBFC लिस्टिंग से बचाना।

  3. RBI और टाटा संस बोर्ड की मंजूरी आवश्यक है।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में RBI ने टाटा ट्रस्ट की लिस्टिंग की बात कही थी लेकिन, टाटा ऐसा नहीं चाहती है। इस बीच अब TATA Trust ने लिस्टिंग टालने का स्मार्ट तरीका मर्जर से पेश कर रही है। टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड में विलय करने का प्रस्ताव दिया है। इस रीस्ट्रक्चरिंग का मकसद ग्रुप होल्डिंग कंपनी को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) दोनों की रेगुलेटरी परिभाषाओं से बाहर लाना है।

टाटा ट्रस्ट्स की ओर से 28 सितंबर को घोषित इस प्रस्ताव को टाटा संस बोर्ड और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मंजूरी जरूरी है। यदि यह मंजूरी मिल जाती है तो यह टाटा ट्रस्ट की बड़ी जीत होगी। साथ ही टाटा संस एक अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी का अपना स्टेटस बनाए रख सकती है।

टाटा ट्रस्ट्स, जिसके पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, ने कंपनी के बोर्ड को पत्र लिखकर इस रीस्ट्रक्चरिंग पर विचार करने और मंजूरी देने के साथ-साथ जरूरी नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए RBI में आवेदन करने को कहा है।

ट्रस्ट्स ने एक बयान में कहा, "टाटा ट्रस्ट्स, TSPL के साथ मिलकर, प्रस्तावित रीऑर्गनाइजेशन के सभी पहलुओं पर RBI के साथ बातचीत करेगा।"

यह योजना टाटा संस के लिए पब्लिक लिस्टिंग से बचने का एक नया स्ट्रक्चरल रास्ता है, क्योंकि RBI ने इस महीने की शुरुआत में CIC के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के उसके आवेदन को खारिज कर दिया था। एक अपर-लेयर NBFC के तौर पर, टाटा संस पर कड़े रेगुलेटरी नियम लागू होते हैं, जिनमें अनिवार्य लिस्टिंग भी शामिल है।

टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक इस मिली-जुली कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 1,05,043 करोड़ रुपये होता, जबकि फाइनेंशियल एसेट्स से आय 40,072 करोड़ रुपये होती। ऑपरेटिंग रेवेन्यू नई कंपनी की कुल आय का 64.3 फीसदी होता।

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