टाटा ने भारत को पहली बार दिया था पैकेट वाला नमक, लॉन्चिंग पर मचा था विवाद; आज घर घर में पहुंचाता है स्वाद
Tata Salt: टाटा सॉल्ट की शुरुआत 1944 में एक बाय-प्रोडक्ट के रूप में हुई, जिसने भारत में पैकेटबंद आयोडाइज्ड नमक ...और पढ़ें
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कैसे शुरू हुआ था देश का नमक?
HighLights
1944 में एक बाय-प्रोडक्ट के रूप में टाटा नमक की शुरुआत हुई।
भारत में पैकेटबंद आयोडाइज्ड नमक पेश कर क्रांति लाई।
आयोडीन के महत्व पर जागरूकता फैलाकर जन-विरोध को बदला।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: एक वक्त था जब घर की रसोई में सिर्फ नमक की जरूरत होती थी, लेकिन आज उसी नमक के कारोबार से निकली एक कंपनी दाल, मसाले, तेल, स्नैक्स, नूडल्स, सॉस और रेडी-टू-कुक फूड तक पहुंच चुकी है। बात सिर्फ एक प्रोडक्ट की नहीं है, बल्कि उस सफर की है जिसमें रोजमर्रा की रसोई का सामान बेचने वाला कारोबार धीरे-धीरे हजारों करोड़ रुपये के बड़े Consumer Business में बदल गया।
हम बात कर रहे हैं देश का नमक बनाने वाली कंपनी "Tata Salt" की। क्या आप जानते हैं देश का नमक बनाने वाले Tata Salt की शुरुआत कैसे हुई? आइए इस सुनहरे सफर पर एक नजर डालते हैं।
कैसे आया नमक का आइडिया
टाटा ग्रुप ने 1927 में गुजरात के ओखा से नमक उत्पादन की शुरुआत की थी, लेकिन देश को सबसे शुद्ध नमक देने का विचार 1944 में एक दिलचस्प घटना से आया। दरअसल, गुजरात के मिथापुर में टाटा केमिकल्स के सोडा ऐश प्लांट को मीठे पानी की सख्त जरूरत थी, लेकिन तटीय इलाका होने के कारण वहां पानी की भारी किल्लत थी।
इस समस्या से निपटने के लिए टाटा ने अरब सागर के खारे पानी को साफ कर मीठा पानी बनाने का फैसला किया। पानी तो प्लांट के काम आ गया, लेकिन इस प्रक्रिया के अंत में बाय-प्रोडक्ट के रूप में भारी मात्रा में ऐसा बेहतरीन और उच्च गुणवत्ता वाला नमक बच गया जिसमें जिप्सम या चौक जैसी कोई मिलावट नहीं थी; और इसी शानदार खोज ने भारत के सबसे शुद्ध 'टाटा नमक' की नींव रखी।
टाटा नमक लॉन्च होने से पहले लोग खुला यानी बिना पैकेट वाला नमक खरीदते थे। भारत की बड़ी आबादी आयोडीन की भारी कमी से जूझ रही थी। आयोडीन न मिलने के कारण घेंघा रोग, मानसिक विकास में रुकावट और गर्भवती महिलाओं में कई समस्याएं हो रही थीं। तभी लॉन्च हुआ टाटा नमक।
कैसे हुई शुरुआत?
इस कहानी की शुरुआत 1983 में Tata Salt के लॉन्च के साथ हुई। Tata Consumer Products के पुराने Annual Report के मुताबिक, Tata Salt भारत के शुरुआती पैकेज्ड आयोडाइज्ड नमक ब्रांड्स में शामिल था। कंपनी ने नमक को सिर्फ एक सामान्य किराना प्रोडक्ट की तरह बेचने के बजाय इसे भरोसे, क्वालिटी और आयोडीन जैसे मुद्दों से जोड़कर एक बड़े Consumer Brand के तौर पर खड़ा किया।
लोगों ने जमकर किया था विरोध!
चूंकि सदियों से लोग खुला और बिना पैकेट वाला नमक खा रहे थे । उन्हें आदत थी सस्ता नमक खाने की। लोगों को पैकेट वाले महंगे नमक की जरूरत समझ नहीं आ रही थी और बिक्री बहुत सुस्त पड़ती चली गई। ब्रांड को डूबने से बचाने और लोगों को जागरूक करने के लिए टाटा ने अपनी रणनीति बदल डाली।
टाटा सॉल्ट की मदद से टाटा ग्रुप ने लोगों के समझाने की कोशिश की कि आयोडीन बच्चों के दिमाग और सेहत के लिए कितना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दिखाया कि खुला नमक कितना गंदा और बीमारियों से भरा होता है, जबकि टाटा नमक वैक्यूम-इवेपोरेटेड और सीलबंद है। इसके बाद ही ग्रुप ने 'देश का नमक' अभियान शुरू किया।
कैसे बढ़ा कारोबार
समय के साथ यह कारोबार सिर्फ नमक तक सीमित नहीं रहा। Tata Salt के साथ Salt Lite, Rock Salt और दूसरे प्रोडक्ट्स पोर्टफोलियो में आए। इसके बाद कंपनी ने भारतीय घरों की रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दाल, मसाले, ड्राई फ्रूट्स और दूसरे pantry products की कैटेगरी में भी विस्तार किया।
Tata Sampann से दाल-मसाले तक पहुंचा ब्रांड
इस विस्तार का बड़ा हिस्सा Tata Sampann रहा। इसके तहत दाल, मसाले, ड्राई फ्रूट्स, cold-pressed oils और दूसरे food products बेचे जाते हैं। FY2025-26 में Tata Sampann का revenue 1,500 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया और कंपनी के मुताबिक ब्रांड ने साल के दौरान 46% की revenue growth दर्ज की। पिछले पांच साल में इसकी revenue CAGR 34% रही है।
कारोबार कितना बड़ा हो चुका है?
FY2025-26 में Tata Consumer Products का consolidated revenue 20,290 करोड़ रुपये रहा। यह FY2024-25 के 17,618 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 15% ज्यादा है। FY26 में कंपनी का EBITDA 2,815 करोड़ रुपये और group net profit 1,547 करोड़ रुपये रहा।
31 मार्च 2026 को कंपनी की market capitalisation करीब 1,00,421 करोड़ रुपये थी। कंपनी के मुताबिक उसके प्रोडक्ट्स की पहुंच करीब 29 करोड़ भारतीय घरों तक है और उसका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क करीब 45 लाख रिटेल आउटलेट तक फैला है।
